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मैहर माता के आशीर्वाद से बीमारी ठीक होने का दावा, दर्शन के लिए हर साल ढोलक बजाते हुए करते हैं 800 किमी की यात्रा

इंदौर का तीस वर्षीय एक युवक मैहर में पहाड़ों पर विराजी मां शारदा के दर्शनों के लिए आठ सौ किमी की पदयात्रा कर रहा है। ढोल बजाते हुए जब यह युवक मां शारदा के गुणगान करते हुए निकलता है तो लोग देखते रह जाते हैं। कई जगह इसका ठहराव होता हैं। सागर से गुजरते वक्त जब नवदुनिया प्रतिनिधि ने युवक से बात की तो उसने अपनी आपबीती सुनाई।

By Jagran News Edited By: Versha Singh Published: Sat, 24 Feb 2024 12:33 PM (IST)Updated: Sat, 24 Feb 2024 12:33 PM (IST)
मैहर माता के आशीर्वाद से बीमारी ठीक होने का दावा, दर्शन के लिए हर साल ढोलक बजाते हुए करते हैं 800 किमी की यात्रा
मैहर माता के आशीर्वाद से बीमारी ठीक होने का दावा

ऑनलाइन डेस्क, सागर। इंदौर का तीस वर्षीय एक युवक मैहर में पहाड़ों पर विराजी मां शारदा के दर्शनों के लिए आठ सौ किमी की पदयात्रा कर रहा है। ढोल बजाते हुए जब यह युवक मां शारदा के गुणगान करते हुए निकलता है तो लोग देखते रह जाते हैं। कई जगह इसका ठहराव होता हैं।

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सागर से गुजरते वक्त जब नवदुनिया प्रतिनिधि ने युवक से बात की तो उसने अपनी आपबीती सुनाई। उसने दावा करते हुए कहा कि उसका जीवन मां शारदा की वजह से ही बचा है।

उसे श्वास नली में तकलीफ थी। डाक्टरों ने भी जब जवाब दे दिया, तब मां शारदा की शरण ली। मातारानी की ऐसी कृपा हुई कि उसकी बीमारी ठीक हो गई। उसके बाद से ही वह हर साल इंदौर से मैहर तक 800 किमी की पदयात्रा कर मातारानी की चौखट पर मत्था टेकने जा रहा है। बीते आठ साल से यह सिलसिला जारी है।

बपचन में ही गुजर गए थे पिता

सागर से गुजरते वक्त नवदुनिया से बात करते हुए इंदौर के श्री बाग निवासी 30 वर्षीय विकास कुशवाहा ने बताया कि बचपन में उसके पिता की मृत्यु हो गई थी। जिम्मेदारियों के बोझ तले जीवन की गाड़ी आगे बढ़ रही थी कि अचानक तबीयत बिगड़ गई। कुछ दिन तक सुधार नहीं हुआ तो अस्पताल में भर्ती हुआ। वहां पता चला कि श्वास नली में कचरा फंस गया है।

इलाज करने के लिए रुपयों की जरूरत थी, लेकिन मजदूरी करने वाला परिवार लाखों रुपये का इंतजाम नहीं कर सकता था। ऐसे में डाक्टरों ने घर जाकर सेवा करने के लिए कह दिया, तब उसकी मां अपने उसे मैहर स्थित मां शारदा के दर पर ले गई। वहां प्रार्थना की कि अब वह ही उनका सहारा है। वहां से मन्नत मांगने के बाद जब घर लौटे तो धीरे-धीरे तबियत ठीक हो गई। पूरी तरह स्वस्थ हुआ तब से मैं ढोलक बजाते हुए 800 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रहा हूं।

एक दिन में चालीस किमी यात्रा

विकास ने बताया कि यह पदयात्रा का आठवां साल है। बेलदारी करके जीवन-यापन करता है। पैदल यात्रा के दौरान एक दिन में 40 किलोमीटर चलता है। 18 से 20 दिन में वह मैहर पहुंच जाएगा। विकास ने बताया कि ढोलक बजाने से लोगों का ध्यान जाता है। कई लोग इसके बारे में पूछते हैं, तो हमारे साथ हुई इस घटना को हम उन्हें बताते हैं, तो कई लोग माता के जयकारे देखकर लगाने लगते हैं।

डिस्क्लेमर: दैनिक जागरण ऐसी खबरों की पुष्टि नहीं करता है।

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