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    बच्चों की सही परवरिश के लिए जरूरी है हाउस रूल्स, इन नियमों से सिखाएं उन्हें अच्छी आदतें

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 08:42 PM (IST)

    हर बच्चे में बचपन में डाले गए अच्छे संस्कार और अनुशासन भविष्य का मजबूत आधार बनते हैं। घर वह पहली क्लास है जहां बच्चे जीवन के जरूरी मूल्य सीखते हैं। अगर उन्हें बचपन से ही कुछ जरूरी घरेलू नियमों का पालन सिखाया जाए तो वे न सिर्फ जिम्मेदार बनते हैं बल्कि जीवनभर सही दिशा में आगे बढ़ते हैं।

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    बच्चों के लिए बनाएं ये हाउस रूल्स (Picture Credit- Freepik)

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बच्चों की परवरिश में सिर्फ अच्छे कपड़े, खिलौने और शिक्षा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, क्योंकि उनकी पर्सनल सोच, आदतें और सामाजिक व्यवहार उसी माहौल से आकार लेते हैं, जिसमें वे पलते-बढ़ते हैं। इसलिए घर का वातावरण और वहां बनाए गए नियम बच्चों के भविष्य की दिशा तय करते हैं।

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    घर ही उनकी पहली क्लास होती है और माता-पिता उनके पहले टीचर, अगर शुरुआत से ही बच्चों को सही आदतें और नियम सिखाए जाएं, तो वे आज्ञाकारी, संस्कारी, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार बनते हैं। यहां कुछ ऐसे घरेलू नियम दिए जा रहे हैं, जो हर बच्चे के लिए जरूरी ही नहीं, जीवन में आगे बढ़ने के लिए आधार भी हैं तो आईए जानते हैं इनके बारे में-

    बच्चों के लिए बनाएं ये नियम

    • समय पर सोना और उठना- डेली रूटीन बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करते है।
    • खाने से पहले और बाद में हाथ धोना- बच्चे को खाने से पहले और बाहर से आने क बाद साफ-सफाई की आदत डालने से रोगों से बचाव होता है।
    • ‘प्लीज’, ‘सॉरी’ और ‘थैंक यू’ कहना- इससे बच्चे में विनम्रता और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना बढ़ती है।
    • बड़ों का आदर और छोटों से स्नेह- यह परिवार और समाज में अच्छे संबंधों की नींव है।
    • अपनी चीजों को जगह पर रखना- ऐसा करने से अनुशासन और संगठन की आदत विकसित होती है।
    • टीवी/मोबाइल का सीमित उपयोग- स्क्रीन टाइम कंट्रोल में रखने से पढ़ाई और क्रिएटीविटी में सुधार होता है।
    • सभी से अच्छा व्यवहार करना- ऐसे व्यवहार सामाजिक गुण और सहिष्णुता सिखाते हैं।
    • पढ़ाई और खेल दोनों के लिए समय तय करना- पढ़ाई और खेल में बैलेंस बच्चों के विकास को संपूर्ण बनाता है।
    • ईमानदारी और सच्चाई का पालन करना- बच्चों में ये गुण उनके कैरेक्टर की नींव रखता है।
    • छोटे-छोटे काम खुद करना- इससे बच्चे में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास विकसित होता है।
    • कूड़े को डस्टबिन में डालना- इससे स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ती है।
    • खाने की कद्र करना- खाने की कद्र करना बच्चे में चीजों का मूल्य और कृतज्ञता का भाव सिखाता है।
    • अपना कमरा साफ रखना- इससे बच्चे में जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना विकसित होती है।
    • पशु-पक्षियों के प्रति दया रखना- पशु-पक्षियों से प्रेम बच्चे में करुणा, संवेदनशीलता और इंसानियत का भाव बढ़ता है।
    • हर दिन एक अच्छा काम करने की कोशिश- इससे बच्चे में पॉजिटिव सोच और सेवा-भाव की भावना बढ़ती है।

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