अखिलेश यादव का खनन घोटाला कनेक्शन... बिना ई-टेंडर के पट्टे, एक दिन में 13 परियोजनाओं को मिली थी मंजूरी; INSIDE STORY
एफआईआर के अनुसार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हमीरपुर समेत कई स्थानों पर धड़ल्ले से चल रहे खनन पर प्रथबंध लगा दिया था। लेकिन खनन अवैध तरीके से जारी था। हमीरपुर की तत्कालीन डीएम ने 13 अप्रैल 2012 से छह जून 2014 के बीच 50 से अधिक खनन पट्टे जारी करने के नियमों की अनदेखी की। बिना ई-टेंडर के पट्टे दिए गए और पुराने पट्टों की मियाद भी बढ़ाई गई।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित खनन घोटाले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीबीआई ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अखिलेश यादव को 29 फरवरी (बुधवार) को पूछताछ के लिए बुलाया था, हालांकि सपा अध्यक्ष सीबीआई के समक्ष पेश नहीं हुए।
लोकसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में यह बहुत घटनाक्रम बहुत महत्वपूर्ण है। हालांकि अवैध खनन केस में अखिलेश यादव नामजद आरोपित नहीं हैं। लेकिन सीआरपीसी की धारा-160 के तहत बतौर गवाह के तौर पर उन्हें समन जारी किया गया है। आइए जानते हैं आखिर यह पूरा मामला क्या है? अखिलेश यादव का नाम इसमें क्यों और कैसे जुड़ा।
अखिलेश यादव खनन मामला क्या है?
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले खनन घोटाले में सीबीआई ने 2 जनवरी 2019 को एक एफआईआर दर्ज की थी। सीबीआई की एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय भी इस मामले में कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है। यह अवैध खनन हमीरपुर में हुआ। इस मामले में 2008 बैच की आईएएस अधिकारी बी.चंद्रकला (तत्कालीन डीएम हमीरपुर) और एमएलसी रमेश मिश्रा समेत 11 नामजद आरोपितों के खिलाफ दर्ज कर जांच शुरू की थी।
सीबीआई की 14 जगहों पर छापेमारी
सीबीआई ने पांच जनवरी 2019 को बी. चंद्रकला के लखनऊ के फ्लैट समेत अन्य जिलों में खनन विभाग के कर्मचारियों व ठेकेदारों के 14 ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने हमीरपुर, शामली, फतेहपुर, देवरिया और सिद्धार्थनगर समेत अन्य जिलों में वर्ष 2012 से 2016 के बीच हुए खनन में धांधली की शिकायतों पर मार्च 2017 में सात प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज की थीं।
खनन अवैध तरीके से जारी था
एफआईआर के अनुसार, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हमीरपुर समेत कई स्थानों पर धड़ल्ले से चल रहे खनन पर प्रथबंध लगा दिया था। लेकिन खनन अवैध तरीके से जारी था। हमीरपुर की तत्कालीन डीएम बी.चंद्रकला ने 13 अप्रैल 2012 से छह जून 2014 के बीच 50 से अधिक खनन पट्टे जारी करने के नियमों की अनदेखी की। बिना ई-टेंडर के पट्टे दिए गए और पुराने पट्टों की मियाद भी बढ़ाई गई। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि 17 फरवरी 2013 को ई-निविदा नीति का उल्लंघन करके एक ही दिन में 13 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।
ई-टेंडरिंग प्रक्रिया का कथित उल्लंघन
तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश और तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति दोनों के पास 2012 और 2016 के बीच खनन मंत्रालय का प्रभार था। इस दौरान लघु खनिजों के खनन में कथित अनियमितताएं हुईं। सीबीआई को ई-टेंडरिंग प्रक्रिया का कथित उल्लंघन कर खनन पट्टे जारी करने के मामले में अखिलेश और उनके कैबिनेट के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की भूमिका संदिग्ध लगी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर 2 जनवरी 2019 को सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर कोर्ट से कहा कि इस मामले में तत्कालीन खनन मंत्री की भूमिका पर गौर किया जा सकता है।
सपा-बसपा गठबंधन की घोषणा के दौरान हुई गड़बड़ी
सीबीआई ने 5 जनवरी 2019 को 2012 और 2016 के बीच हमीरपुर में अवैध खनन से जुड़े मामले के सिलसिले में दिल्ली और यूपी में 14 स्थानों की तलाशी ली थी। जिन स्थानों की तलाशी ली गई उनमें तत्कालीन एसपी एमएलसी रमेश कुमार मिश्रा और बीएसपी नेता संजय दीक्षित के आवास भी शामिल थे। छापेमारी उस दिन की गई जब एसपी और बीएसपी ने 2019 चुनावों के लिए सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया और औपचारिक रूप से आरएलडी के साथ अपने गठबंधन की घोषणा की।
अखिलेश और प्रजापति की भूमिका संदिग्ध
सीबीआई अधिकारी ने कहा कि अखिलेश यादव 2012 से जून 2013 तक खनन मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे थे। उसके बाद यह मंत्रालय तत्कालीन अमेठी विधायक प्रजापति के अधीन आ गया। चूंकि सभी अनियमितताएं 2012 और 2016 के बीच हुई हैं, इसलिए अखिलेश और प्रजापति दोनों की भूमिका की जांच की जानी है।
समन पर अखिलेश ने कहा- 'आप क्यों घबराए हुए हैं'
अखिलेश यादव का कहना है कि सपा सबसे ज्यादा निशाने पर है। 2019 में भी मुझे किसी मामले में नोटिस मिला था, क्योंकि तब भी लोकसभा चुनाव था। अब जब चुनाव आ रहा है तो मुझे फिर से नोटिस मिल रहा है। मैं समझता हूं कि जब चुनाव आएगा तो नोटिस भी आएगा। यह घबराहट क्यों है। अगर पिछले दस वर्षों में आपने (भाजपा) बहुत काम किया है तो फिर आप क्यों घबराए हुए हैं?
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