AI बन गया है बच्चों का दोस्त? क्यों Chatbots के साथ दोस्ती हो सकती है खतरनाक
आजकल बच्चे AI को सिर्फ होमवर्क के लिए ही नहीं, बल्कि दोस्त की तरह भी इस्तेमाल कर रहे हैं। यह दोस्ती भले ही सुनने में मामूली लग सकती है, लेकिन इसके कई गंभीर नुकसान (Dangers of AI) भी हो सकते हैं। इसलिए बच्चों और AI के बीच के रिश्ते को लेकर पेरेंट्स को सावधानी बरतनी चाहिए। आइए जानें कैसे।

AI से दोस्ती कैसे है खतरनाक? (Picture Courtesy: AI Generated)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज का समय Artificial Intelligence (AI) का दौर है। AI हमारे जीवन का एक ऐसा हिस्सा बनता जा रहा है, जिसे अलग करना मुश्किल है। बच्चे भी अपने कई कामों के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं (AI for Kids)। लेकिन अब वे सिर्फ उनसे अपने होमवर्क में मदद नहीं ले रहे हैं, बल्कि उससे दोस्त की तरह बातें भी कर रहे हैं। इन लोगों में बच्चे भी शामिल हैं।
जी हां, बहुत हद तक संभावना है कि आपका बच्चा भी अपने AI से दोस्तों की तरह बातें करता हो। वे अपने जीवन की कई बातें या मन में उठने वाले सवाल AI से पूछते हैं और उनके सभी जवाबों पर आंख बंद करके भरोसा भी करते हैं। एक तरफ जहां AI काफी मददगार साबित हो सकता है, वहीं बच्चों का इसे दोस्त बनाकर बातें करना नुकसानदेह (Dangers of AI For Kids) भी हो सकता है। आइए जानें बच्चों की AI से दोस्ती कैसे खतरनाक साबित हो सकती है।
कैसे नुकसानदेह हो सकती है AI की यह दोस्ती?
- सामाजिक विकास में बाधा- बच्चे सोशल स्किल्स लोगों के संपर्क में आकर सीखते हैं। बात करते समय आई कॉन्टेक्ट बनाना, भावनाओं को समझना, सहानुभूति दिखाना और मुश्किल सामाजिक परिस्थितियों को नेविगेट करना। AI एक प्रोग्राम है, जो पहले से तय जवाब देता है। इसके साथ लगातार बातचीत करने से बच्चों के सामाजिक विकास में रुकावट आ सकती है। उन्हें असली दोस्त बनाने और रिश्ते निभाने में परेशानी हो सकती है।
- डाटा प्राइरेसी का खतरा- बच्चे अक्सर समझ नहीं पाते कि उनकी पर्सनल इन्फॉर्मेशन कितनी मूल्यवान है। वे AI के सामने अपने परिवार, दोस्तों, स्कूल या पर्सनल पसंद-नापसंद के बारे में अनजाने में कह सकते हैं। यह डाटा कंपनियां इकट्ठा कर सकती हैं और भविष्य में टार्गेटेड एडवर्टाइजिंग या और भी गंभीर चीजों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
- गलत सूचना- AI डाटा से ट्रेन होने वाला एक मॉडल है, जिसके सभी जवाब सही हो, जरूरी नहीं। ऐसे में बच्चे कई बार अपने मन की उलझन या स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी पाने के लिए AI से बात कर सकते हैं। ऐसे में संभावना है कि AI का दिया जवाब गलत हो। इससे बच्चा खुद को नुकसान पहुंचा सकता है या गलत कदम उठा सकता है।
- इमोशनल डिपेंडेंसी- AI चैटबॉट्स से बात करते वक्त हमेशा ऐसा लगता है, जैसे वे आपके लिए हमेशा मौजूद हैं और आपकी बातों को समझते हैं। यह विशेषता एक ऐसा इमोशनल सपोर्ट बन सकती है, जो इंसानों के रिश्तों से कहीं ज्यादा आकर्षक लगे। बच्चा असली दुनिया की परेशानियों से भागकर AI की वर्जुअल दुनिया का सहारा ले सकता है, जो डिप्रेशन और आइसोलेशन का कारण बन सकता है।
- क्रिएटिविटी पर असर- AI तस्वीरें बना सकता है, कहानियां लिख सकता है और समस्याएं हल कर सकता है। अगर बच्चा हर सवाल का जवाब या हर समस्या का हल AI से मांगने लगे, तो उसकी खुद की सोचने, कल्पना करने और क्रिएटिविटी दिखाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
किन सावधानियों का ध्यान रखना जरूरी है?
- गाइड बनें- बच्चों को AI के इस्तेमाल से रोकने के बजाय, उनके साथ बैठें और इस तकनीक के बारे में समझाएं। उन्हें बताएं कि AI एक मशीन है, एक इंसान नहीं। यह कैसे काम करता है और इसकी सीमाएं क्या हैं।
- पर्सनल बाउंड्री तय करें- बच्चों को साफ-साफ समझाएं कि वे AI के सामने अपना नाम, पता, स्कूल का नाम, फोन नंबर या परिवार के बारे में कोई निजी जानकारी साझा न करें। उन्हें डिजिटल फुटप्रिंट का महत्व बताएं।
- असल दुनिया को प्राथमिकता दें- बच्चों को उनके दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने, बाहर खेलने और फिजिकल एक्टिविटीज में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। AI को एंटरटेनमेंट का एक विकल्प बनाए रखें, जीवन का आधार नहीं।
- क्रिटिकल थिंकिंग विकसित करें- बच्चों को सिखाएं कि AI की दी गई हर जानकारी सही नहीं होती। उन्हें सवाल पूछने, जानकारी को दूसरे सोर्स से वेरिफाई करने और रिजनिंग करने के लिए मोटिवेट करें।
- नजर रखें- बच्चे किस AI टूल का इस्तेमाल कर रहे हैं और उससे क्या बातचीत कर रहे हैं, इस पर नजर रखें। पेरेंटल कंट्रोल का इस्तेमाल करें।

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