गुजरात में एशिया शेरों को लेकर आई खुशखबरी, पांच वर्षों में Asiatic Lions की संख्या 674 से बढ़कर 891 हुई
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की देखरेख में हुई इस गणना की बुधवार को सामने आयी रिपोर्ट में जहां गिर राष्ट्रीय उद्यान व वन्यजीव अभयारण्य में 384 शेर पाए गए वही 507 शेर इसकी सीमा के बाहर पाए गए। इससे साफ है कि शेर अपनी बढ़ रही आबादी के हिसाब से अपने रहवास को विस्तार दे रहे है।

अरविंद पांडेय, नई दिल्ली। वन्यजीवों के लिहाज से एक बड़ी खुशखबरी सामने आयी है। देश में एशियाई शेरों की आबादी में पिछले पांच सालों में 32 फीसद से अधिक की बढ़ोत्तरी हुई है। इसके साथ ही देश में एशियाई शेरों की संख्या बढ़कर 891 हो गई है। इस पांच सालों में शेरों की आबादी में 217 और शेर जुड़े है।
इससे पहले वर्ष 2020 में हुई गणना में कुल 674 शेर पाए गए थे। खासबात यह है कि इस दौरान शेरों की आबादी गिर राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य से अधिक उसके बाहरी सीमा में मिली है।
शेर अपनी बढ़ रही आबादी के हिसाब से अपने रहवास को विस्तार दे रहे
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की देखरेख में हुई इस गणना की बुधवार को सामने आयी रिपोर्ट में जहां गिर राष्ट्रीय उद्यान व वन्यजीव अभयारण्य में 384 शेर पाए गए, वही 507 शेर इसकी सीमा के बाहर पाए गए। इससे साफ है कि शेर अपनी बढ़ रही आबादी के हिसाब से अपने रहवास को विस्तार दे रहे है। गणना रिपोर्ट के मुताबिक शेरों की आबादी में 196 नर, 330 मादा, 140 उप-वयस्क व 225 शावक हैं।
शेरों की आबादी बढ़ने के साथ ही सौराष्ट्र क्षेत्र में भी उनका विस्तार हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक ये पहले जहां जूनागढ़ व अमरेली जिलों के गिर राष्ट्रीय उद्यान तक ही सीमित थे, लेकिन इनकी मौजूदगी अब सौराष्ट्र के 11 जिलों में फैल गई है। 16 वीं एशियाई शेरों की यह गणना 10 से 13 मई तक दो चरणों में आयोजित की गई थी, जिसमें 11 जिलों के 58 तालुकाओं में 35,000 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र शामिल था। इनकी गणना में दुनिया में मौजूद सभी तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।
(फोटो सोर्स: भाजपा)
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन मार्च को गुजरात के गिर अभयारण्य में हुई राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक में ही एशियाई शेरों की गणना को मंजूरी दी थी। साथ ही इसे मई में पूरी करने की समय सीमा भी निर्धारित की गई थी। इस बैठक में पीएम मोदी के अतिरिक्त केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव व मंत्रालय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
पिछले दस सालों में शेरों की आबादी में 70 फीसद की हुई बढ़ोत्तरी
देश में शेरों की आबादी में पिछले दस सालों में करीब 70 फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है, जो वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में हुई शेरों की गणना में जहां कुल 523 शेर पाए गए थे, वहीं 2025 में हुई गणना में शेरों की संख्या 891 हो गई है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक शेरों की संख्या में यह वृद्धि इसके संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास और वन क्षेत्रों के संरक्षण से संभव हो पाया है।
चार दिन में गणना और सात दिन में रिपोर्ट
शेरों की गणना में तकनीक की खूब इस्तेमाल किया गया। यही वजह है कि शेरों की पूरी गणना का काम जहां चार दिनों में ( 10 से 13 मई तक) किया गया। वहीं अगले सात दिनों में फील्ड की सारी रिपोर्ट और फोटोग्राफ को तकनीक की मदद से जांच कर उन्हें अंतिम रूप दे दिया गया है। गणना करने वाली गुजरात वन विभाग की टीम के मुताबिक शेरों की गणना रिपोर्ट शत-प्रतिशत त्रुटिरहित है।
आबादी के साथ बढ़ रहा है इसका क्षेत्र भी
वर्ष | आबादी | क्षेत्रफल (वर्ग किमी.) |
1990 | 284 | 6600 |
1995 | 304 | 10,000 |
2001 | 327 | 12000 |
2005 | 359 | 13000 |
2010 | 411 | 20,000 |
2015 | 523 | 22,000 |
2020 | 674 | 30,000 |
2025 | 891 | 35,000 |
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।