नई दिल्ली, एजेंसी। असम-मेघालय सीमा पर मंगलवार सुबह लकड़ी तस्करों को रोकने पर हिंसा भड़क गई थी। हिंसा के दौरान हुई गोलीबारी में वन रक्षक समेत 6 लोगों की मौत हो गई। अब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हिंसा की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है।

असम कैबिनेट की बैठक में हुआ फैसला

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को दिल्ली में कहा कि उनकी कैबिनेट ने दोनों राज्यों की सीमा पर हुई हिंसा की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है। सरमा दिल्ली में अमित शाह से मिलने आए थे। दिल्ली में ही असम कैबिनेट की बैठक भी हुई थी। कैबिनेट ने राज्य पुलिस को नागरिकों की संलिप्तता वाले मुद्दों या अव्यवस्था से निपटने के दौरान संयम बरतने को कहा।

एसओपी लाएगी राज्य सरकार

कैबिनेट बैठक के दौरान नागरिकों के साथ विवाद से उत्पन्न स्थितियों से निपटने के लिए पुलिस और वनकर्मियों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लाने का फैसला किया गया। सरमा ने ट्वीट कर लिखा कि हमने पुलिस को नागरिकों से निपटने के दौरान घातक हथियारों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की सलाह दी है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस के साथ-साथ वनकर्मियों के लिए एसओपी तैयार की जाएगी। ऐसे मामलों पर सभी थाना प्रभारियों को संवेदनशील बनाया जाएगा।

इससे पहले, मेघालय कैबिनैट ने फैसला लिया कि सीएम कोनराड संगमा के नेतृत्व में मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल गृह मंत्री अमित शाह से मिलेगा। राज्य सरकार गृह मंत्री से मुलाकात कर सीबीआई या एनआईए जांच की मांग करेगी।

वन कार्यालय में आगजनी

वहीं, असम-मेघालय सीमा पर असम पुलिस व वन विभाग की ओर से की गई फायरिंग में पांच ग्रामीणों की मौत के मामले ने फिर तूल पकड़ लिया। मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले के मुकरोह गांव के ग्रामीण देर रात चाकू, लाठियों से लैस होकर सीमावर्ती असम के वेस्ट कार्बी आंगलांग जिले के वन कार्यालय पर पहुंचे और वहां आग लगा दी। अधिकारियों ने कहा कि भीड़ ने वन कार्यालय में तोड़फोड़ की और परिसर में खड़ी मोटरसाइकिल, फर्नीचर और दस्तावेज को आग के हवाले कर दिया। एक अधिकारी ने बताया कि हालांकि वहां तैनात वनकर्मियों में से किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।

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Edited By: Manish Negi

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