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    बिगड़े बोल से एक बार फिर उलझे कैलाश विजयवर्गीय, पहले भी बयानों को लेकर रहे विवादों में

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 07:33 PM (IST)

    कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया के कारण फिर विवादों में हैं। यह पहली बार नहीं है; उनके बयान ...और पढ़ें

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    कैलाश विजयवर्गीय (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, इंदौर। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक बार फिर अपने विवादित बोल को लेकर सुर्खियों में हैं। यह पहला मौका नहीं है जब उनकी कोई बात या बयान सार्वजनिक बहस का विषय बनी हो। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हो रही मौतों को लेकर मीडिया के सवाल पर बुधवार रात उनकी तीखी और अमर्यादित प्रतिक्रिया ने नया विवाद खड़ा कर दिया।

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    दरअसल, विजयवर्गीय और विवादों का रिश्ता पुराना रहा है। महिलाओं, संस्कृति, युवाओं और सामाजिक आचरण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दिए गए उनके कई बयान पहले भी आलोचना का कारण बन चुके हैं। समर्थकों के बीच प्रभावशाली माने जाने वाले इस नेता की बयानबाजी अक्सर पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा करती रही है।

    पांच दशक से राजनीति में

    कैलाश विजयवर्गीय करीब पांच दशक से सक्रिय राजनीति में हैं। उन्होंने वर्ष 1975 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। 1983 में पहली बार पार्षद चुने जाने के बाद उनका कद लगातार बढ़ता गया और वे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तक पहुंचे। हरियाणा, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के संगठनात्मक प्रभारी भी रहे, लेकिन व्यापक अनुभव और सक्रियता के बावजूद वह स्थायी शीर्ष राजनीतिक मुकाम हासिल नहीं कर सके।

    अनुशासन बनाम बयानबाजी

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसकी एक प्रमुख वजह उनकी बार-बार की गई विवादित टिप्पणियां हैं। भाजपा संगठन में अनुशासन और सार्वजनिक मर्यादा को अहम माना जाता है, लेकिन विजयवर्गीय इस कसौटी पर कई बार खरे नहीं उतर पाए। उनकी यही “सेल्फ गोल” करने की आदत उन्हें बार-बार विवादों के घेरे में ला खड़ा करती है।

    यह भी पढ़ें- इंदौर दूषित पानी कांड: मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मीडिया पर भड़के, वीडियो वायरल होने के बाद मांगी माफी

    ये हैं कुछ प्रमुख विवादित बयान

    विदेशी संस्कारों पर टिप्पणी (सितंबर 2025): शाजापुर में उन्होंने कहा, "ये विदेश के संस्कार हैं। हम पुरानी संस्कृति के लोग हैं, पुराने जमाने में लोग अपनी बहनों के गांव का पानी तक नहीं पीते थे, लेकिन आज के हमारे प्रतिपक्ष के नेता अपनी बहन का चौराहे पर चुंबन कर लेते हैं।"

    महिलाओं के पहनावे पर राय (जून 2025): इंदौर में उन्होंने कहा, "मुझे कम कपड़े पहनने वाली लड़कियां पसंद नहीं। कई लड़कियां सेल्फी खिंचवाने आती हैं तो मैं कहता हूं बेटा पहले अच्छे कपड़े पहन के आना फिर खिंचाना।"

    शूर्पणखा से तुलना (अप्रैल 2023): हनुमान जयंती पर उन्होंने कहा, "लड़कियां भी इतने गंदे कपड़े पहन के निकलती हैं कि उनमें देवी का स्वरूप नहीं दिखता, शूर्पणखा लगती हैं।"

    मर्यादा और सीता हरण (जनवरी 2013): दुष्कर्म की घटनाओं पर उन्होंने कहा था, "मर्यादा का उल्लंघन होता है, तो सीता हरण हो जाता है। लक्ष्मण रेखा को कोई भी पार करेगा, तो रावण सामने बैठा है।"

    महिला क्रिकेटरों को सलाह (अक्टूबर 2025): इंदौर में उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट खिलाड़ियों को बाहर निकलते समय स्थानीय अधिकारियों को सूचित करना चाहिए, यह एक सबक है।

    देश की आजादी पर अजब टिप्पणी (अगस्त 2025): इंदौर के मल्हारगंज में उन्होंने कहा, "15 अगस्त 1947 को हमें कटी-फटी आजादी मिली थी। एक दिन इस्लामाबाद पर तिरंगा फहराया जाएगा और तब अखंड भारत का सपना पूरा होगा।"