विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

क्या एक खुराक काफी नहीं, 5 साल से कम उम्र के बच्चों को बार-बार पोलियो ड्रॉप्स पिलाना क्यों है बेहद जरूरी?

By Dr. Aparna ChakravortyEdited By: Swati Sharma
Published: Wed, 21 Oct 2026 03:30 PM (IST)

पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बार-बार पोलियो ड्रॉप्स देना जरूरी है।

पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जरूरी है पोलियो ड्रॉप्स लेना (AI Generated Image)

पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जरूरी है पोलियो ड्रॉप्स लेना (AI Generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पोलियो एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जो किसी भी बच्चे की जिंदगी को चंद दिनों में हमेशा के लिए बदल सकती है। एक हंसता-खेलता बच्चा अचानक मांसपेशियों की कमजोरी का शिकार हो सकता है और गंभीर मामलों में पैरालाइसिस भी हो सकता है, जो कभी ठीक नहीं होता। 

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के आंकड़ों के मुताबिक, पोलियो से प्रभावित हर 200 में से एक बच्चे में ऐसा पैरालाइसिस हो जाता है, जिसे ठीक नहीं किया जा सकता। वहीं, जब ये वायरस सांस लेने में मदद करने वाली मांसपेशियों पर असर डालता है, तो ऐसे बच्चों में से 5 से 10 प्रतिशत की मौत तक हो जाती है। इसलिए 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पोलियो वैक्सीन की दो बूंदे जीवन रक्षक कवच की तरह होती हैं। 

5 साल तक के बच्चे ही क्यों हैं निशाने पर?

पांच साल से कम उम्र के बच्चों में इन्फेक्शन से लड़ने के लिए इम्युनिटी विकसित हो रही है, पूरी तरह से विकसित नहीं हुई होती है। इसलिए वे बहुत आसानी से इस वायरस का शिकार हो जाते हैं। इसलिए भारत का पल्स पोलियो कार्यक्रम इस उम्र के बच्चों को प्राथमिकता देता है। इस कैंपेन के तहत 5 साल तक के हर बच्चे को ओरल पोलियो वैक्सीन की खुराक दी जाती है। 

शरीर में कैसे असर करती हैं पोलियो की दो बूंदें?

पोलियो का वायरस खाने, गंदे पानी या संक्रमित मल के जरिए शरीर में आता है। शरीर में पहुंचने के बाद ये वायरस सबसे पहले आंतों में अपनी संख्या बढ़ाता है और फिर खून में मिलकर नर्वस सिस्टम पर हमला कर देता है। ओरल पोलियो वैक्सीन में बहुत ही सावधानी के साथ कमजोर किए गए पोलियो वायरस होते हैं। जब ये खुराक बच्चों को दी जाती है, तो ये आंतों की म्यूकोसल इम्युनिटी को मजबूत करती है, जिससे शरीर इनके खिलाफ एंटीबॉडीज बनाने लगता है। ये वैक्सीन बच्चे को तो इस खतरनाक बीमारी से बचाती ही है। साथ ही, समाज में इस बीमारी को फैलने से भी रोकने में मदद करती है। 

बार-बार पोलियो ड्रॉप्स पिलाना क्यों है जरूरी?

कई बार माता-पिता ये सवाल पूछते हैं कि जब बच्चे को पहले खुराक दी जा चुकी है, तो उसे बार-बार पोलियो ड्रॉप्स क्यों पिलाई जाती है। इसका जवाब इम्युनिटी बनाने के तरीके में छिपा है। खान-पान, वातावरण और दूसरे कारणों से बच्चे की इम्युनिटी बनने में दर अलग हो सकती है। बार-बार खुराक देने से बच्चे के शरीर में एक मजबूत और लंबे समय तक टिकने वाला सुरक्षा कवच बन जाता है।  

ड्रॉप्स और इंजेक्शन, दोनों क्यों जरूरी हैं? 

पोलियो की वैक्सीन दो तरह की होती है और दोनों एक-दूसरे की मदद करते हैं। ओरल पोलियो वैक्सीन आंतों में इम्युनिटी बढ़ाती है, जिससे वायरस फैलने का खतरा कम होता है। वहीं, इंजेक्टेबल वैक्सीन शरीर की इम्युनिटी को मजबूत बनाकर पैरालाइसिस से बचाती है। इसलिए बच्चों को दोनों वैक्सीन दिलवाना जरूरी है। 

भारत पोलियो फ्री, फिर क्यों सावधानी? 

भारत एक पोलियो मुक्त देश है, लेकिन दुनिया से ये बीमारी खत्म नहीं हुई है। इंटरनेशनल ट्रैवल और दुनिया के कुछ हिस्सों में संक्रमण के कारण इसका खतरा बना रहता है। साथ ही, ओरल पोलियो वैक्सीन काफी सुरक्षित और असरदार है, लेकिन फिर भी कुछ गिने-चुने मामलों में कमजोर वायरस की वजह से इम्युनिटी ठीक तरह से बन नहीं पाती। इसलिए अपने 5 साल से कम उम्र के बच्चे को हर पोलियो अभियान के दौरान खुराक जरूर पिलाएं।

(डॉ. अपर्णा चक्रवर्ती, प्रोफेसर, पीडियाट्रिक इन्फेक्शियस डिजीज, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद)