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'मोदी सरकार की कश्मीर नीति सही साबित हुई, अलगाववादियों ने भी किया भारी मतदान'; विधानसभा चुनाव कब होंगे? शाह ने बताई तारीख

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में सफल मतदान से मोदी सरकार की कश्मीर नीति एकदम सही साबित हुई है वहां अलगाववादियों ने भी भारी मतदान किया है। इसके साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि वहां 30 सितंबर से पहले विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। साथ ही दावा किया कि भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी धर्म-आधारित अभियान का सहारा नहीं लिया है।

By Agency Edited By: Abhinav Atrey Sun, 26 May 2024 11:45 PM (IST)
'मोदी सरकार की कश्मीर नीति सही साबित हुई, अलगाववादियों ने भी किया भारी मतदान'; विधानसभा चुनाव कब होंगे? शाह ने बताई तारीख
जम्मू-कश्मीर राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया शुरू होगी- अमित शाह (फाइल फोटो)

पीटीआई, नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में सफल मतदान से मोदी सरकार की कश्मीर नीति एकदम सही साबित हुई है, वहां अलगाववादियों ने भी भारी मतदान किया है। इसके साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि वहां 30 सितंबर से पहले विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे।

साथ ही दावा किया कि भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी धर्म-आधारित अभियान का सहारा नहीं लिया है लेकिन यदि मुसलमानों के लिए आरक्षण के खिलाफ प्रचार करना, कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की बात मतदाताओं तक पहुंचाना धर्म आधारित अभियान है तो फिर उनकी पार्टी ने ऐसा किया है और आगे भी करती रहेगी।

जम्मू-कश्मीर राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया शुरू होगी

समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव समाप्त होने के बाद सरकार केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। लोकसभा चुनावों के दौरान कश्मीर घाटी में अपेक्षाकृत अधिक मतदान प्रतिशत पर शाह ने कहा कि उनका मानना है कि घाटी में बड़ा बदलाव आया है। वहां मतदान प्रतिशत बढ़ा है। कुछ लोग कहते थे कि घाटी के लोग भारतीय संविधान को नहीं मानते लेकिन ये चुनाव भारतीय संविधान के तहत ही हुआ। जो अलग देश की मांग करते थे और जो पाकिस्तान के साथ जाना चाहते हैं, उन्होंने भी बढ़-चढ़कर मतदान किया है।

मोदी सरकार की कश्मीर नीति की बड़ी कामयाबी

शाह ने कहा कि मैं मानता हूं कि यह लोकतंत्र की बहुत बड़ी जीत है और मोदी सरकार की कश्मीर नीति की बड़ी कामयाबी है। गुलाम कश्मीर के जम्मू-कश्मीर में विलय की संभावना के बारे में पूछे जाने पर शाह ने कहा कि उनका निजी तौर पर मानना है कि यह 1947-48 से भारत का हिस्सा होना चाहिए था लेकिन यह पाकिस्तान के साथ पहले युद्ध में तत्कालीन जवाहरलाल नेहरू सरकार द्वारा समय से पहले किए गए संघर्ष विराम के कारण हमसे दूर हो गया। अगर चार दिन बाद संघर्ष विराम की घोषणा की गई होती तो गुलाम कश्मीर हमारा होता।

युवाओं के लिए 'अग्निपथ' से बेहतर आकर्षक योजना नहीं

शाह ने यह भी कहा, "अगर भाजपा सत्ता में लौटती है तो सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद अगले पांच साल के भीतर पूरे देश के लिए समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। यूसीसी एक बहुत बड़ा सामाजिक, कानूनी और धार्मिक सुधार है। युवाओं के लिए 'अग्निपथ' से बेहतर आकर्षक योजना नहीं हो सकती क्योंकि यह चार साल के बाद सेना से सेवानिवृत्त होने वाले 'अग्निवीरों' के लिए पूर्णकालिक सरकारी नौकरी की गारंटी प्रदान करती है। दया आती है राहुल गांधी पर, जिन्होंने आईएनडीआईए के सत्ता में आने पर इस योजना को खत्म करने का वादा किया है।"

दो-तीन साल में देश नक्सल समस्या से मुक्त हो जाएगा

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अपने अगले कार्यकाल में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' भी लागू करेगी क्योंकि देश में एक साथ चुनाव कराने का समय आ गया है। इससे खर्च में भी कमी आएगी। अगले दो-तीन साल में देश नक्सल समस्या से मुक्त हो जाएगा। छत्तीसगढ़ के एक छोटे से क्षेत्र को छोड़कर पूरा देश नक्सल मुक्त हो चुका। पशुपतिनाथ से तिरुपति तक तथाकथित नक्सल गलियारे में माओवादियों की कोई मौजूदगी नहीं है।

राहुल छुट्टी पर विदेश जाने का बहाना ढूंढ रहे

शाह ने कहा कि मणिपुर में मैतेयी और कुकी समुदायों के बीच विश्वास की कमी को पाटने का काम सरकार कर रही है। लोकसभा चुनाव समाप्त होने के बाद इस प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ तेज किया जाएगा। लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मिले सकारात्मक जनादेश के कारण विपक्ष शासित राज्यों में भी भाजपा को बड़ी जीत मिलेगी। विपक्ष अपनी हार निश्चित देखकर चुनाव आयोग की आलोचना कर रहा है। यही ईवीएम तो तेलंगाना, बंगाल और हिमाचल प्रदेश में थी, फिर वहां भाजपा कैसे हार गई? असल में जब आप हार देखते हैं तो आप पहले से ही रोना शुरू कर देते हैं। कांग्रेस के सवालों का मकसद राहुल गांधी की विफलता को छुपाना है। वे छह जून से छुट्टी पर विदेश जाने का बहाना ढूंढ रहे हैं।

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