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    'वक्फ कानून के खिलाफ याचिकाएं वोट बैंक के लिए', भाजपा ने विरोध करने वालों को बताया संविधान विरोधी

    भाजपा ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं की कड़ी आलोचना की है। प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे वोट बैंक की राजनीति और देश को अस्थिर करने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून भू-माफियाओं पर प्रहार करेगा। सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इसे संवैधानिक प्रक्रिया के तहत पारित बताते हुए राज्यों द्वारा विरोध को संविधान की अवमानना करार दिया।

    By Jagran News Edited By: Chandan Kumar Updated: Tue, 08 Apr 2025 02:00 AM (IST)
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    भाजपा नेताओं ने वक्फ कानून का विरोध करने वालों को संविधान विरोधी बताया। (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भाजपा ने सोमवार को नए वक्फ कानून को चुनौती देने वाली कई जनहित याचिकाओं की आलोचना करते हुए उन्हें वोट बैंक हित याचिकाएं करार दिया। भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने दावा किया कि कई संगठनों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाएं केवल अपने वोट बैंक को भड़काने और देश में दंगे जैसी स्थिति पैदा करने का बहाना मात्र हैं।

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    उन्होंने कहा कि नए कानून से केवल भू-माफिया को ही नुकसान पहुंचेगा, जिसने वक्फ संपत्तियों पर कब्जा कर रखा है। पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस, एआइएमआइएम और कुछ मुस्लिम संगठन जो कानून का विरोध कर रहे हैं, उन्होंने यह आरोप भी लगाया है कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम मुसलमानों की नागरिकता छीन लेगा।

    भाजपा नेता ने दावा किया कि नया कानून सामाजिक न्याय सुनिश्चित करेगा और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में संविधान का अनुप्रयोग सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि कई मुस्लिम संस्थाओं और यहां तक कि ईसाई संगठनों ने भी वक्फ अधिनियम में संशोधन का स्वागत किया है और कहा कि यह ¨हदू-मुस्लिम मुद्दा नहीं है।

    'वक्फ अधिनियम का विरोध संविधान की घोर अवमानना'

    भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में वक्फ बिल अधिनियम का विरोध किए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर जैसी राज्य सरकारों पर आरोप लगाया कि वे संसद द्वारा पारित कानून को चुनौती देकर संविधान के प्रति 'घोर अवमानना' दिखा रही हैं।

    त्रिवेदी ने कहा कि वक्फ बिल को उचित प्रक्रिया के बाद पारित किया गया है, जो संवैधानिक रूप से स्थापित है। लेकिन कुछ राज्य सरकारें हैं जो इसका विरोध कर रही हैं, चाहे वह तमिलनाडु सरकार हो या जम्मू-कश्मीर। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वे संविधान के प्रति घोर अवमानना दिखा रहे हैं।

    उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के संविधान के तहत राज्य सरकारों को संसद द्वारा पारित कानून का विरोध करने का अधिकार नहीं है।उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जिस तरह के ²श्य देखने को मिले हैं, अगर वे इसे तार-तार कर रहे हैं, तो इसका मतलब है कि ये वे लोग हैं जिनके हाथों संविधान खतरे में है।''

    गौरतलब है कि पांच अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसे संसद ने बजट सत्र के दौरान पारित किया था।

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