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    Malegaon Blast: 'मालेगांव विस्फोट का मकसद महाराष्ट्र में सांप्रदायिक दरार पैदा करना था,' एंटी टेरर एजेंसी ने कोर्ट को बताया

    By Agency Edited By: Abhinav Atrey
    Updated: Fri, 26 Jul 2024 09:12 AM (IST)

    आतंकवाद निरोधक एजेंसी ने मालेगांव विस्फोट को लेकर गुरुवार को कोर्ट में अपनी अंतिम दलीलें पेश कीं। एजेंसी ने इस दौरान कोर्ट में कहा है कि मालेगांव विस्फोट सांप्रदायिक दरार पैदा करने और महाराष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालने के इरादे से किया गया था। इस विस्फोट में छह लोग मारे गए थे और 101 लोग घायल हो गए थे।

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    राज्य की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालने का था इरादा- एजेंसी (फाइल फोटो)

    पीटीआई, मुंबई। मालेगांव विस्फोट सांप्रदायिक दरार पैदा करने और महाराष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालने के इरादे से किया गया था। इस विस्फोट में छह लोग मारे गए थे और 100 से अधिक घायल हुए थे। यह बात आतंकवाद निरोधक एजेंसी ने कोर्ट में अपनी अंतिम दलीलें पेश करते हुए कही हैं।

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    मालेगांव विस्फोट मामले में अंतिम बहस लगभग 16 साल बाद गुरुवार को शुरू हुई। इसमें पूर्व बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सात आरोपी मुकदमे का सामना कर रहे हैं।

    नासिक के मालेगांव में अंजुमन चौक पर हुआ था विस्फोट

    बता दें कि 29 सितम्बर 2008 को नासिक के मालेगांव में अंजुमन चौक और भीकू चौक के बीच स्थित शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट कंपनी के सामने रात 9:35 बजे बम विस्फोट हुआ था। इस हमले में छह लोगों की मौत हो गई और 101 लोग घायल हो गए थे।

    मोटरसाइकिल में लगे बम से किया गया था हमला

    आतंकवाद निरोधक एजेंसी के मुताबिक, मालेगांव विस्फोट एक मोटरसाइकिल में लगे बम से किया गया था। यह मोटरसाइकिल कथित तौर पर भोपाल की पूर्व बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर की थी।

    प्रज्ञा ठाकुर के अलावा ये आरोपी हैं

    प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित के अलावा मामले में अन्य आरोपी मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी और सुधाकर चतुर्वेदी हैं। सभी पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत केस चल रहा है। वहीं, एक आरोपी समीर कुलकर्णी के खिलाफ मुकदमा सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया है।

    राज्य की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालने का था इरादा

    वहीं, एनआईए ने विशेष सरकारी वकील अविनाश रसाल और अनुश्री रसाल की ओर से पेश होते हुए कहा, "यह रमजान का पवित्र महीना था और नवरात्रि उत्सव शुरू होने वाला था। लोगों को आतंकित करने और जान-माल की हानि करने के इरादे से साजिशकर्ताओं ने विस्फोट किए। यह विस्फोट समुदाय के लिए जरूरी आपूर्ति और सेवाओं को बाधित करने, सांप्रदायिक दरार पैदा करने और राज्य की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डालने के इरादे से किया गया था।"

    मामले की जांच शुरूआत में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने की थी, जिसे बाद में केंद्रीय एजेंसी एनआईए को सौंप दिया गया था।

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