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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 25, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Atal Bihari Vajpayee Birth Anniversary: खास तरीके से BJP मनाएगी राजनीति के शिखर पुरुष का जन्मदिन, PM Modi भी करेंगे पुष्पांजलि अर्पित

Published: Mon, 25 Dec 2023 06:30 AM (IST)

तीन बार प्रधानमंत्री रहे अटल जी ने 1999 में पाकिस्तान की सेना द्वारा कारगिल की चोटियों पर कब्जा किए जाने ...और पढ़ें

खास तरीके से BJP मनाएगी राजनीति के शिखर पुरुष का जन्मदिन
खास तरीके से BJP मनाएगी राजनीति के शिखर पुरुष का जन्मदिन

HighLights

  1. अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 1924 में आज ही मध्यप्रदेश में हुआ था।
  2. 1951 में बनी जनसंघ पार्टी के संस्थापक सदस्यों में एक रहे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आज देश के पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती है। उनके जन्मदिन को देशभर में सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस बार 99वीं जयंती पर भाजपा इसे यादगार बनाने के लिए देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित करने वाली है।

हमेशा की तरह इस खास मौके पर PM Modi मोदी अटल स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने देश भर के पार्टी पदाधिकारियों से सभी बूथों पर  पूर्व पीएम के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने और उनके अद्भुत व्यक्तित्व पर चर्चा करने को कहा है।

अटल का सफर...

कवि, पत्रकार और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 1924 में आज ही मध्यप्रदेश में हुआ था। ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज से स्नातक किया । राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर के लिए कानपुर के डीएवी कालेज गए। यहां उनके पिता ने भी दाखिला लिया और दोनों हास्टल के एक ही कमरे में रहते थे। 1942 में 16 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय सदस्य बने।

1951 में बनी जनसंघ पार्टी के संस्थापक सदस्यों में एक रहे। 1975 में लगी इमरजेंसी के दौरान जेल गए। 1977 में विदेश मंत्री होने के नाते उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया। ऐसा करने वाले वह पहले भारतीय नेता थे। वे वीर रस के कवि थे। उनकी कविताएं निराशा और अंधकार में उम्मीद और रोशनी की लौ जलाती हैं।

तीन बार प्रधानमंत्री रहे अटल जी ने 1999 में पाकिस्तान की सेना द्वारा कारगिल की चोटियों पर कब्जा किए जाने के बाद जून में आपरेशन विजय को हरी झंडी दी। 1998 में पोखरण परीक्षण कराकर खुद को साहसी और सशक्त नेता के तौर पर स्थापित किया। 1992 में पद्म विभूषण और 2015 में भारत रत्न से सम्मानित किए गए। 16 अगस्त, 2018 को दुनिया को अलविदा कह गए।

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