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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 24, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Bilkis Bano Case: बिलकिस बानो केस के दोषी को फिर से मिली 10 दिन की पैरोल, गुजरात हाई कोर्ट में दी थी ये दलील

Published: Sat, 24 Feb 2024 09:53 AM (IST)

गुजरात उच्च न्यायालय ने बिलकिस बानो मामले के दोषी रमेश चंदना को 5 मार्च को होने वाली अपने भतीजे की ...और पढ़ें

2002 Godhra riots: रमेश चंदना को फिर से मिली 10 दिन की पैरोल
2002 Godhra riots: रमेश चंदना को फिर से मिली 10 दिन की पैरोल

HighLights

  1. बिलकिस बानो के आरोपी को फिर से मिली पेरोल
  2. गुजरात हाई कोर्ट ने दिया फैसला
  3. भतीजे की शादी में शामिल होगा चंदना

पीटीआई, अहमदाबाद। 2002 Godhra riots गुजरात उच्च न्यायालय ने बिलकिस बानो मामले के दोषी रमेश चंदना को 5 मार्च को होने वाली अपने भतीजे की शादी में शामिल होने के लिए 10 दिन की पैरोल दी है।

चंदना, जिन्होंने पिछले सप्ताह पैरोल के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था, इस मामले में पैरोल पाने वाली दूसरा दोषी है, क्योंकि मामले के सभी 11 दोषियों ने 21 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गोधरा शहर की एक जेल में आत्मसमर्पण कर दिया था।

भतीजे की शादी में शामिल होने के लिए मांगी पैरोल

उन्हें 2002 के गोधरा दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था।

न्यायमूर्ति दिव्येश जोशी ने शुक्रवार को जारी अपने आदेश में कहा, इस आवेदन के माध्यम से दोषी-आवेदक अपनी बहन के बेटे के विवाह समारोह में शामिल होने के आधार पर पैरोल छुट्टी की प्रार्थना करता है। इस आवेदन में आग्रह किए गए आधारों को ध्यान में रखते हुए, आवेदक-अभियुक्त को दस दिनों की अवधि के लिए पैरोल अवकाश पर रिहा करने का आदेश दिया जाता है।

चंदना को मिल चुकी है 1198 दिनों की पैरोल

सुप्रीम कोर्ट में गुजरात सरकार के हलफनामे के अनुसार, चंदना ने 2008 में कैद के बाद से 1,198 दिनों की पैरोल और 378 दिनों की छुट्टी का आनंद लिया था।

इससे पहले, मामले में एक अन्य दोषी प्रदीप मोधिया को उच्च न्यायालय द्वारा उसकी पैरोल याचिका की अनुमति के बाद 7 से 11 फरवरी तक पैरोल पर गोधरा जेल से रिहा किया गया था।

अगस्त 2022 में, राज्य सरकार द्वारा कारावास के दौरान उनके 'अच्छे आचरण' का हवाला देते हुए, अपनी 1992 की नीति को ध्यान में रखते हुए, आजीवन कारावास की सजा काट रहे 11 दोषियों को समय से पहले जेल से रिहा कर दिया गया था।

SC ने की थी 11 दोषियों की सजा में छूट रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी को सभी 11 दोषियों की सजा में छूट को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि राज्य सरकार के पास दोषियों को समय से पहले रिहाई देने का अधिकार क्षेत्र नहीं है, क्योंकि 2002 के मामले की सुनवाई महाराष्ट्र में हुई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने तब दोषियों को दो सप्ताह के भीतर जेल लौटने का आदेश दिया, जिन्हें 14 साल तक जेल में रहने के बाद 2022 में स्वतंत्रता दिवस पर गोधरा जिला जेल से रिहा किया गया था।

उन्होंने 21 जनवरी को गोधरा जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

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