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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 31, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Richest Village in Asia: एशिया के सबसे अमीर गांवों में शुमार है इंडिया की ये जगह, हर किसान है लखपति

By Nandini DubeyEdited By:
Published: Fri, 31 Jan 2020 12:49 PM (IST)Updated: Sat, 01 Feb 2020 09:01 AM (IST)

Richest Villages in Asiaदेश में खेती को आज भी फायदे का सौदा नहीं माना जाता है। काफी हद तक ये ...और पढ़ें

Richest Village in Asia: एशिया के सबसे अमीर गांवों में शुमार है इंडिया की ये जगह, हर किसान है लखपति
Richest Village in Asia: एशिया के सबसे अमीर गांवों में शुमार है इंडिया की ये जगह, हर किसान है लखपति

नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Richest Villages in Asia: देश में खेती को आज भी फायदे का सौदा नहीं माना जाता है। काफी हद तक ये सच भी है। कई बार तो लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन बदलते वक्त के साथ अब इसकी दूसरी तस्वीर भी सामने आ रही है। इसके मुताबिक अब किसान खेती से लाखों कमा भी रहे हैं। अगर कहें कि वे लखपति बन रहे हैं तो गलत नहीं होगा। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसी कौन सी ऐसी जगह हैं, जहां किसान खेती से लाखों कमा रहे हैं तो आइए जानते हैं।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से महज 92 किलोमीटर दूरी पर स्थित है मड़ावग गांव। ये गांव एशिया के सबसे अमीर गांवों में शुमार है। 7 हजार फीट की ऊंचाई पर बसे इस गांव में लोग सेब की खेती करते हैं। यहां के परिवार की आमदनी 70 से 75 लाख रूपये सालाना है। यहां के किसानों की मेहनत का नतीजा है कि यहां सबसे अच्छी गुणवत्ता का का सेब पाया जाता है। यहां रॉयल एप्पल, रेड गोल्ड, गेल गाला जैसी सेब की बेस्ट क्वालिटी उगाई जाती हैं। साथ ही यहां के सेब का आकार काफी ज्यादा अच्छा है। यहां हर साल बर्फ के गिरने पर सेब की क्वालिटी इतनी बेहतर होती है कि यहां के सेब जल्दी खराब नहीं होते है। 

बच्चे भी करते हैं देखभाल 

यहां के लोगों के लिए सेब की कितनी अहमियत है। इस बात का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि यहां बड़े- बूढ़ों के साथ-साथ बच्चे भी बागों की देखभाल करते हैं। इस मामले में पैरेंट्स की मदद करते हैं। वहीं बता दें कि 80 के दशक में तो सेब की खेती का कहीं कोई नामो-निशान भी नहीं था लेकिन जैसे-जैसे वक्त बीता किसानों ने इस खेती का रूख किया। नब्बे के दशक में शुरू हुई इस खेती से आज लाखों रुपये कमा रहे हैं। वहीं ज्यादातर गांववासियों की प्राथमिक आय स्त्रोत भी सेब की खेती ही है।