ड्रोन की तरह उड़कर ऊंचाई पर बनेगा एयरक्राफ्ट, दुर्गम जगहों पर दवा पहुंचाने में मिलेगी मदद

बात जासूसी की हो या गुमचुप हमला करने की या दुर्गम जगहों पर सामान पहुंचाने की, ये ड्रोन हर चीज में माहिर है। सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए ये ड्रोन काफी मददगार साबित होगा।

By Amit SinghEdited By: Publish:Wed, 06 Feb 2019 11:49 AM (IST) Updated:Fri, 08 Feb 2019 11:01 AM (IST)
ड्रोन की तरह उड़कर ऊंचाई पर बनेगा एयरक्राफ्ट, दुर्गम जगहों पर दवा पहुंचाने में मिलेगी मदद
ड्रोन की तरह उड़कर ऊंचाई पर बनेगा एयरक्राफ्ट, दुर्गम जगहों पर दवा पहुंचाने में मिलेगी मदद

कानपुर [विक्सन सिक्रोड़िया]। आइआइटी एयरो स्पेस के छात्रों ने ऐसा मानवरहित यान (यूएवी) बनाया है, जो ड्रोन और एयरक्राफ्ट का काम करेगा। ये यान विशेष इसलिए है क्योंकि यह ड्रोन की तरह ही जमीन से उड़ान भरेगा, लेकिन एक निश्चित ऊंचाई पर स्वचालित तरीके से एयरक्राफ्ट में तब्दील हो जाएगा।

आइआइटी कानपुर के इस यान को बेंगलुरु में आयोजित देश के सबसे बड़े एयर इंडिया शो में प्रदर्शन के लिए चुना गया है। एयरो स्पेस साइंस इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक व मंगल कोठारी इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं, जिनके निर्देशन में इस यूएवी को शोध छात्र निधीशराज, रामाकृष्णा व अनिमेष शास्त्री ने तैयार किया है। अब छात्रों का पूरा ध्यान 20 से 24 फरवरी को बेंगलुरु के येलाहंका एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित स्टूडेंट पवेलियन (एयर इंडिया शो) की तैयारियों पर है।

डेढ़ घंटे तक भर सकता है उड़ान
आइआइटी छात्रों ने इस यूएवी में 5000 एम्यियर पावर की बैट्री लगाई है। इससे यह कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के आधार पर तय एरीना में डेढ़ घंटे तक उड़ान भर सकता है। ढाई किलोग्राम वजनी यह यूएवी एक किलोग्राम तक वजन उठाने में सक्षम है। इसका इस्तेमाल उन स्थानों पर दवाएं और हल्का सामान पहुंचाने में किया जा सकता है, जहां वाहनों का पहुंचना मुश्किल है।

125 एयरो डिजाइन के बीच हुआ मुकाबला
एयरो इंडिया शो के लिए देशभर के 50 कालेजों के 125 एयरो डिजाइन के बीच मुकाबला हुआ। इसमें 17 डिजाइन चुनी गईं। इनमें आइआइटी कानपुर की चार डिजाइन शामिल थीं। इसके बाद सभी डिजाइन के बारे में ऑनलाइन टास्क दिया गया। अंत में छह डिजाइन व प्रोटोटाइप चुने गए। इसमें ड्रोन-एयरप्लेन भी शामिल है।

इस तरह भरेगा उड़ान
आइआइटी कानपुर के इस ड्रोन-एयरप्लेन में चार रोटार लगे हैं, जो कि इसे एयरप्लेन की तरह उड़ने में मदद करेंगे। एक निश्चित ऊंचाई पर पहुंचने के बाद इसके रोटार काम करना शुरू कर देंगे, जो इसे किसी भी दिशा में मोड़ने के लिए सक्षम है। यह तीन हजार मीटर ऊंचाई तक उड़ सकता है।

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