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45 मिनट तक नाना पाटेकर को दिया गया था CPR, आखिर क्या होता है Cardiac Arrest और क्यों है इतना खतरनाक?

Published: Thu, 08 Oct 2026 09:02 AM (IST)

बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया, 45 मिनट तक सीपीआर के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

75 की उम्र में Cardiac Arrest ने ली नाना पाटेकर की जान (Image Source: AI-Generated)

75 की उम्र में Cardiac Arrest ने ली नाना पाटेकर की जान (Image Source: AI-Generated)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गुरुवार की सुबह फिल्म जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर लेकर आई है। दरअसल, बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 साल की उम्र में उन्हें कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) का सामना करना पड़ा।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मेडिकल टीम ने लगातार 45 मिनट तक सीपीआर देकर उनकी सांसें वापस लाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें बचाया नहीं जा सका।

इस दुखद खबर ने हर किसी को झकझोर दिया है और एक बार फिर हमारा ध्यान उस जानलेवा खतरे की तरफ ध्यान खींचा है, जो बिना कोई चेतावनी दिए हमला करता है। आइए समझते हैं कि कार्डियक अरेस्ट क्या है और आपात स्थिति में किसी की जान कैसे बचाई जा सकती है।

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या फर्क है?

अक्सर हम इन दोनों कंडीशन को एक ही मान लेते हैं, जबकि इनमें बहुत बड़ा अंतर है। जी हां, हार्ट अटैक तब आता है जब दिल की नसों में ब्लॉकेज के कारण खून का बहाव रुक जाता है। वहीं, कार्डियक अरेस्ट दिल के 'इलेक्ट्रिकल सिस्टम' की खराबी है। इसमें दिल की धड़कन अचानक बेतरतीब हो जाती है और दिल शरीर में खून पंप करना पूरी तरह बंद कर देता है। हालांकि, यह भी सच है कि हार्ट अटैक के कारण हृदय की इलेक्ट्रिकल कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है, जो आगे चलकर कार्डियक अरेस्ट का रूप ले सकती है।

बिना आहट के आता है यह खतरा

कार्डियक अरेस्ट का सबसे खौफनाक पहलू यह है कि यह अक्सर बिना किसी चेतावनी के आता है। इसके तुरंत दिखने वाले लक्षणों में शामिल हैं:

  • इंसान का अचानक गिरकर बेहोश हो जाना।
  • पल्स का न मिलना और सांसों का रुक जाना।

कुछ गिने-चुने मामलों में इसके आने से पहले सीने में अजीब सी बेचैनी, सांस फूलना, कमजोरी या दिल की धड़कन का बहुत तेजी से फड़फड़ाना महसूस हो सकता है।

किसे है इसका सबसे ज्यादा जोखिम?

जिन लोगों को पहले हार्ट अटैक आ चुका है या जिनके परिवार में दिल की बीमारियों का इतिहास रहा है, वे इसके अधिक शिकार होते हैं। इसके अलावा दिल का आकार बढ़ना, जन्मजात हृदय दोष, और कोरोनरी आर्टरी डिजीज इसके मुख्य कारण हैं। हमारी खराब जीवनशैली भी इस खतरे को न्योता देती है। हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ता कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, डायबिटीज, धूम्रपान की आदत, शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना और बढ़ती उम्र इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं।

आपात स्थिति में क्या करें?

जब किसी का दिल धड़कना बंद कर देता है, तो दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। ऐसे में हर एक सेकंड कीमती होता है। अगर आपके सामने कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए और उसकी सांसें रुक जाएं, तो घबराएं नहीं बल्कि तुरंत ये कदम उठाएं:

  • मदद बुलाएं: सबसे पहले स्थानीय इमरजेंसी सेवाओं या एम्बुलेंस को कॉल करें।
  • सीपीआर शुरू करें: मेडिकल टीम के पहुंचने तक बिना रुके मरीज की छाती के बीच में जोर से और तेजी से दबाव डालें। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, एक मिनट में 100 से 120 बार छाती को दबाना चाहिए।
  • एईडी का इस्तेमाल: अगर आसपास किसी मॉल या सार्वजनिक जगह पर एईडी मशीन मौजूद है, तो उसका इस्तेमाल करें। यह मशीन दिल को एक बिजली का झटका देकर उसकी धड़कन को दोबारा शुरू करने में मदद करती है।

Source: Mayo Clinic

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