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    महाराष्ट्र नगरपालिका चुनाव: महायुति के 68 पार्षद निर्विरोध, HC पहुंचा मामला

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 09:44 PM (IST)

    महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में महायुति के 68 पार्षदों के निर्विरोध चुने जाने का मामला अब मुंबई उच्च न्यायालय पहुंच गया है। राज ठाकरे की मनसे ने या ...और पढ़ें

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    नामांकन वापसी विवाद पहुंचा हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

    राज्य ब्यूरो, मुंबई : महाराष्ट्र में चल रहे नगर निगम चुनावों में बड़े पैमाने पर नामांकन वापस लेने का मुद्दा अब मुंबई उच्च न्यायालय पहुंच गया है। इसके खिलाफ राज ठाकरे के नेतृत्ववाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) लंबी कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रही है।

    महराष्ट्र में हो रहे 29 महानगरपालिकाओं के चुनावों के लिए हुए नामांकन के बाद बड़े पैमाने पर नामवापसी के परिणामस्वरूप भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति के 68 पार्षद निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं।

    इन चुनावों में बहुकोणीय मुकाबलों में कुल 2,869 सीटों पर पार्षदों के चुनाव होने हैं, जिनमें देश की वित्तीय राजधानी मुंबई भी शामिल है। इन चुनावों में बड़े पैमाने पर नामवापसी के कारण सत्तारूढ़ गठबंधन के 68 से अधिक उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। जिनमें भाजपा के 44, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 22 और अजीत पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के दो उम्मीदवार शामिल हैं।

    मनसे में ठाणे एवं पालघर जिला इकाइयों के प्रमुख अविनाश जाधव एवं कांग्रेस कार्यकर्ता समीर गांधी ने अधिवक्ता असीम सरोदे और श्रिया अवले के माध्यम से मुंबई उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की है। याचिका में अविनाश जाधव ने तर्क दिया है कि नाम वापसी स्वैच्छिक नहीं थी, बल्कि ‘व्यवस्थित दबाव, धमकियों और अवैध प्रलोभनों’ का परिणाम थी, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 जेडए के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी जनादेश का उल्लंघन है।

    बता दें कि इस मामले में विरोधी दलों की शिकायत पर राज्य चुनाव आयोग ने भी जांच की घोषणा कर दी है। वहीं याचिकाकर्ता ने मांग की है कि जांच उच्च न्यायालय की देखरेख में समयबद्ध तरीके से कराई जाए।

    जाधव ने महाराष्ट्र सरकार को महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम, 1949 में संशोधन करने के लिए कानून बनाने का निर्देश देने की भी मांग की है, ताकि निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम वोट शेयर अनिवार्य करने का प्रावधान शामिल किया जा सके। उन्होंने अदालत से आगे आग्रह किया है कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं, वहां परिणामों की आधिकारिक अधिसूचना जांच पूरी होने के बाद ही जारी की जानी चाहिए।

    जाधव ने आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन का इस्तेमाल सत्ताधारी गठबंधन के उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत को सुविधाजनक बनाने के लिए किया गया था। इसके लिए उन्होंने मुंबई और ठाणे के कुछ उदाहरण भी प्रस्तुत किए हैं। याचिका में अधिवक्ता सरोदे ने कोर्ट को बताया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम मतदान की आवश्यकता का सुझाव दिया है।

    सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम मतदान हिस्सेदारी अनिवार्य करने वाले नियम बनाने का निर्देश भी दिया है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय महाराष्ट्र सरकार को उचित कानून बनाने और महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम में ऐसा प्रावधान शामिल करने हेतु संशोधन करने का निर्देश देने के लिए सशक्त है। याचिका में महाराष्ट्र की जनता के बीच बढ़ती अशांति और असंतोष की ओर भी इशारा किया गया है, जिसमें कहा गया है कि कई सामाजिक रूप से जागरूक मतदाता इसी मुद्दे पर उच्च न्यायालय का रुख करने के इच्छुक हैं।