थायरॉइड के मरीजों के लिए खुशखबरी! सर्जरी के बाद अब जीवनभर नहीं खानी पड़ेगी दवा, डॉक्टरों ने खोजी नई तकनीक
थायरॉइड विकार होने पर जीवनभर दवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन एसजी पीजीआइ लखनऊ में हुए एक अध्ययन ने एक नई उम्मीद जगाई है।

थायरॉइड के इलाज में मिली खुशखबरी! (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। थायरॉइड की सर्जरी के बाद जीवनभर हार्मोन और कई मरीजों में कैल्शियम की दवा लेने की मजबूरी अब कम हो सकती है। संजय गांधी पीजीआइ के एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रो. सबारेत्नम मयिलवगनन के नेतृत्व में डायरेक्ट एक्सेस माइक्रोवेव एब्लेशन (डामा) नामक नई हाइब्रिड तकनीक विकसित की गई है।
इस तकनीक का उद्देश्य थायरॉइड का स्वस्थ हिस्सा सुरक्षित रखना है, ताकि मरीज की प्राकृतिक थायरॉइड कार्यक्षमता बनी रहे और उसे जीवनभर हार्मोन रिप्लेसमेंट और कैल्शियम की दवा लेने की जरूरत से यथासंभव बचाया जा सके। यह तकनीक उन मरीजों के लिए विकसित की गई है, जिनके थायरॉइड के दोनों हिस्सों में सौम्य (बेनाइन) गांठें होती हैं। अब तक सात चयनित मरीजों पर इसका सफल उपयोग किया गया है।
सभी आपरेशन तकनीकी और चिकित्सकीय रूप से सफल रहे तथा किसी भी मरीज में कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई। आपरेशन के बाद सभी मरीजों की थायरॉइड कार्यक्षमता सामान्य रही और उपचारित गांठों के आकार में शुरुआती कमी भी दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, पहले ऐसे मरीजों में अक्सर पूरा थायरॉइड निकालना पड़ता था। इससे रोग तो ठीक हो जाता था, लेकिन मरीज को जीवनभर थायरॉइड हार्मोन की दवा लेनी पड़ती थी।
कई मामलों में पैराथायरॉइड ग्रंथियां प्रभावित होने से कैल्शियम की कमी हो जाती थी और लंबे समय तक कैल्शियम की दवा भी लेनी पड़ती थी। इसके अलावा आवाज की नस को नुकसान पहुंचने और अन्य शल्य जटिलताओं का खतरा भी बना रहता था।
क्या है तकनीक
डामा तकनीक में जिस हिस्से में बड़ी या आपरेशन योग्य गांठ होती है, उसे सर्जरी से हटाया जाता है, जबकि दूसरी ओर की सौम्य गांठ को उसी आपरेशन के दौरान माइक्रोवेव एब्लेशन से नष्ट कर दिया जाता है। प्रो. सबारेत्नम ने बताया कि इस प्रक्रिया में थायरॉइड तक सीधी पहुंच मिलने से माइक्रोवेव प्रोब को अत्यंत सटीक स्थान पर लगाया जा सकता है।
इससे आवाज की नस, श्वासनली, आहारनली और प्रमुख रक्त वाहिकाओं जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होती है। उनका कहना है कि प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक हैं, हालांकि तकनीक की दीर्घकालिक प्रभावशीलता के लिए मरीजों का नियमित फॉलो-अप जारी है।
इनकी भी रही भूमिका
डामा तकनीक के विकास में सहायक प्रोफेसर डॉ. रजनी के. साह, डॉ. जगन्नाथ स्पंदना तथा रेजिडेंट डॉ. नम्रता मस्कारा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
डामा तकनीक के प्रमुख फायदे
- एक ही आपरेशन में दोनों ओर की सौम्य थायरॉइड गांठों का इलाज।
- थायरॉइड का स्वस्थ हिस्सा सुरक्षित रखने का प्रयास।
- हार्मोन और कैल्शियम की दवा पर निर्भरता कम होने की संभावना।
- दोबारा बड़ी सर्जरी की जरूरत घट सकती है।
- महत्वपूर्ण नसों और आसपास के अंगों की बेहतर सुरक्षा।
क्या है थायरॉइड ग्रंथि
थायरॉइड ग्रंथि महत्वपूर्ण अंतःस्रावी (एंडोक्राइन) ग्रंथि है, जो हार्मोन बनाकर शरीर की ऊर्जा, वजन, हृदय गति, शरीर के तापमान और मेटाबालिज्म को नियंत्रित करती है। जब यह ग्रंथि कम या ज्यादा हार्मोन बनाने लगती है, तो थायरॉइड विकार हो जाता है।
थायरॉइड ग्रंथि के विकार होने के प्रमुख कारण
- ऑटोइम्यून बीमारी- शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से थायरॉइड पर हमला करने लगती है। इससे हाइपोथायरॉइडिज्म (हाशिमोटो रोग) या हाइपरथायरॉइडिज्म (ग्रेव्स रोग) हो सकता है।
- आयोडीन की कमी या अधिकता- आयोडीन की कमी से थायरॉइड हार्मोन कम बनते हैं, जबकि बहुत अधिक आयोडीन भी कुछ लोगों में समस्या पैदा कर सकता है।
- आनुवंशिक कारण- परिवार में थायरॉइड रोग होने पर जोखिम बढ़ जाता है।
- थायरॉइड में गांठ (नोड्यूल) या सूजन (थायरॉइडाइटिस)।
- कुछ दवाएं, जैसे लिथियम या एमियोडेरोन।
- रेडिएशन थेरेपी या गर्दन के क्षेत्र में विकिरण।
- गर्भावस्था और प्रसव के बाद हार्मोनल बदलाव।
- बढ़ती उम्र, विशेषकर महिलाओं में।
बचाव के लिए जरूरी उपाय
- संतुलित आहार लें और आयोडीन युक्त नमक का उचित मात्रा में सेवन करें।
- सेलेनियम, जिंक, आयरन और विटामिन-डी जैसे पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा लें।
- नियमित व्यायाम करें। रोज 30-45 मिनट तेज चाल से चलना या अन्य शारीरिक गतिविधि लाभदायक है।
- तनाव कम करें। योग, ध्यान और पर्याप्त नींद तनाव नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
- धूमपान और तंबाकू से बचें, क्योंकि ये थायरॉइड रोगों का खतरा बढ़ा सकते हैं।
- बिना डॉक्टर की सलाह के आयोडीन या अन्य सप्लीमेंट न लें।
- वजन नियंत्रित रखें और संतुलित जीवनशैली अपनाएं।
- परिवार में थायरॉइड का इतिहास हो, गर्भावस्था हो या लक्षण दिखाई दें, तो समय-समय पर थायरॉइड की जांच (टीएसएच, टी3, टी4) कराएं।
लक्षण
- तेजी से वजन घटना
- दिल की धड़कन का तेज होना
- बहुत अधिक पसीना आना और गर्मी लगना
- हाथ कांपना और घबराहट होना
- गुस्सा आना या मूड बदलना
(प्रस्तुति - विकास मिश्र, कुमार संजय लखनऊ से)
