सिर्फ भारत ही नहीं! मुस्लिम बहुल देश से लेकर कैरीबियाई द्वीपों तक, जानिए किन-किन देशों में होती है रामलीला
राम-लीला सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि और भी कई देशों में आयोजित होती है। इन देशों में रामायण और राम-लीला उनकी संस्कृति का हिस्सा है।

किन-किन देशों में होती है राम-लीला? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। नवरात्र के दिनों में राम-लीला का आयोजन किया जाता है और दशहरा के दिन रावण दहन के साथ इसका समापन होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं राम-लीला सिर्फ भारत में नहीं होती। जी हां, राम-लीला का आयोजन भारत के अलावा और भी कई देशों में होता है।
दरअसल, कई दूसरे देशों में भी रामायण सुनाई जाती है। इसलिए उन देशों में राम-लीला का जादू भी देखने को मिलता है। आइए जानें भारत के अलाव दुनिया के और किन देशों में राम-लीला देखने को मिलती है।
इंडोनेशिया
इंडोनेशिया में मुस्लिम आबादी ज्यादा है, लेकिन फिर भी रामायण यहां की संस्कृति में रची-बसी हुई है। यहां रामायण इतिहास और संस्कृति का हिस्सा है, जहां भगवान राम किसी एक धर्म के न होकर मानवीय आदर्शों का प्रतीक माने जाते हैं। जावा और बाली पर राम-लीला का मंचन बहुत ही खूबसूरत तरीके से नृत्य और नाटक के जरिए किया जाता है।
थाईलैंड
थाईलैंड की संस्कृति में रामायण का गहरा असर देखने को मिलता है। यहां रामायण को रामकियन के नाम से जाना जाता है, जो वहां का राष्ट्रीय काव्य भी माना जाता है। यहां रामायण के प्रसंगों को बहुत ही खूबसूरत तरीके से नृत्य और संगीत के जरिए पेश किया जाता है। रामायण को मंच पर पेश करते हुए कलाकार एक खास मास्क पहनते हैं, जिसे खोन कहा जाता है।
कंबोडिया
कंबोडिया का इतिहास हिंदू संस्कृति से गहराई से जुड़ा है। यहां रामायण को रीमकेर कहा जाता है। यहां के मंदिरों और ऐतिहासिक जगहों पर रामायण के प्रसंगों का बहुत ही खूबसूरत तरीके से किया जाता है। कलाकार खूबसूरत पोशाक और गहने पहनकर राम-लीला पेश करते हैं।
त्रिनिदाद और टोबैगो और गयाना
इन देशों में राम-लीला के पहुंचने का इतिहास काफी दिलचस्प है। 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान भारत से गिरमिटिया मजदूरों को इन देशों में गन्ने के खेतों में काम करने के लिए भेजा, जो अपने साथ यहां की संस्कृति भी साथ लेकर गए। इन मजदूरों की बड़ी आबादी इन्हीं देशों में रह गई और इस तरह इन देशों में रामायण पहुंची। यहां की एक बड़ी आबादी अपनी जड़ों को भारत से जोड़ सकती है। इसलिए यहां कई जगहों पर दीवाली से पहले राम-लीला का मंचन देखने को मिलता है।
