9 घंटे की डेस्क जॉब बना रही है हड्डियों को खोखला! 30 की उम्र में की ये भूल तो 70 में चलना होगा मुश्किल
लंबे समय तक डेस्क जॉब में बैठने से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ता है।

आप भी घंटों डेस्क के सामने बैठकर बिताते हैं दिन? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सुबह उठकर ऑफिस जाना, लगातार नौ घंटे कुर्सी पर बैठना, घर लौटकर सोफे पर सुस्ताना और फिर सो जाना, ज्यादातर लोगों का दिन इसी तरह बीतता है। ऑफिस में हमारा दिमाग भले ही एक्टिव रहता है, लेकिन हमारी मांसपेशियों और हड्डियों को वो स्टिमुलेशन नहीं मिल पाता, जिसकी उन्हें जरूरत होती है।
हमारी हड्डियां लंबे समय तक इनएक्टिव रहने के लिए नहीं बनी हैं। हड्डियां लिविंग स्ट्रक्चर हैं, जो शरीर पर पड़ने वाले दबाव के हिसाब से खुद को ढालती हैं। इसलिए फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण हड्डियां कमजोर होने लगती हैं।
हड्डियों को मजबूत रखने का नियम
जब आप चलते हैं, सीढ़ियां चढ़ते हैं या वजन उठाने वाली एक्सरसाइज करते हैं, तो आपकी हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। इसे बोन रिमॉडलिंग कहा जाता है, जिसमें हड्डियों के पुराने टिश्यू हटते हैं और नए बनते हैं।
लंबे समय तक बैठे रहने से ये प्रक्रिया धीमी हो जाती है। यहां ये समझना जरूरी है कि सिर्फ बैठने से ऑस्टियोपोरोसिस नहीं होता, बल्कि लाइफस्टाइल में फिजिकल एक्टिविटी की जगह कुर्सी पर बैठकर समय बिताना मुख्य समस्या है।
मांसपेशियां देती हैं पहली चेतावनी
ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर साइलेंट डिजीज कहा जाता है, क्योंकि हड्डियों का लॉस बिना किसी दर्द के होता है। हालांकि, मांसपेशियां कमजोर होने का संकेत पहले ही दे देती हैं। सीढ़ियां चढ़ते समय जल्दी थक जाना, देर तक खड़े होने में परेशानी, लंबे कामकाजी दिन के बाद पीठ के निचले हिस्से में दर्द या अकड़न इसके कुछ संकेत हो सकते हैं।
जब मांसपेशियां कमजोर होती हैं, तो गिरने का खतरा बढ़ जाता है और कमजोर हड्डियों वाले व्यक्ति के लिए गिरना फ्रैक्चर का कारण बन सकता है।
30 की उम्र में तय होती है 70 की उम्र की चाल
ज्यादातर लोग रिटायरमेंट के बाद हड्डियों की सेहत पर ध्यान देते हैं, लेकिन हड्डियों का बोन मास अडल्टहुड की शुरुआत में ही तक ही हासिल हो पाता है। घंटों बैठकर काम करने की आदत के साथ कैल्शियम व विटामिन-डी की कमी और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग न करना हड्डियों को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। भारत में ये समस्या काफी देखने को मिल रही है। इसलिए 30 की उम्र की आदतें ही आपके भविष्य के बोन हेल्थ को तय करती हैं।
क्या एक घंटे जिम करना काफी है?
अगर आप रोज 45 मिनट वर्कआउट करते हैं, लेकिन बाकी 10 घंटे लगातार बैठे रहते हैं, तो भी आपको बीच-बीच में टहलने की जरूरत है। शॉर्ट वॉकिंग ब्रेक्स फिजिकल इनएक्टिविटी से ब्रेक देते हैं, लेकिन मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जरूरी है।
ये बदलाव लाएंगे सुधार
- काम के दौरान हर 30-60 मिनट में खड़े हों। फोन पर बात करते समय टहलें या लंच के बाद थोड़ी वॉक करें।
- पैदल चलना दिल के लिए अच्छा हैस लेकिन मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए स्क्वॉट्स, वेट लिफ्टिंग या रेजिस्टेंस बैंड का इस्तेमल करें।
- सही कुर्सी का इस्तेमाल करें, सही पोश्चर रखें और कोर मसल्स के लिए एक्सरसाइज करें।
- डाइट में कैल्शिम, विटामिन-डी और भरपूर मात्रा में प्रोटीन शामिल करें। बेवजह सप्लीमेंट्स लेने के बजाय सही डाइट पर ध्यान दें।
- मेनोपॉज के बाद महिलाओं, बुजुर्गों और क्रॉनिक बीमारियों वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से बोन-डेंसिटी टेस्ट कराना चाहिए।
