उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी का विरोश शुरू, दिल्ली पहुंचे माओवादी हिंसा के पीड़ित; पार्टियों से वोट न देने की अपील
माओवादी हिंसा से पीड़ित बस्तर के आदिवासियों ने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी के खिलाफ मोर्चा खोला है। पीड़ितों ने जस्टिस रेड्डी पर सलवा जुडूम को बंद करने का आरोप लगाया है जिसके कारण हजारों आदिवासी मारे गए और बस्तर विकास में पिछड़ गया। उन्होंने राजनीतिक दलों से जस्टिस रेड्डी को वोट न देने की अपील की।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सलवा जुडूम को बंद करने के लिए 2011 में फैसले को लेकर विपक्ष के उपराष्ट्रपति जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी के खिलाफ माओवादी हिंसा के पीड़ित बस्तर के आदिवासियों ने मोर्चा खोल दिया है।
दिल्ली में अपनी व्यथा सुनाने पहुंचे पीड़ितों ने जस्टिस रेड्डी के हाथ खून से सने होने का आरोप लगाते हुए राजनीतिक दलों से जस्टिस रेड्डी को वोट नहीं देने की अपील की। बस्तर शांति मंच के बैनर तले कांस्टीट्यूशन क्लब में जमा हुए आदिवासियों ने माओवादी हिंसा के शिकार महिलाएं और बच्चे भी थे।
वोट न करने की अपील की
इनमें किसी का एक पैर नहीं है तो किसी के पेट में गोलियों के निशान है। जिंदगी भर के लिए अपाहिज बन गए लोगों और अनाथ बन गए बच्चों ने कहा कि हम यहां गुजारिश करने आए हैं कि उस पूर्व जज को वोट ना जिन्होंने छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम को बंद करने का आदेश दिया था।
बस्तर शांति समिति के संयोजक जयराम ने कहा कि जब बस्तर माओवाद से मुक्ति के तरफ बढ़ रहा था तब 2011 में सुप्रीम कोर्ट के जज बी सुदर्शन रेड्डी ने शक्तिशाली लोगों के प्रभाव में आकर प्रतिबंध लगा दिया। उनके इस फैसले के कारण हजारों आदिवासी मारे गए, हजारों अपाहिज हो गए और बस्तर विकास में सालों पीछे चला गया।
उनके फैसले के बाद माओवादी बस्तर के गांव में घुसकर हम गरीब आदिवासियों को मारने लगे। हमारे लिए सुप्रीम कोर्ट का वो आदेश हादसा बन गया। पिछले दिनों गृहमंत्री अमित शाह ने भी जस्टिस रेड्डी को सलवा जुडूम के मुद्दे पर घेरा था।
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