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    भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए राज्य की ओर से जमीन मुहैया नहीं कराने पर कलकत्ता HC नाराज, कहा- देरी बर्दाश्त नहीं

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 11:30 PM (IST)

    कलकत्ता हाई कोर्ट ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन मुहैया कराने में राज्य सरकार की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई है। अदालत ने राज्य सरकार को अंतिम चेतावनी देते हुए एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। केंद्र सरकार ने बाड़ निर्माण के लिए धन जारी कर दिया है, लेकिन राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सीमा पर तारबंदी न होने से घुसपैठ और तस्करी का खतरा बना रहता है।

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    भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए राज्य की ओर से जमीन मुहैया नहीं कराने पर कलकत्ता HC नाराज (फाइल फोटो)

    राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट ने भारत-बांग्लादेश सीमा के खाली हिस्सों पर बाड़ लगाने के लिए राज्य सरकार की ओर से जमीन मुहैया नहीं कराए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य ने इसके लिए अतिरिक्त समय की मांग की, जिस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इससे पहले भी समय ले चुकी है।

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    अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कांटेदार तार लगाने का मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। इतने गंभीर मामले में और समय नहीं दिया जा सकता। अदालत ने राज्य सरकार को रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय प्रदान किया है।

    मालूम हो कि बंगाल की 2,216 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश से लगती है। इस लंबी सीमा में करीब 600 किलोमीटर में तारबंदी नहीं है। जिसकी वजह से यहां से घुसपैठ और तस्करी होती रहती है। हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर भारत-बांग्लादेश सीमा के खाली हिस्सों पर बाड़ लगाने की मांग की गई है।

    राज्य की ओर से नहीं की गई कोई ठोस पहल

    कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर राज्य की रिपोर्ट में कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिलता है, तो मामले की सुनवाई लगातार की जाएगी।

    सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल अशोक चक्रवर्ती ने कहा कि बाड़ निर्माण के लिए आवश्यक जमीन खरीदने के लिए धनराशि भी जारी की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद राज्य की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

    राज्य सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण में सक्रियता न दिखाने के कारण कंटीले तारों की बाड़ लगाने का काम नहीं हो पा रहा है। वहीं, इस मुद्दे पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर तारबंदी नहीं किए जाने के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

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