जापान की दारुमा डॉल का भारत से है कनेक्शन, PM Modi को मिले इस गिफ्ट के पीछे छिपी है दिलचस्प कहानी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जापान यात्रा के दौरान दारुमा डॉल उपहार में दी गई है जो शोरिनजान दारुमा-जी मंदिर के पुजारी ने दी। दारुमा गुड़िया लक्ष्य और सपनों की प्राप्ति का प्रतीक मानी जाती है जिसकी आंखें मनोकामना पूरी होने पर भरी जाती हैं। इसका इतिहास भी बहुत दिलचस्प है।

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जापान यात्रा के दौरान एक खास तोहफा मिला है। उन्हें वहां की फेमस दारुमा डॉल गिफ्ट में दी गई है। ये गुड़िया जापान के शोरिनजान दारुमा-जी मंदिर के मुख्य पुजारी ने भेंट की है। खास बात ये है कि इस गुड़िया की जड़ें भारत से भी जुड़ी हैं।
आज का हमारा लेख भी इसी विषय पर है। हम आपको इस गुड़िया के बारे में विस्तार से जानकारी देने जा रहे हैं। आइए जानते हैं इस गुड़िया की कहानी और क्या है इसका महत्व?
क्या है दारुमा गुड़िया की कहानी?
दारुमा गुड़िया की प्रेरणा भारत से मानी जाती है। दरअसल, ये गुड़िया दरअसल तमिलनाडु के कांचीपुरम के एक बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म से जुड़ी है। उनका जन्म लगभग 440 ईस्वी में हुआ था। मान्यता के अनुसार, बोधिधर्म ने लगातार नौ साल तक गहरी साधना और ध्यान किया। इस दौरान उन्होंने अपने शरीर के अंगों का उपयोग तक नहीं किया।
इसी घटना से दारुमा गुड़िया की शुरुआत हुई। जापान के शोरिनजान दारुमा-जी मंदिर के संस्थापक शुरू में बोधिधर्म के चित्र बनाते थे। लोग इन्हें अपने घर ले जाकर मानते थे कि यह उन्हें बुरी शक्तियों और दुर्भाग्य से बचाएंगे। समय के साथ यह चित्र बदलकर दारुमा गुड़िया के रूप में विकसित हो गए।
क्यों खाली रहती हैं आंखें?
दारुमा गुड़िया को लक्ष्य और सपनों की प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है। जब कोई इसे खरीदता है तो इसकी दोनों आंखें खाली और सफेद होती हैं। परंपरा है कि जब खरीदार कोई मनोकामना या लक्ष्य तय करता है, तो वह एक आंख में रंग भरता है। फिर जब उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तब दूसरी आंख में रंग भर दिया जाता है। इस तरह गुड़िया की आंखें यह दिखाती हैं कि इंसान की इच्छा या संकल्प कब पूरा हुआ। इसी वजह से इसकी आंखें शुरू में खाली छोड़ी जाती हैं।
सौभाग्य और सफलता की प्रतीक है ये गुड़िया
जापान की संस्कृति और इतिहास में दारुमा गुड़िया का गहरा महत्व है। ये गुड़िया खास तौर पर दृढ़ता और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है। गोल आकार और चमकीले रंगों से बनी कागज की ये गुड़िया दिखने में भी आकर्षक होती है। आपको बता दें कि सदियों से जापान में लोग शोरिनजान दारुमा मंदिर जाकर ये गुड़िया पाते रहे हैं। माना जाता है कि यह गुड़िया हमेशा सीधी खड़ी रहती है, चाहे उसे कितनी भी बार गिरा दिया जाए।
यही वजह है कि इसका डिजाइन “नानाकोरोबी याओकी” नाम के जापानी कहावत से जुड़ा है, जिसका सीधा मतलब है- “सात बार गिरो, आठवीं बार उठो।” यानी कठिनाइयों के बावजूद हार मत मानो और बार-बार उठ खड़े हो।
पीएम मोदी को उपहार देने का महत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दारुमा गुड़िया भेंट करना केवल एक तोहफा नहीं है, बल्कि इसका गहरा प्रतीकात्मक महत्व है। जापानी परंपरा में दारुमा गुड़िया किसी भी व्यक्ति की आकांक्षा, सपनों और लक्ष्यों को पाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस भेंट का मतलब ये भी है कि भारत और जापान अपने आपसी रिश्तों को और मजबूत करने के लिए संकल्पित है।
यह सांस्कृतिक उपहार दोनों देशों की साझी विरासत और जुड़ाव का प्रतीक भी है। दारुमा गुड़िया से ये संदेश मिलता है कि चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, धैर्य और दृढ़ता से लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री को ये गुड़िया एक अनमोल सौगात के रूप में दी गई है।
उम्मीद का प्रतीक मानी जाती है ये गुड़िया
दारुमा गुड़िया न सिर्फ जापान में, बल्कि पूरी दुनिया में प्रेरणा और उम्मीद का प्रतीक मानी जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ये उपहार मिलना भारत और जापान की दोस्ती को और गहरा बनाता है। गोल और रंगीन ये गुड़िया, अपने भीतर सपनों, सफलता और सौभाग्य का संदेश समेटे हुए है।
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