इलाहाबाद में पर्यटकों को घूमने के लिए बहुत कुछ है। उत्तर प्रदेश के इस ऐतिहासिक शहर को देखने देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। इस शहर का उल्लेख भारत के धार्मिक ग्रन्थों में भी मिलता है। वेद, पुराण, रामायण और महाभारत में इस स्थान को 'प्रयाग' कहा गया है। इसे 'तीर्थराज' (तीर्थो का राजा) भी कहते हैं। गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का यहां संगम होता है, इसलिए यह 'त्रिवेणी संगम' कहलाता है। पर्यटकों को यहां आकर असीम संतुष्टि मिलती है।

इतिहास
प्राचीन काल में शहर को प्रयाग (बहु-यज्ञ स्थल) के नाम से जाना जाता था। ब्रह्मा ने प्रथम यज्ञ यहीं किया था और उसके बाद यहां अनगिनत यज्ञ हुए। इलाहाबाद मौर्य और गुप्त साम्राज्य से लेकर मुगल साम्राज्य तक समृद्धशाली इतिहास से भरा हुआ है। कुंभ के महान जन समूह में शामिल होने के अलावा इलाहाबाद में आपको भारतीय धर्म और संस्कृति के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। 1931 में इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ने ब्रिटिश पुलिस से घिर जाने पर स्वयं को गोली मारकर अपनी न पकड़े जाने की प्रतिज्ञा को सत्य किया।

इलाहाबाद के दर्शनीय स्थल:-


संगम
यह तीन पवित्र नदियों (गंगा, यमुना और सरस्वती) के मिलन का स्थान है। यहां वर्ष भर लाखों श्रद्धालु आते है और संगम में डुबकी लगाकर अपने आपको धन्य समझते हैं।

इलाहाबाद का किला
गंगा-यमुना के पवित्र संगम के किनारे स्थित इस भव्य किले का निर्माण अकबर ने 1583 ईसवी में बनवाया था। यह किला अपने शिल्प और निर्माण के लिए प्रसिद्ध है। यह किला तीन शानदार दीर्घाओं में बंटा हुआ है। वर्तमान में यह किला सेना द्वारा इस्तमाल किया जाता है। केवल कुछ क्षेत्र ही पर्यटकों के लिए खुले है। पर्यटकों को इसमें स्थित पातालपुरी मंदिर एवं अक्षय वट-वृक्ष तक जाने की अनुमति है। किले की बाहरी दीवार जल की सतह के ऊपर प्रतीत होती है। पर्यटकों को अशोक स्तंभ और सरस्वती कूप देखने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है।

पातालपुरी मंदिर
इस भूमिगत मंदिर में ही अक्षय वट है। ऐसी मान्यता है कि यहां की यात्रा भगवान राम ने की थी। इस स्थान का भ्रमण ह्वेन त्सांग द्वारा भी किया गया था ।

अशोका स्तंभ
अशोका स्तंभ बलुआ पत्थर का बना हुआ है। इसकी ऊचाई 10.6 मीटर है। इस स्तंभ पर कई शिलालेख हैं। शिलालेख पर जहांगीर द्वारा फारसी में लिखवाया गया है।

हनुमान मंदिर
यह मंदिर संगम के पास है । इस मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति है जो सारे उत्तर भारत में प्रसिद्ध है। यहां भगवान हनुमान की बड़ी मूर्ति को लेटे हुए मुद्रा में देखा जा सकता है। जब गंगा नदी में बाढ़ आती है जो यह मंदिर जलमग्न हो जाता है।

मनकामेश्वर मंदिर
यह सरस्वती घाट के पास यमुना नदी के तट पर स्थित है। यह इलाहाबाद के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है।

मिंटो पार्क
यह सरस्वती घाट के पास स्थित है। इसमें एक पत्थर का स्मारक है इसके शीर्ष पर चार शेरो का प्रतीक लगा हुआ है । मिंटो पार्क की नींव लॉर्ड मिंटो ने 1910 में रखी थी ।

स्वराज भवन
यह पुराना आनंद भवन है, जो वर्ष 1930 में मोती लाल नेहरू ने कांग्रेस समिति के मुख्यालय के रूप में इस्तेमाल करने के लिए राष्ट्र को दान कर दिया था। मोती लाल नेहरू ने इसे स्वराज भवन का नाम दिया। भारत के स्वर्गीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी यहां पैदा हुई थी। यह सोमवार को बंद रहता है ।

आनंद भवन
यह तत्कालीन नेहरू परिवार का पैतृक घर है। इसे अब संग्रहालय में बदल दिया गया है। यह स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय, घटनाओं का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है । मुख्य भवन एक संग्रहालय है जो नेहरू परिवार की यादगार है । यह सोमवार और सरकारी छुट्टियों पर बंद रहता है।

जवाहर तारामंडल
वैज्ञानिक खगोलीय यात्रा के लिए यह तारा मंडल बनाया गया है। तारामंडल खुलने का सुबह ग्यारह बजे से चार बजे तक खुलता है। यह भी सोमवार को बंद रहता है ।

साई धाम मंदिर
शिरडी साईं बाबा का यह नया मंदिर एजी कार्यालय के निकट ड्रमंड रोड पर स्थित है। यहां पर्यटक बड़ी संख्या में बृहस्पतिवार को आते है ।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय
भारत के सबसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में से एक है। इसके परिसर में विक्टोरियन और इस्लामी स्थापत्य शैली की इमारते हैं।

इलाहाबाद संग्रहालय
इस संग्रहालय में मूर्तिकला का एक उत्कृष्ट संग्रह है। इलाहाबाद संग्रहालय चंद्र शेखर आजाद पार्क के निकट स्थित है। इलाहाबाद संग्रहालय में गुप्त साम्राज्य के समय की टेराकोटा एवं वास्तुकला की चीजें प्रदर्शीत हैं।

चंद्र शेखर आजाद पार्क
संग्रहालय से सटे इस शानदार पार्क को कंपनी बाग के रूप में जाना जाता था । यहां इमारतों के अतिरिक्त सार्वजनिक पुस्तकालय, जी.एन. झा अनुसंधान संस्थान और चंद्र शेखर आजाद की मूर्ति है। इस पार्क का नाम महान शहीद स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद के नाम पर रखा गया है।

पत्थर गिरजाघर
यह शानदार गिरजाघर 1870 में सर विलियम एमर्सन द्वारा डिजाइन किया गया और 1887 में निर्मित किया गया। इस गिरजाघर की ख़ूबसूरती प्रत्येक आगंतुक को प्रभावित करती है।

खुसरो बाग
एक बड़ा बगीचा है जिसमें खुसरो, सम्राट जहागीर और शाह बेगम के बेटे की कब्रें स्थित हैं ।



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