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सिर्फ फेफड़े नहीं, दिमाग की नसें भी ब्लॉक कर रहा बढ़ता AQI; स्ट्रोक को दे रहा बुलावा

Published: Wed, 14 Oct 2026 08:17 AM (IST)

राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण (AQI) के कारण स्ट्रोक का खतरा बढ़ रहा है, जिसमें युवा भी प्रभावित हो रहे हैं।

एक्यूआई के बढ़ने से होता है स्ट्रोक का खतरा (Image Source: AI-Generated)

एक्यूआई के बढ़ने से होता है स्ट्रोक का खतरा (Image Source: AI-Generated)

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अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में एक्यूआई के बढ़ने के साथ स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ रहा है। डाक्टरों के अनुसार प्रदूषण, तनाव व घंटों बैठकर काम करना इसे साइलेंट किलर बना रहे हैं।

पुष्पावती सिंघानिया हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीएसआरआइ) अस्पताल के न्यूरोसर्जन एवं निदेशक डॉ. अमिताभ गुप्ता के अनुसार प्रदूषण के मौसम में अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में स्ट्रोक के मामले बढ़ने लगते हैं। 35 से 45 वर्ष के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

स्ट्रोक विशेषज्ञ इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट-न्यूरोलाजी डॉ. विनीत सूरी के अनुसार, प्रदूषण, तनाव और लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि नहीं करना स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाने वाले कारक हैं।

प्रदूषण से कैसे बढ़ता है खतरा?

डिस्कवर पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित दिल्ली-शिमला के अध्ययन के अनुसार 2021 से लेकर 2025 के मध्य में अस्पताल में भर्ती 41436 मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें दिल्ली के 11494 हृदय रोग के मामले शामिल थे। अध्ययन के अनुसार दिल्ली में एक्यूआई में हर 10 अंक की वृद्धि पर एक दिन के भीतर हृदय रोग की घटनाओं में 1.8 प्रतिशत और पीएम 2.5 में 10 यूनिट की वृद्धि पर दो प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। प्रदूषित कण प्लेटलेट्स को अधिक चिपचिपा बना देते हैं, जिससे नसों में खून के थक्के जमने का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययनों में पीएम 2.5 बढ़ने के साथ हार्ट अटैक के जोखिम में दो प्रतिशत व स्ट्रोक के जोखिम में एक प्रतिशत वृद्धि का संबंध पाया गया।

कुर्सी और तनाव का दोहरा असर

डॉ. विनीत सूरी के अनुसार पीएम 2.5 के महीन कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर सूजन बढ़ाते हैं व रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे रक्तचाप बढ़ने व खून का थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे मस्तिष्क की रक्त वाहिका में रुकावट आने या फटने से स्ट्रोक होता है।

लक्षणों को न करें नजरअंदाज

डॉ. विनीत सूरी के अनुसार अचानक संतुलन बिगड़ना, धुंधला दिखना, चेहरा एक तरफ लटकना, हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन और बोलने में परेशानी स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। डॉ. अमिताभ गुप्ता के अनुसार लक्षण शुरू होने के बाद शुरुआती साढ़े चार घंटे उपचार के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में लक्षण दिखने पर अस्पताल पहुंचना चाहिए।

बचाव कैसे करें?

डॉ. सूरी के अनुसार प्रदूषण अधिक होने पर सुबह की सैर टालें और बाहर निकलते समय एन-95 मास्क पहनें। हर 30 से 40 मिनट में उठकर दो-तीन मिनट टहलें। सात से आठ घंटे सोएं और रक्तचाप, शुगर व कोलेस्ट्राल की नियमित जांच कराएं। धूमपान से बचें और पर्याप्त पानी पिएं।

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