भोपाल में देसी अंदाज में क्रिकेट का रोमांच... मैदान पर धोती-कुर्ता पहनकर उतरे खिलाड़ी, लगाए चौके-छक्के, संस्कृत में कामेंट्री
भोपाल में 'महर्षि मैत्री क्रिकेट-6 प्रतियोगिता' का अनोखा आयोजन हुआ। इसमें वैदिक ब्राह्मणों ने धोती-कुर्ता पहनकर क्रिकेट खेला और कमेंट्री संस्कृत में क ...और पढ़ें

धोती-कुर्ता में मैदान पर क्रिकेट खेलते खिलाड़ी।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। क्रिकेट के मैदान पर अगर धोती-कुर्ता पहने खिलाड़ी चौके-छक्के लगाएं और कमेंट्री संस्कृत में हो, तो नजारा अपने आप में अनोखा बन जाता है। कुछ ऐसा ही दृश्य भोपाल में देखने को मिला, जहां भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वैदिक ब्राह्मणों ने देसी अंदाज में क्रिकेट खेलकर सबका ध्यान खींचा।
मौका था 'महर्षि मैत्री क्रिकेट-6 प्रतियोगिता' के शुभारंभ का, जहां आधुनिक खेल और प्राचीन भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम हुआ। मैदान पर खिलाड़ी जर्सी के बजाय पारंपरिक धोती-कुर्ता पहनकर उतरे, तो वहीं मैच का आंखों देखा हाल (कमेंट्री) पूरी तरह संस्कृत भाषा में सुनाई दिया।
परंपरा और आधुनिक खेल का संगम
वैदिक ब्राह्मण युवा कल्याण समिति और परशुराम कल्याण बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अपनी जड़ों, संस्कृत भाषा और वैदिक परंपराओं से जोड़ना है। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल के निदेशक प्रो. हंसधर झा और उप-निदेशक प्रो. गोविन्द पांडेय ने इस पहल की सराहना की। कार्यक्रम में प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने शिरकत कर खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाया।

पहले दिन हुए दो मुकाबले
प्रतियोगिता के पहले दिन दो रोमांचक मुकाबले खेले गए। पहला मैच पाणिनि गुरुकुल और मां शशि गुरुकुल के बीच हुआ, जिसमें पाणिनि गुरुकुल ने शानदार जीत दर्ज की। दीपेश को 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया। दूसरा मैच गांधी नगर और हिंगलाज टीम के बीच खेला गया। इसमें गांधी नगर की टीम विजयी रही और मयंक को 'मैन ऑफ द मैच' का खिताब मिला।
विजेता को मिलेगा नगद पुरस्कार और 'पुराण'
इस प्रतियोगिता में दिल्ली, उज्जैन, इंदौर, जबलपुर और नागपुर समेत देश के विभिन्न हिस्सों से कुल 27 टीमें हिस्सा ले रही हैं। आगामी नौ जनवरी को फाइनल मुकाबला होगा। विजेता टीम को रुपये 25,000 नगद और सम्मान स्वरूप 'सील्ड पुराण' प्रदान किए जाएंगे। वहीं, शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को संस्कृत ग्रंथ और पुस्तकें भेंट की जा रही हैं।

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