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मामूली सी चोट और टूट गई हड्डी? शरीर में चुपके से पैर पसार सकता है ऑस्टियोपोरोसिस, ऐसे करें पहचान

By Dr. Arun GuptaEdited By: Swati Sharma
Published: Tue, 20 Oct 2026 11:13 AM (IST)

ऑस्टियोपोरोसिस एक 'साइलेंट डिजीज' है जिसके शुरुआती लक्षण नहीं दिखते, जिससे मामूली चोट से फ्रैक्चर होने पर ही इसका पता चलता है।

साइलेंट डिजीज है ऑस्टियोपोरोसिस (Picture Courtesy: Freepik)

साइलेंट डिजीज है ऑस्टियोपोरोसिस (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर साइलेंट डिजीज कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि शुरुआती स्टेज में इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। इसलिए अक्सर लोगों को अंदाजा नहीं होता कि उनकी हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर हो रही हैं। 

यही वजह है कि कई लोगों को इस बीमारी के बारे में पता तब लगता है, जब एक मामूली चोट के कारण फ्रैक्चर होता है। आइए जानें कि क्यों फ्रैक्चर होने से पहले तक ऑस्टियोपोरोसिस का पता नहीं चलता। 

हड्डियां कमजोर होने के कारण

आमतौर पर, बढ़ती उम्र के साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, लेकिन ऑस्टियोपोरोसिस इस प्रक्रिया को और तेज कर देता है। इस वजह से बोन डेंसिटी कम होने लग जाती है। ये समस्या बुढ़ापे में या महिलाओं में मेनोपॉज के बाद काफी तेजी से विकसित हो सकती है, क्योंकि इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। 

ये समझना भी जरूरी है कि ये बीमारी सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। खराब पोषण, सुस्त लाइफस्टाइल और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के कारण कम उम्र में भी लोग इस समस्या का शिकार हो सकते हैं। 

बिना दर्द के बढ़ता खतरा

ऑस्टियोपोरोसिस की सबसे खतरनाक बात है कि जब तक कोई फ्रैक्चर न हो, तब तक इसमें कोई दर्द महसूस नहीं होता। मरीजों को आमतौर पर कूल्हे, कलाई या रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होता है। ऐसे फ्रैक्चर व्यक्ति की चलने-फिरने की क्षमता को सीमित कर देते हैं और उन्हें दूसरों पर निर्भर बना सकते हैं।  

रीढ़ की हड्डी में होने वाले फ्रैक्चर से पीठ में तेज दर्द हो सकता है। साथ ही, व्यक्ति की लंबाई घटने लगती है और उसके उठने-बैठने का पोश्चर बदल जाता है।  

समय पर जांच और पहचान ही सबसे बड़ा बचाव

ऑस्टियोपोरोसिस से बचने का सबसे असरदार तरीका है इसकी समय पर पहचान करना। जिन लोगों में ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा ज्यादा होता है, उन्हें अपनी हड्डियों की मजबूती जांचने के लिए डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। 

इसके लिए DEXA टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट की मदद से फ्रैक्चर होने से पहले ही हड्डियों की डेंसिटी का पता लग जाता है। 

मजबूत हड्डियों के लिए जरूरी टिप्स

  • अपनी डाइट में कैल्शियम और विटामिन-डी को सही मात्रा में शामिल करें। 
  • वेट बियरिंग एक्सरसाइज को अपने वर्कआउट का हिस्सा बनाएं।
  • स्मोकिंग और शराब से पूरी तरह परहेज करें। 

(डॉ. अरुण गुप्ता, डायरेक्टर, ऑर्थोपेडिक्स एंड ट्रामा सेंटर, यथार्थ सुपर स्पेशेलिटी हॉस्पिटल, आगरा)