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    मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सियासी पारा हाई, SC जाने की तैयारी में कांग्रेस; क्यों अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करते हैं राजनीतिक दल?

    Updated: Fri, 04 Jul 2025 11:00 PM (IST)

    बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के खिलाफ कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है और अन्य विपक्षी दल भी ऐसा कर सकते हैं। विपक्षी दलों द्वारा अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करने की रणनीति अपनाई जाती है ताकि मुद्दे को लम्बे समय तक जीवित रखा जा सके और एक साथ याचिका खारिज होने का खतरा न रहे। इससे पहले भी कई मुद्दों पर याचिकाएं दाखिल हुई हैं।

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    बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण कांग्रेस पहुंची सुप्रीम कोर्ट। (फाइल फोटो)

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बिहार में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान के खिलाफ कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि अन्य विपक्षी दल भी ये कदम उठा सकते हैं। विपक्षी दल अक्सर यही करते हैं कि किसी मुद्दे पर विरोध को लेकर तो वे एकमत होते हैं, लेकिन अदालत जाते समय अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करते हैं।

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    इतना ही नहीं राजनीतिक दल अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करने के साथ ही सीधे पार्टी की ओर से याचिका दाखिल करने की बजाए पार्टी नेताओं से व्यक्तिगत रूप से याचिकाएं दाखिल कराते हैं। इसके पीछे मुद्दे को लंबे समय तक जिंदा रखने की रणनीति होती है। साथ ही एक साथ याचिका खारिज होने का खतरा भी नहीं होता।

    बिहार में गरमाया मतदाता सूची पुनरीक्षण का मुद्दा

    बिहार में अभी मतदाता सूची पुनरीक्षण का मुद्दा गर्माया हुआ है और विपक्षी दल चुनाव आयोग द्वारा अपनाई जा रही प्रक्रिया का विरोध करते हुए आरोप लगा रहे हैं कि इससे बहुत से लोग मतदाता सूची से बाहर हो जाएंगे। वह इस मुद्दे पर आयोग को शिकायत और आपत्तियां दे चुके हैं और अब कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

    पहले भी कई मुद्दों पर दायर हो चुकी हैं याचिकाएं

    वक्फ संशोधन कानून लागू करने के वक्त भी ऐसा ही हुआ था। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जैसे कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, इमरान प्रतापगढ़ी, एआइएमआइएम प्रमुख असदुद्दीन औवैसी, आम आदमी पार्टी के अमानतुल्लाह खान, आरजेडी नेता मनोज झा, डीएमके सांसद ए. राजा आदि हैं।

    पूजा स्थल कानून के मामले में कई याचिकाएं हुई थीं दाखिल

    इसी तरह कई नेताओं ने पूजा स्थल कानून के मामले में याचिकाएं कर रखी हैं। इस तरह अलग अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करना रणनीति का हिस्सा होता है। सबसे पहले तो राजनीतिक दल की याचिका पर विरोधी पक्ष या सरकार लोकस यानी औचित्य का प्रश्न उठा सकती है। कह सकते हैं कि राजनीतिक दल जनहित याचिका कैसे दाखिल कर सकते हैं इनके किस मौलिक अधिकार का हनन हुआ है।

    क्यों अलग-अलग याचिकाएं दाखिल करते हैं राजनीतिक दल?

    मान लें अगर कोर्ट ये आपत्तियां ठुकरा भी देता है तो भी राजनीतिक दल अलग-अलग याचिका दाखिल करने को ही प्राथमिकता देते हैं। इसका कारण है कि अलग-अलग याचिका दाखिल करने से एक साथ सभी के खारिज होने का खतरा नहीं होता और मुद्दा भी लंबे समय तक जीवित रहता है।

    पार्टियां सीधे याचिका दाखिल करने से भी बचती हैं। उसके बजाए अपने नेताओं के जरिए व्यक्तिगत तौर पर याचिका कराती हैं, जिससे दल के कोर्ट पहुंचने का राजनीतिक संदेश तो जनता के बीच जाए और केस जीतने पर श्रेय भी पार्टी को मिले लेकिन केस के हारने का दल पर असर न हो।

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