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    फिटनेस को दें महत्व

    By Srishti VermaEdited By:
    Updated: Sun, 26 Mar 2017 11:14 AM (IST)

    अपने खान-पान में भी अनुशासित एवं नियमित रहना आवश्यक है, क्योंकि खान-पान के अनुकूल ही हमारा आत्मिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास होता है।

    फिटनेस को दें महत्व

    शारीरिक फिटनेस सर्वोपरि है, क्योंकि यह अन्य सभी मानवीय शक्तियों, गुणों अथवा भावों का स्रोत है। शरीर को स्वस्थ, सबल, निरोग, चुस्त एवं दुरुस्त रखना प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसीलिए मां भी जन्म से ही अपने शिशु के शारीरिक पोषण पर अधिक ध्यान देती है। जीवन की सार्थकता एवं सफलता की प्राप्ति तभी संभव है, जब हम शारीरिक रूप से स्वस्थ, सबल एवं सक्षम रहें। इसी के अनुरूप हमारी मानसिक, बौद्धिक, आत्मिक एवं नैतिक योग्यता संचालित होती है। अत: प्रत्येक मनुष्य, विशेषकर विद्यार्थी को अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्हें अपने व्यक्तित्व के बहुमुखी विकास के लिए जीवन में अनुशासन का पालन करना चाहिए। अपनी दिनचर्या सुनिश्चित कर उसका अनुपालन करना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी को ब्रह्ममुहूर्त में उठकर, नित्यक्रिया से निवृत्त हो व्यायाम, योग एवं साधना करनी चाहिए।

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    अपने खान-पान में भी अनुशासित एवं नियमित रहना आवश्यक है, क्योंकि खान-पान के अनुकूल ही हमारा आत्मिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास होता है। विभिन्न शास्त्रों में भी भोजन के अनुरूप शक्तियों, भावों, गुणों, आचार, चिंतन, कर्म आदि का होना स्वाभाविक प्रक्रिया बताया गया है। उसी के अनुरूप उद्देश्य एवं लक्ष्यों का निर्धारण किया जाता है और अभीष्ट की प्राप्ति होती है। अत: शैशव काल से ही बच्चों को उत्तम, सात्विक आहार देना चाहिए, ताकि उनके विचार एवं कर्म भी सात्विक एवं सम्यक हों। इस जीवनशैली से हम एक आदर्श व्यक्तित्व, परिवार, समाज एवं राष्ट्र की नींव रख सकते हैं। वह चाणक्य की फिटनेस पर आधारित अनुशासित आदर्श नीति ही थी, जिसने एक सुदृढ़ व्यक्तित्व, सम्राट, साम्राज्य अथवा राष्ट्र को साकार स्वरूप दिया।

    वह सिद्धार्थ, विवेकानन्द, आदिगुरु शंकराचार्य जैसे चिंतकों, अरस्तू, प्लेटो,सुकरात जैसे दार्शनिकों, अशोक, चंद्रगुप्त, अकबर जैसे सम्राटों, तुलसीदास, वेदव्यास,वाल्मीकि जैसे मीमांसकों एवं साहित्यकारों, आइंस्टीन, न्यूटन, आर्यभट्ट, जगदीशचंद्र बसु, सीवी रमन जैसे वैज्ञानिकों और हनुमान जैसे पौराणिक प्रेरणादायी पात्रों की आदर्श एवं अनुकरणीय फिटनेस की नीति ही थी, जिसने उन्हें अनुकरणीय स्रोत बनाया। सभी अभिभावकों को फिटनेस का महत्व समझते हुए एक स्वस्थ एवं समृद्ध, वैश्विक समाज के निर्माण के लिए अपने बच्चों के फिटनेस पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

    -अलका श्रीवास्तव प्रधानाचार्या, बीबीएस इंटर कॉलेज, इलाहाबाद

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