'डिलीवरी की तारीख बताओ, उठवा लेंगे', गर्भवती महिला ने की सड़क बनवाने की मांग तो BJP सांसद के बिगड़े बोल
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में सड़क की मांग को लेकर एक महिला लीला साहू ने वीडियो जारी किया था। लीला ने कहा कि गांव में सड़क नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को परेशानी हो रही है। इस पर भाजपा सांसद राजेश मिश्रा ने लीला से डिलीवरी की डेट पूछ ली।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के सीधी जिले में सड़क की मांग को लेकर जो हो-हल्ला कटा था, वह अब इस स्थिति तक पहुंच गया है कि भाजपा सांसद ने लीला साहू से डिलीवरी की डेट तक पूछ दी है। उन्होंने कहा कि वह एक हफ्ता पहले लीला साहू को उठवाकर अस्पताल में भर्ती करवा देंगे।
ये बयान सीधी से भाजपा के सांसद राजेश मिश्रा का है। एमपी सच में अजब है। यहां सड़क की मांग करो, तो सड़क नहीं मिलती। मिलता है तो बस आश्वासन। आश्वासन ये कि सड़क जल्द बन जाएगी, लेकिन अगर दोबारा इस आश्वासन को याद दिलाओ, तो पूछ ली जाती है डिलीवरी की डेट। सांसद कह देते हैं- 'सड़क हम थोड़ी बनाते हैं, वो तो इंजीनियर बनाता है।'
वीडियो बनाकर मांगी थी सड़क
बात उस वीडियो से शुरू करते हैं, जिसमें लीला साहू नाम की एक महिला ने गांव में सड़क बनाने की मांग की थी। वीडियो एमपी के सीधी जिले का था और जब वायरल हुआ, तो अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। लीला साहू तक फरमान पहुंचाया गया कि सड़क जल्द बन जाएगी। एक साल बीत गया, लेकिन सड़क तो छोड़िए, गांव में एक गिट्टी-पत्थर तक न गिरा।
लीला साहू फिर एक्टिव हुईं और एक वीडियो फिर से जारी किया। वीडियो में लीला ने कहा कि प्रदेश में डबल इंजन की सरकार के बावजूद यहां सड़क नहीं बन पाई है। कोई जनप्रतिनिधि या अधिकारी इसे देखने तक नहीं आया। गांव में 6 महिलाएं गर्भवती हैं। मेरी भी डिलीवरी का समय आने वाला है। देखना है कि कितनी सुविधाएं मिलती हैं।
सड़क नहीं दी, डिलीवरी डेट पूछ ली
- आम तौर पर तो यही उम्मीद की जाती है कि अगर किसी गांव में सड़क नहीं है, तो बन जानी चाहिए। अगर किसी ने वीडियो बनाकर अपनी पीड़ा बताई है, तो अब तो काम शुरू हो ही जाना चाहिए। लेकिन सीधी से भाजपा सांसद राजेश मिश्रा ने ऐसी दलील दे दी कि सड़क तो छोड़िए, कोई कंकड़ तक न मांगे।
- सांसद महोदय से जब इस पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि चिंता की क्या बात है। हमारे पास एंबुलेंस है, अस्पताल है, हर इलाके में आशा कार्यकर्ता हैं। अगर कोई ऐसी बात है, तो आकर अस्पताल में भर्ती हो जाओ। डिलीवरी की एक डेट होती है, उससे पहले उठवा लेंगे। राजेश मिश्रा ने कहा कि सड़क हम नहीं बनाते, इंजीनियर बनाता है।
- वहीं राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह दो कदम और आगे बढ़ गए। उन्होंने कहा कि अगर कोई वीडियो बना देगा, तो इसका मतलब ये नहीं कि हम सीमेंट-कंक्रीट या डंपर लेकर पहुंच जाएंगे। कोई कुछ भी पोस्ट कर देगा, तो क्या हम मान लेंगे। अब लीला साहू के गांव में सड़क बने या न बने, ये वो कहावत सच ही हो गई कि भारत में राजनीति दो ही चरणों में होती हैं- चुनाव के पहले नेता जनता के चरणों में और चुनाव के बाद जनता नेता के चरणों में।
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