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    चुनाव ड्यूटी में अदालती कर्मियों को लगाना गलत, हाई कोर्ट की फटकार के बीएमसी कमिश्नर ने मानी गलती

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 07:58 PM (IST)

    बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) आयुक्त भूषण गगरानी ने बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि उन्होंने महानगर की अदालतों के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए रिपोर ...और पढ़ें

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    बीएमसी कमिश्नर को हाई कोर्ट की फटकार।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के आयुक्त भूषण गगरानी ने सोमवार को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने की गलती मानते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि उन्होंने उन निर्देशों को वापस ले लिया है जिनमें महानगर की अदालतों के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करने को कहा गया था। गगरानी ने यह फैसला हाई कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद लिया, जिसने उनके कार्यों के कानूनी आधार पर सवाल उठाया था।

    यह पूरा विवाद 22 दिसंबर, 2025 को शुरू हुआ, जब आयुक्त ने जिला चुनाव अधिकारी के तौर पर मुंबई की अदालतों के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करने के पत्र जारी किए। उसी दिन चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट और रजिस्ट्रार (इंस्पेक्शन) ने एक पत्र में उन्हें बताया था कि हाई कोर्ट पहले ही अदालती कर्मचारियों को छूट देने का प्रशासनिक फैसला ले चुका है।

    स्पष्ट निर्देश के बावजूद आयुक्त ने 29 दिसंबर को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट को एक और पत्र भेजा। इसमें बताया गया कि अदालती कर्मचारियों को छूट देने का अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया है। इस कदम के बाद हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई की थी। हाई कोर्ट ने 30 दिसंबर को विशेष सुनवाई में गगरानी के उन पत्रों पर रोक लगा दी। साथ ही उनके अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया था।

    मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड की खंडपीठ ने सोमवार को बीएमसी आयुक्त से सवाल किया, ''आपको किस प्रविधान से अधिकार मिले हैं? आप उन्हें नहीं बुला सकते। आपके पास अधिकार नहीं हैं।''

    गगरानी के वकील रवि कदम ने माना कि उक्त निर्देश गलती थी और उन्हें औपचारिक रूप से वापस ले लिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि शेरिफ के कार्यालय से कर्मचारियों को बुलाने का रिटर्निंग आफिसर का पत्र भी वापस ले लिया गया है।

    इन दलीलों से अप्रभावित हाई कोर्ट ने कहा, ''अब खुद को बचाइए। आप दूसरे स्त्रोतों से व्यवस्था करें। हम आपकी बात चुनावों के बाद सुनेंगे।''

    गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद-235 के तहत हाई कोर्ट का कर्मचारियों समेत अपने अधिकार क्षेत्र की अदालतों पर पूर्ण नियंत्रण एवं निगरानी का अधिकार है और इसी आधार पर उसने अदालती कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से छूट देने का आदेश जारी किया था।

    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)