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दूसरों के दुख में ज्यादा दुखी होना भी है एक मुसीबत! समझें क्या है 'सेकंड हैंड स्ट्रेस' और कैसे बचें इससे

Published: Sat, 11 Jul 2026 03:00 PM (IST)

तनाव सभी की जिंदगी का कुछ इस तरह हिस्सा बन चुका है, मानो कोई परिवार का सदस्य हो।

सेकंड हैंड स्ट्रेस बड़ी मुसीबत बन सकता है (Image Source: AI Generated)

सेकंड हैंड स्ट्रेस बड़ी मुसीबत बन सकता है (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। तनाव सभी की जिंदगी का कुछ इस तरह हिस्सा बन चुका है, मानो कोई परिवार का सदस्य हो। हम चाहकर भी इससे पूरी तरह से छुटकारा नहीं पा सकते। किसी को पढ़ाई की टेंशन तो किसी को नौकरी या घर के किसी मसले की टेंशन। लेकिन क्या आपने कभी सेकंड हैंड स्ट्रेस के बारे में सुना है? आप सोच रहे होंगे कि सेकंड हैंड चीजें तो होती हैं, पर यह सेकंड हैंड स्ट्रेस क्या बला है, आइए आपको बताते हैं। 

क्या है सेकंड हैंड स्ट्रेस?

स्ट्रेस एक पर्सनल इशू है जिसका समाधान व्यक्ति को खुद निकालना है। जबकि सेकंड हैंड स्ट्रेस दूसरों से मिलने वाला तनाव है। जब कोई व्यक्ति अपने आसपास के लोगों की इमोशनल स्टेट एब्जॉर्ब करने लगता है तो ऐसी कंडीशन को सेकंड हैंड स्ट्रेस कहा जाता है। अपने दोस्त की किसी परेशानी को सुनना और फिर उसको लेकर एम्पथी का जागना स्ट्रेस की वजह बनता है। हम अपने काम छोड़कर उनकी परेशानी को लेकर ज्यादा सोचने लगते हैं। 

सेकंड हैंड स्ट्रेस के कारण 

सहानुभूति और समानुभूति की ज्यादा भावना 

जिन लोगों में दूसरों को एकर सहानुभूति और समानुभूति वाली भावना ज्यादा होती है, वो हल्दी दूसरों की चिंताओं को लेकर परेशान रहने लगते हैं। 

तनाव वाला वातावरण 

ऑफिस या घर का तनाव वाला वातावरण भी स्ट्रेस बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होता है। फिर चाहे व्यक्ति उसमें सीधे तौर पर शामिल हो या फिर नहीं। 

लोगों से नजदीक के रिश्ते 

अपने करीबी लोगों की परेशानी सुनना कोई बुरी बात नहीं है, पर उनकी परेशानी को अपनी समझकर बराबर तनाव लेने लगना स्ट्रेस को डबल कर देता है। 

सोचने-समझने का तरीका 

सोचने-समझने का नेगेटिव पैटर्न या फिर स्ट्रेस वाली स्थिति को गलत तरह से लेना भी सेकंड हैंड स्ट्रेस का कारण बनता है।  

कैसे डील करें? 

  1. सेल्फ केयर के लिए सबसे पहले लोगों को उतनी ही प्राथमिकता दें, जितनी वो आपको देते हैं। इसके अलावा, हेल्दी डाइट, एक्सरसाइज और पर्याप्त नींद भी जरूरी है। 

  2. लोगों को ना कहना भी सीखना होगा, जब भी ऐसा लगे कि आप किसी बात नहीं सुन सकते हैं तो उन्हें ना कहने में कोई बुराई नहीं। 

  3. इस तरह के स्ट्रेस को पहचानकर अपने क्लोज लोगों से हेल्प लेने में भी न झिझकें। ऐसा करना मेंटल हेल्थ को ठीक रखने के लिए बहुत जरूरी है।