नई दिल्ली, जेएनएन। मीडिया के विस्तार के साथ ही विदेशी भाषाओं के जानकारों की मांग भी तेजी से बढ़ी है। वैश्वीकरण के दौर में अनुवाद और पत्र-पत्रिकाओं का संपादन कार्य लोगों को निजी व्यवसाय के रूप में काम का अच्छा मौका दे रहा है। विदेशी भाषा के जानकार विदेशी मीडिया के लिए भारत से ही रिपोर्टिंग का काम संभाल रहे हैं। कॉल सेंटर हों या विदेशी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, विदेशी भाषा के जानकार देश से ही अपना काम कर रहे हैं। भारत में विदेशी भाषाएं जानने वालों की जितनी मांग है, अभी उतने लोग उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है...

अंतरा ने 10वीं में ही तय कर लिया था कि वह फ्रेंच एंटरप्रेटर के रूप में अपना करियर बनाएंगी। इसलिए 12वीं में एक विषय फ्रेंच रखने के बाद उन्होंने इसे आगे भी जारी रखने का फैसला लिया। फ्रेंच हो या जर्मनी, स्पैनिश या चाइनीज, इन सभी विदेशी लैंग्वेंजेज में करियर के ढेरों अवसर हैं। लेकिन वर्तमान में युवाओं में फ्रेंच भाषा के प्रति ज्यादा लगाव देखा जा रहा है। क्योंकि दुनिया में अंग्रेजी के बाद जिस यूरोपियन भाषा का सबसे ज्यादा महत्व है, वह फ्रेंच ही है। फ्रेंच भाषा में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, डिग्री के बाद करियर की असीम संभावनाएं हैं। जानकारों की मानें, तो वैश्वीकरण के कारण फ्रेंच भाषा के पाठ्यक्रमों का महत्व तेजी से बढ़ा है।

विदेशी दूतावास, कॉरपोरेट सेक्टर, फ्रांस की कंपनियों में अनुवादक, सरकारी विभागों में फ्रेंच भाषा के जानकार, मीडिया क्षेत्र में फ्रेंच भाषा में बेहतर करियर के अवसर हैं। युवा प्रामाणिक तौर पर भाषा की जानकारी से मल्टीनेशनल कंपनियों में अच्छे पदों पर काम कर सकते हैं। वे खुद की कोचिंग खोल सकते हैं, हॉस्पिटैलिटी में जॉब कर सकते हैं। इससे एयर होस्टेस, टूरिज्म में गाइड या एस्कॉटिंग, स्कूल में टीचर, कॉलेज में प्रोफेसर, मल्टीनेशनल कंपनी में अनुवादक बन सकते हैं।

शैक्षणिक योग्यता

किसी भी फॉरेन लैंग्वेज कोर्स को करने के लिए 12वीं उत्तीर्ण करना होता है। इसके बाद युवा सर्टिफिकेट से लेकर डिप्लोमा कोर्सेज से विदेशी भाषाएं सीख सकते हैं। जैसे, फ्रेंच भाषा के तीन महीने के सर्टिफिकेट कोर्स के बाद डिप्लोमा और डिग्री कोर्सेज भी किए जा सकते हैं।

बेसिक स्किल

किसी भी भाषा का पुख्ता ज्ञान आपकी सफलता में सहायक होता है। विदेशी भाषा में करियर बनाने के लिए वे लोग ही आगे आते हैं, जो भाषा पर अच्छी पकड़ रखते हैं और उससे उनका भावनात्मक लगाव भी होता है। वैसे, इसके लिए कैंडिडेट में बेहतर संवाद क्षमता होना जरूरी है। अगर आप अनुवादक बनना चाहते हैं तो विदेशी भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी या हिंदी पर भी पकड़ होनी चाहिए। जिस विदेशी भाषा को सीख रहे हैं, उसका व्याकरण, वाक्य संरचना और उससे जुड़ी संस्कृति की जानकारी होने पर आपको ही फायदा होगा।

संभावनाएं

विदेशी भाषा के जानकार की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। सूचना तकनीक के केंद्र बेंगलुरु, हैदराबाद और गुरुग्राम जैसे शहरों में विदेशी भाषा के जानकार युवाओं की काफी मांग है। उन्हें अनुवादक या दुभाषिये के रूप में काम मिल रहा है। आप विदेशी सैलानियों के गाइड भी बन सकते हैं या दूतावासों में विदेशी भाषा के विशेषज्ञों के तौर पर जुड़ सकते हैं। देश में पर्यटन उद्योग के तेजी से विस्तार होने और हर साल लाखों की संख्या में आने वाले विदेशी सैलानियों के लिए टूरिस्ट गाइड या टूर ऑपरेटरों की जरूरत पड़ती है। 

मैंडरिन की बढ़ती लोकप्रियता

पूरब के अलावा पश्चिम में भी युवाओं के बीच मैंडरिन (चाइनीज) तेजी से लोकप्रिय हो रही है। चीनी भाषा सीखने की एक बड़ी वजह इसकी जनसंख्या भी है। जहां महज 40 करोड़ लोग स्पैनिश लोग बोलते हैं, वहीं 100 करोड़ से ज्यादा लोगों की भाषा चीनी है। खुद चीन में 70 प्रतिशत लोग मैंडरिन में बात करते हैं।

राजधानी दिल्ली स्थित चीनी दूतावास में मैंडरिन सिखाई जाती है। दूतावास की वेबसाइट से विशेष जानकारी हासिल की जा सकती है। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी मैंडरिन का कोर्स उपलब्ध है। आप चाहें तो सेंटर फॉर चाइनीज एंड साउथ ईस्ट एशियन स्टडीज के तहत मैंडरिन सीख सकते हैं। इसके अलावा, इंडिया-चाइना चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री, मुंबई में भी मैंडरिन सीखी जा सकती है। यही नहीं, कोलकाता का द स्कूल ऑफ चाइनीज़ लैंग्वेज भी इस भाषा को सिखाने का काम करता है।

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Posted By: Neel Rajput

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