कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से छूटा अपनों का साथ तो रोपे 10 हजार से अधिक पौधे, दो युवतियों की अनूठी पहल
मध्य प्रदेश के देवास की रहने वाली दो युवतियां इस समय चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ये दोनों पर्यावरण की प्रहरी के रूप में काम कर रही हैं। इसमें से एक युवती ने कोरोना काल में अपनों को खोया इसके बाद आक्सीजन के महत्व को समझते हुए पौधारोपण करना शुरू किया। वहीं दूसरी युवती ने जनजागरण के लिए ये फैसला किया।

सत्येंद्रसिंह राठौर, देवास। मध्य प्रदेश में दो युवतियां पर्यावरण प्रहरी के रूप में काम रहीं है। एक ने स्वजन को कोरोना काल में खोया तो आक्सीजन का महत्व समझाने के लिए पौधारोपण का अभियान शुरू किया, दूसरी ने इसे जन जागरण का अभियान बनाया।
देवास की दुर्गा ने कोरोना काल में आक्सीजन मिलने में देरी के कारण अपने स्वजन को खोया था। तबसे वे भी पौधरोपण कर रहीं हैं और इसके लिए जनजागरण में भी जुटी हैं। दुर्गा की ही साथी दिव्या परमार भी बालिकाओं को संगठित करने के साथ ही उन्हें पर्यावरण संरक्षण के लिये जागरूक कर रहीं हैं। वे 3 साल में 10 हजार से अधिक पौधे लगा चुकी हैं। वे मंदिरों में पौधे वितरित करती हैं और प्रदेश भर में मंदिरों के आसपास पौधारोपण भी कर रहीं हैं। इनमें से बड़ी संख्या में पौधे अब पेड़ का आकार ले चुके हैं।
कोरोना काल के समय उठाया पौधारोपण करने का बीड़ा
कोरोना काल की विषम परिस्थितियों में जब आक्सीजन सिलेंडर और अस्पताल में बेड मिल पाना मुश्किल थे। उसी दौर में देवास के बाहरी क्षेत्र बिंजाना में रहने वाली दुर्गा कुमावत की दादी ताराबाई कुमावत को कोरोना बीमारी से उबारने के लिए परिवारजनों ने आक्सीजन सिलेंडर के इंतजाम में देवास से लेकर इंदौर तक भागदौड़ की, लेकिन दादी को बचाया नहीं जा सका। इसके बाद दुर्गा ने पर्यावरण संरक्षण, आक्सीजन की उपलब्धता के लिए वृहद पौधारोपण करने का बीड़ा उठाया। इसमें सहयोग किया श्रीजी बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ सेवा समिति ने। पहले एक हजार पौधों का इंतजाम किया गया फिर इसे बढ़ाकर पांच हजार तक किया गया।
करीब दो साल में इन पौधों को मंदिर परिसरों, उद्यानों, गोशालाओं, मुक्तिधाम परिसरों में रोपा गया। इसी बीच दुर्गा का विवाह हो गया। उनकी व्यस्तता अन्य कार्यों में भी बढ़ी। इसके बाद उनकी सहेली दिव्या परमार ने इस काम को आगे बढ़ाया। दिव्या व साथियों द्वारा दो साल में समिति के सहयोग से 10 हजार से अधिक पौधों का रोपण किया जा चुका है। इन पौधों की समय-समय पर देखरेख भी की जाती है। देवास के अलावा श्री अंजनी लाल मंदिर ब्यावरा, प्रस्तावित स्वामीनारायण मंदिर स्थल ओंकारेश्वर, उज्जैन में अंगारेश्वर महादेव मंदिर के समीप और मौना संगम बुरहानपुर में भी समिति द्वारा पौधों का रोपण किया गया है।
छह स्थानों पर तैयार की तुलसी वाटिका, बिल्वपत्र के बगीचे
देवास बायपास स्थित शंकरगढ़ पहाड़ी, शहर के अंदर माता टेकरी, अमोना में नाग मंदिर के समीप और श्री गोविंद गोरक्षा धाम चंदाना रोड में तुलसी वाटिका तैयार की गई, इन सभी जगहों पर अधिकाधिक पौधारोपण किया गया। इसके अलावा ओम साई विहार कालोनी स्थित महादेव मंदिर परिसर व गोविंद गोरक्षा धाम में बिल्व पत्र के बगीचे तैयार किये गए हैं। बिलावली महादेव मंदिर में भी बिल्व पत्र के पौधे रोपे गए।
पौधों की उपलब्धता के लिए खुद की नर्सरी
अधिकांश पौधारोपण वर्षाकाल में किया जाता है क्योंकि उसी समय पौधों के तैयार होने की संभावना अधिक रहती है। सतत पौधारोपण के लिए पौधों की उपलब्धता भी आवश्यक है। शुरुआती दौर में पौधों की कमी से काफी दिक्कतें आई। इसके बाद सचिव मोदी ने करोलीनगर में स्वयं के मकान की छत पर नर्सरी तैयार करने की शुरुआत की। इसमें दुर्गा व दिव्या सहित समिति के अन्य सदस्यों ने भी बढ़ चढ़ कर श्रमदान किया, धीरे-धीरे यहां 20 से अधिक प्रजातियों के पौधे तैयार होने लगे, वर्तमान में लगभग तीन हजार से अधिक पौधे उपलब्ध हैं।
पौधे लगाने से लेकर देखभाल की भी जिम्मेदारी
समिति के सदस्य मिलकर पौधारोपण में आने वाला खर्च उठाते हैं। इसमें पूर्व में दुर्गा ने भी सहयोग किया था और अब दिव्या व अन्य सदस्य समय-समय पर राशि एकत्रित करते हैं। श्रीजी बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ सेवा समिति के सचिव घनश्याम मोदी ने बताया दुर्गा की दादी ताराबाई के तेरहवीं के कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान वे पांच पौधे लेकर गए थे और एक हजार पौधे लगवाने का संकल्प दिलाया गया।
दिव्या बताती हैं कि पौधों को ऐसे स्थानों पर लगाया जाता है जहां वो मवेशियों आदि से सुरक्षित रहते हैं। साथ ही समय-समय पर उनको पानी मिलता रहता है। मंदिरो में पौधारोपण करने के दौरान जो श्रद्धालु आते हैं उनसे पौधों में पानी देने के लिए अनुरोध भी किया जाता है।
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