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    इस जानलेवा बीमारी से जूझ रहे थे तबला वादक Zakir Hussain, पढ़ें इससे जुड़ी सभी जरूरी बातें

    रवि‍वार को सैन फ्रांसिस्को के एक अस्‍पताल में मशहूर तबला वादक Zakir Hussain का न‍िधन हो गया। वह Idiopathic Pulmonary Fibrosis नामक बीमारी से जूझ रहे थे। उनके मौत की खबर की पुष्टि परि‍जनों ने की है। जाक‍िर हुसैन की मौत के बाद से मनोरंजन जगत में भी मातम छाया हुआ है। सभी उनकी आत्‍मा को शांत‍ि प्रदान करने की प्रार्थना कर रहे हैं।

    By Vrinda Srivastava Edited By: Vrinda Srivastava Updated: Mon, 16 Dec 2024 11:08 AM (IST)
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    मशहूर तबला वादक जाक‍िर हुसैन का न‍िधन। (Image Credit- Instagram)

    लाइफस्‍टाइल डेस्‍क, नई दिल्‍ली। दुनियाभर में शास्त्रीय संगीत में भारत को अलग पहचान दिलाने वाले उस्ताद और मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन का रव‍िवार को न‍िधन हो गया। उन्‍होंने सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में आख‍िरी सांस ली। जाक‍िर हुसैन के मौत की पुष्‍ट‍ि उनके परिजनों ने की है। बताया जा रहा है क‍ि 73 साल के Zakir Hussain इडियोपैथिक पल्मोनरी फारब्रोसिस बीमारी से जूझ रहे थे। पिछले कुछ हफ्तों से वह अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में ICU में भर्ती थे।

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    जाक‍िर हुसैन की मौत के बाद से मनोरंजन जगत में भी मातम छाया हुआ है। करीना कपूर, रणवीर सिंह, रितेश देशमुख और भूमि पेडनेकर समेत कई सेल‍िब्र‍िटीज ने दिवंगत तबला वादक को श्रद्धांजलि दी। आपको बता दें क‍ि जाक‍िर हुसैन को अपनी पीढ़ी का सबसे महान तबला वादक माना जाता है। उनका जन्म 9 मार्च 1951 को मुंबई में हुआ था। वह प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद अल्ला रक्खा के पुत्र थे। जाक‍िर हुसैन इडियोपैथिक पल्मोनरी फारब्रोसिस (Idiopathic Pulmonary Fibrosis Disease) बीमारी से जूझ रहे थे। आइए जानते हैं क‍ि ये कौन सी बीमारी है-

    क्‍या है IPF बीमारी

    बताया जा रहा है क‍ि Zakir Hussain ब्‍लड प्रेशर के मरीज थे। इससे उन्‍हें दिल से जुड़ी कई बीमार‍ियां थीं। पीटीआई को दिए एक इंटरव्‍यू में जाक‍िर हुसैन ने बताया था क‍ि वो इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) नामक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। ये एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है। इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। ये बीमारी फेफड़ों में होती है ज‍िससे सांस लेने की समस्‍या भी हो जाती है।

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    खून में हो जाती ऑक्‍सीजन की कमी

    डॉ. शीबा कल्याण बिस्वाल (मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल, गुरुग्राम में पल्मोनोलॉजी, रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन की क्लिनिकल डायरेक्टर) ने बताया क‍ि अगर कोई इस बीमारी से जूझ रहा होता है तो सांस लेने की समस्‍या तो होती ही है, साथ ही लंग में स्‍कार्ड ट‍िश्‍यूज बढ़ने लगते हैं जिससे सांस लेना काफी मुश्किल हो जाता है। बढ़ती उम्र के साथ-साथ यह बीमारी और भी गंभीर होती चली जाती है। इस बीमार‍ी से खून में ठीक तरह से ऑक्‍सीजन नहीं पहुंच पाता है। इससे शरीर में और गंभीर समस्‍याएं होने लगती हैं। 

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    ये हैं बीमारी के कारण

    उन्‍होंने बताया क‍ि आमतौर पर यह बीमारी 70 से 75 उम्र के लोगों को अपनी चपेट में लेती है। कई मामलों में लंग ट्रांसप्‍लांट करवाना पड़ सकता है। अगर क‍िसी को सांस लेने में दिक्कत हो रही है या तीन हफ्ते से ज्‍यादा समय से खांसी आ रही है तो तुंरत डॉक्‍टर से जांच करवाना जरूरी है। अगर आप स्‍मोक करते हैं या आपके परिवार में IPF का इतिहास रहा है तो आप में इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।

    IPF के लक्षण

    NIH के मुताब‍िक, सांस लेने में तकलीफ होना, ड्राई कफ, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, हद से ज्‍यादा थकान, वजन कम होना इसके आम लक्षणों में शाम‍िल है।

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