"कृपया अपना कचरा घर ले जाएं"- डस्टबिन की जगह जापान में लगे हैं ऐसे साइनबोर्ड, 30 साल पहले हुई घटना है वजह
जापान अपनी साफ-सफाई के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। जापान की सड़कों पर आपको कभी भी कचरा पड़ा नजर नहीं आएगा लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि जापान में एक भी पब्लिक डस्टबिन (No Public Dustbins in Japan) नहीं है। इसके पीछे वजह है जापान में हुई एक घटना जो 30 साल पहले हुई थी। आइए जानें कि आखिर ऐसा क्या हुआ था।

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जापान अपनी आधुनिक तकनीकों, डिसिप्लिन और साफ-सफाई (Public Cleanliness in Japan) के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इसलिए लोगों के मन में जापान घूमने की उत्सुकता रहती है। हालांकि, अगर आप पहली बार जापान घूमने जाएंगे, तो थोड़े हैरान हो जाएंगे। साफ-सफाई के लिए दुनियाभर में जाने जाने वाले जापान में एक भी पब्लिक डस्टबिन नहीं है (No Public Dustbins in Japan)।
जी हां, यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन यह सच है। चाहे आप ट्रेन स्टेशन पर हों, पार्क में हों, या शहर की सड़कों पर, आपको एक भी कूड़ादान नहीं मिलेगा (Japanese Hygiene Culture)। हालांकि, हमेशा से ऐसा नहीं था। जापान में एक भी पब्लिक डस्टबिन न होने के पीछे एक 30 साल पुरानी दर्दनाक घटना छिपी हुई है। आइए जानते हैं कि ऐसा क्या हुआ था कि जापान में किसी भी सार्वजनिक जगह पर आपको डस्टबिन देखने को नहीं मिलेंगे।
क्यों जापान में नहीं हैं पब्लिक डस्टबिन? (No Public Dustbins in Japan)
जापान में सार्वजनिक कूड़ेदान न होना 30 साल पहले हुए एक भयानक आतंकवादी हमले से जुड़ा है। 20 मार्च 1995 को टोक्यो मेट्रो में सारिन गैस हमला हुआ था। यह हमला ओम शिनरिक्यो नाम के एक संप्रदाय ने किया था, जिसका नेतृत्व शोको आसाहारा नाम का एक व्यक्ति कर रहा था।
इस संप्रदाय की शुरुआत चिजुओ माट्सुमोटो नाम के एक फार्मसिस्ट ने 1984 में की थी। इस संप्रदाय ने हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और ईसाई मान्यताओं को मिलाकर एक विचारधारा बनाई थी। उनका मानना था कि दुनिया का अंत निकट है और केवल उनके संप्रदाय के सदस्य ही इससे बचा सकते हैं। इसलिए इस संप्रदाय के लोगों ने शम्भाला जाकर लोगों को मारना शुरू कर दिया।
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सारिन गैस हमला
20 मार्च 1995 की सुबह, ओम शिनरिक्यो के पांच सदस्यों ने टोक्यो मेट्रो की अलग-अलग ट्रेनों में सारिन गैस छोड़ी। इस प्लान को अनजाम देने के लिए इन्होंने प्लास्टिक के बैग और पैनी नोक वाली छतरी का इस्तेमाल किया। उन्होंने प्लास्टिक बैग में सारिन गैस भरी, जिसे ट्रेन में जाकर उन्होंने छतरी की नोक से पंक्चर कर दिया और पूरी ट्रेन में इस गैस को फैला दिया।
नाजी वैज्ञानिकों ने बनाई थी यह गैस
सारिन एक घातक नर्व गैस है, जिसे नाजी वैज्ञानिकों (Nazi Scientist) ने 1930 के दशक में बनाया था। इस हमले में 12 लोगों की मौत हो गई और हजारों लोग घायल हो गए। यह हमला न केवल जापान के लिए एक बड़ा झटका था, बल्कि इसने देश की सुरक्षा व्यवस्था को भी हिला कर रख दिया। जापान की ट्रेनें वहां की आधुनिकता और विकास का प्रतीक मानी जाती हैं। ऐसे में ट्रेन में ऐसा भयानक हादसा होना, जापानी लोगों के सम्मान पर वार जैसा भी था।
हमले के बाद हुए बदलाव
इस हमले के बाद जापान ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए। सार्वजनिक जगहों पर कूड़ेदान हटा दिए गए, क्योंकि इनका इस्तेमाल आतंकवादी हमलों के लिए किया जा सकता था। यह कदम अन्य देशों में भी देखा गया है, लेकिन जापान ने इस नीति को आजतक नहीं बदला है। इसलिए 30 साल बाद भी जापान में सार्वजनिक कूड़ेदान नहीं हैं, बल्कि आपको कई जगह साइन बोर्ड नजर आ जाएंगे, जिनपर लिखा है- "कृप्या अपना कचरा अपने घर ले जाएं"।
जापान की संस्कृति
जापान में स्वच्छता को काफी अहम माना जाता है। यहां के लोगों को बचपन से ही सिखाया जाता है कि अपने इस्तेमाल की जगह को साफ रखना उनकी जिम्मेदारी है। स्कूलों में बच्चे खुद अपने क्लास रूम और हॉल की सफाई करते हैं। सार्वजनिक जगहों पर "अपना कचरा घर ले जाएं" जैसे साइन बोर्ड्स नजर आते हैं। इसी वजह से पब्लिक डस्टबिन्स न होने के बावजूद, जापान एक बेहद साफ-सुथरा देश है।
जापान से सीख
जापान ने इस घटना से एक बड़ी सीख ली। यहां के लोगों ने स्वच्छता और जिम्मेदारी को अपनी रोज की लाइफस्टाइल का हिस्सा बना लिया। हालांकि, यह टूरिस्ट्स के लिए थोड़ी मुश्किलें पैदा कर सकती है, लेकिन जापानी लोग इसे अपनी और अपने देश की सुरक्षा के लिए अहम मानते हैं।
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