न कोई ऑपरेशन, न नसबंदी का डर! कैसे काम करेगी पुरुषों की गर्भनिरोधक गोली और कब तक रहेगा असर?
पुरुषों के लिए एक नई गर्भनिरोधक गोली पर रिसर्च चल रही है, जो सेक्स से पहले ली जा सकेगी और स्पर्म की मूवमेंट को कुछ देर के लिए रोक देगी।

क्या 'मेल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल' बदल देगी फैमिली प्लानिंग का तरीका? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जरा सोचिए, अगर अनचाही प्रेग्नेंसी को रोकने के लिए पुरुषों को संबंध बनाने से ठीक आधा घंटा पहले बस एक गोली लेनी हो, तो कैसा रहेगा? जी हां, यह कोई ख्याली पुलाव नहीं है, बल्कि अमेरिका के 'वेइल कॉर्नेल मेडिसिन' के वैज्ञानिक इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं।
यह प्रयोग फैमिली प्लानिंग की दुनिया में एक बहुत बड़ा बदलाव ला सकता है। सबसे अहम बात यह है कि इससे गर्भनिरोधक की जिम्मेदारी सिर्फ महिलाओं पर नहीं रहेगी, बल्कि पुरुष भी इसमें बराबर का साथ दे सकेंगे। आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि यह गोली कैसे काम करेगी और इसे बाजार तक पहुंचने में अभी क्या अड़चनें हैं।
महिलाओं की गोलियों से बिल्कुल अलग है इसका तरीका
आमतौर पर महिलाओं को जो गर्भनिरोधक गोलियां दी जाती हैं, वे हार्मोन्स में बदलाव करके काम करती हैं, लेकिन पुरुषों की इस नई दवा का फंडा एकदम अलग है। यह स्पर्म के बनने की प्रक्रिया को बिल्कुल नहीं रोकती, बल्कि सिर्फ उनके मूव करने की क्षमता को कुछ देर के लिए सुन्न कर देती है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, स्पर्म को आगे बढ़ने के लिए सॉल्यूबल एडिनाइलील साइक्लेस (sAC) नाम के एक खास एंजाइम की जरूरत होती है। यह दवा इसी एंजाइम को कुछ समय के लिए ब्लॉक कर देती है। नतीजा यह होता है कि स्पर्म गतिहीन हो जाते हैं और अंडे तक नहीं पहुंच पाते। चूहों पर हुए शुरुआती परीक्षण में यह तरीका पूरी तरह कारगर साबित हुआ है।
इस गोली का असर 6 से 8 घंटे तक रह सकता है, लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह अभी सिर्फ एक एक्सपेरिमेंटल दवा है।
क्या इससे हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी फर्टिलिटी?
पुरुषों के मन में सबसे बड़ा डर नसबंदी जैसे स्थायी असर का होता है, लेकिन यह गोली नसबंदी की तरह काम नहीं करती। यह टेस्टीज में स्पर्म के प्रोडक्शन को बंद नहीं करती है।
इसका असर पूरी तरह से अस्थायी है। यानी दवा जब तक शरीर में एक्टिव रहेगी, स्पर्म बनेंगे तो सही, लेकिन वे तैर नहीं पाएंगे। जैसे ही गोली का असर खत्म होगा, सब कुछ पहले की तरह सामान्य हो जाएगा।
मेडिकल स्टोर तक पहुंचने से पहले किन इम्तिहानों से गुजरना होगा?
अक्टूबर 2026 में रिसर्च टीम ने बताया कि उन्हें इंसानों पर ट्रायल शुरू करने से पहले टॉक्सिकोलॉजी और सुरक्षा जांच के लिए एक्स्ट्रा फंडिंग मिली है। इसे आम लोगों तक पहुंचने से पहले कुछ बेहद कड़े पैमानों पर खरा उतरना होगा:
- सेहत से कोई खिलवाड़ नहीं: गर्भनिरोधक दवाएं स्वस्थ लोग खाते हैं। इसलिए वैज्ञानिकों को यह साबित करना होगा कि बार-बार इसके इस्तेमाल से लिवर, किडनी, दिल या यौन क्षमता पर कोई बुरा असर न पड़े।
- इंसानों पर असर: जानवरों पर सफल होने का मतलब यह नहीं कि यह इंसानों पर भी 100% सटीक बैठेगी। क्लिनिकल ट्रायल में यह तय किया जाएगा कि इसकी सही खुराक क्या होगी और असल कपल्स के बीच इसका सक्सेस रेट कितना है।
- स्थिति का सामान्य होना: शोधकर्ताओं को यह भी पक्का करना होगा कि दवा का असर खत्म होने के बाद प्रजनन क्षमता पर कोई स्थायी नुकसान न हो। इसके साइड इफेक्ट्स और ओवरडोज होने की स्थिति का अध्ययन करना भी बाकी है।
क्या महिलाओं की मुश्किलें कम होंगी?
अभी तक महिलाओं को अनचाहे गर्भ से बचने के लिए हार्मोनल पिल्स, इम्प्लांट्स और IUD जैसे तरीकों का सहारा लेना पड़ता है। हालांकि, इनके अपने फायदे हैं, लेकिन कई महिलाओं को इनके साइड इफेक्ट्स झेलने पड़ते हैं।
अगर पुरुषों की यह 30 मिनट वाली गोली सफल हो जाती है, तो कपल्स के पास एक शानदार ऑप्शन आ जाएगा। खासकर उन महिलाओं को बड़ी राहत मिलेगी जिन्हें मौजूदा तरीकों से परेशानी होती है।
याद रखनी चाहिए ये जरूरी बात
भले ही यह दवा अनचाहे गर्भ को रोक ले, लेकिन यह सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन्स (STIs) से नहीं बचा पाएगी। संक्रमण से बचने के लिए आज भी कंडोम ही सबसे सही ऑप्शन रहेगा। इस नई दवा की सफलता सुविधा से कहीं बढ़कर, कपल्स के बीच आपसी भरोसे और जिम्मेदारी को बराबर बांटने पर टिकी है।
(डॉ. अरुणा कालरा, गुरुग्राम के सीके बिड़ला अस्पताल की डायरेक्टर - ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी व रोबोटिक गायनेकोलॉजी, और मेडिकल एडवाइजर हैं)
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