Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    अब बीएड कॉलेज नहीं रहेंगे एकल, बनेंगे बहुविषयक संस्थान; NCTE ने शुरू की तैयारी

    राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने देश के 12 हजार से अधिक एकल बीएड कॉलेजों को बहुविषयक संस्थानों में बदलने की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें अब बीएड के साथ बीए बीएससी और बीकॉम जैसे कोर्स भी चलाए जाएंगे। यह निर्णय नई शिक्षा नीति (NEP) की सिफारिशों के तहत लिया गया है जिससे उच्च शिक्षा में नामांकन दर (GER) बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    By Jagran News Edited By: Chandan Kumar Updated: Tue, 08 Apr 2025 05:58 AM (IST)
    Hero Image
    देश के 12,000 एकल बीएड कॉलेजों में शुरू होंगे अन्य स्नातक कोर्स।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उच्च शिक्षा को विस्तार देने की मुहिम में देश भर के एकल बीएड कॉलेजों को जल्द ही बहुविषयक संस्थानों में तब्दील करने का फैसला लिया गया है। इसके तहत इन संस्थानों में अब बीएड के साथ ही बीए, बीएससी और बीकॉम जैसे कोर्स भी अब संचालित होंगे। इन एकल बीएड कॉलेजों को संचालित करने वाली संस्था राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ( एनसीटीई) ने इसे लेकर एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है, जो इन सभी संस्थानों के बहुविषयक संस्थानों के रूप में उन्नयन के लिए समय-सीमा भी तैयार करेगी।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    एनसीटीई ने यह फैसला हाल ही में एनईपी की सिफारिशों पर अमल को लेकर बुलाई गई बोर्ड की बैठक में लिया है। माना जा रहा है कि जल्द ही इन सभी संस्थानों के संसाधनों व क्षमता आदि का अध्ययन कराके इन्हें उस दिशा में आगे बढ़ने में मदद दी जाएगी। मौजूदा समय में देश भर में 37 हजार से अधिक बीएड कॉलेज है, इनमें करीब 12 हजार एकल बीएड कॉलेज भी शामिल है।

    एनसीटीई ने क्यों की ये पहल?

    एनसीटीई ने यह पहल इसलिए की है क्योंकि नए इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स के तहत संस्थानों को बीए, बीएससी व बीकाम जैसे कोर्स चलाना अनिवार्य है। पांच साल के इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स में अब बीए-बीएड, बीएससी-बीएड व बीकाम-बीएड जैसे कोर्स संचालित किए जा रहे है। हालांकि अभी इस इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स को चलाने की अनुमति कुछ चुनिंदा उच्च शिक्षण संस्थानों को ही दी गई है। इनमें कई आइआइटी और एनआईटी भी शामिल है।

    जीईआर का इतना रखा गया लक्ष्य

    गौरतलब है कि एनईपी के तहत देश के उच्च शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात(जीईआर) को वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके जरिए जरूरी है कि देश में उच्च शिक्षण संस्थानों के दायरे को विस्तार दिया जाए। मौजूदा समय में देश में उच्च शिक्षा का जीईआर करीब 29 प्रतिशत है।

    यह भी पढ़ें: 'वक्फ कानून के खिलाफ याचिकाएं वोट बैंक के लिए', भाजपा ने विरोध करने वालों को बताया संविधान विरोधी