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न वैक्सीन, न कोई दवा! Ebola के नए स्ट्रेन ने बढ़ाई WHO की टेंशन, क्या आने वाली है नई महामारी?

Published: Mon, 18 May 2026 08:23 AM (IST)

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में फैले इबोला के नए प्रकोप को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित कर दिया है।

कैसे चुपके से शरीर पर वार करता है इबोला वायरस? (Image Source: AI-Generated)

कैसे चुपके से शरीर पर वार करता है इबोला वायरस? (Image Source: AI-Generated) 

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अफ्रीका के कुछ हिस्सों में एक बार फिर से एक जानलेवा वायरस ने सिर उठा लिया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को इसे "अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल" घोषित करना पड़ा है।

दरअसल, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इबोला के नए मामले बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन क्या यह वायरस एक नई वैश्विक महामारी बनने वाला है, और क्या हमारे पास इसका कोई पक्का इलाज मौजूद है? आइए इस आर्टिकल में डिटेल में समझते हैं।

new Ebola strain 2026

(Image Source: AI-Generated) 

अभी कैसे हैं जमीनी हालात?

16 मई तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो कांगो के इटुरी प्रांत में इबोला के 246 संदिग्ध मामले मिल चुके हैं और 80 लोगों की जान जाने का अंदेशा है। बीमारी अब सिर्फ छोटे इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि कांगो के किंशासा और युगांडा की राजधानी कंपाला जैसे बड़े शहरों में भी इसके पुख्ता मामले सामने आ चुके हैं।

हालांकि, WHO के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने थोड़ी राहत देते हुए कहा है कि अभी यह स्थिति 'महामारी' जैसी नहीं है, लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि अगर दुनिया भर के देशों ने मिलकर काम नहीं किया, तो हालात बिगड़ सकते हैं।

सबसे बड़ा डर है इलाज की कमी

कांगो के स्वास्थ्य मंत्री ने एक ऐसी बात कही है जिसने सबकी चिंता बढ़ा दी है। उनके मुताबिक, इस बार इबोला का जो स्ट्रेन लोगों को बीमार कर रहा है, उसका कोई भी वैक्सीन या खास इलाज दुनिया में उपलब्ध नहीं है। इसमें मरीजों की मृत्यु दर 50% तक जा सकती है।

दरअसल, विज्ञान ने इबोला से लड़ने के लिए जो भी वैक्सीन (जैसे Ervebo, Zabdeno) और दवाइयां बनाई हैं, वे इबोला के पुराने Zaire स्ट्रेन पर तो काम करती हैं, लेकिन इस नए Bundibugyo स्ट्रेन के आगे बेअसर हैं। दवाइयां न होने की वजह से डॉक्टर सिर्फ मरीजों को सपोर्टिव केयर दे पा रहे हैं, यानी मरीज के शरीर में पानी और ऑक्सीजन की कमी न होने देना और उनका ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखना। 

Ebola outbreak

(Image Source: AI-Generated) 

कैसे फैलता है यह वायरस?

इबोला मूल रूप से जानवरों की बीमारी है जो इंसानों में आ गई है। माना जाता है कि कुछ खास तरह के चमगादड़ इस वायरस को अपने अंदर लेकर चलते हैं। जब कोई इंसान संक्रमित जानवर के खून या शरीर के किसी भी तरल पदार्थ के संपर्क में आता है, तो यह बीमारी उसे जकड़ लेती है।

इंसानों के बीच यह बीमारी हवा से नहीं फैलती। यह तभी फैलती है जब कोई स्वस्थ व्यक्ति किसी इबोला मरीज या इस बीमारी से मरे हुए व्यक्ति के खून, मल, उल्टी या दूषित चीजों को सीधे छू लेता है। यही वजह है कि बिना सुरक्षा उपकरणों के इलाज करने वाले डॉक्टर और अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोग सबसे ज्यादा खतरे में रहते हैं। अच्छी बात यह है कि जब तक मरीज में बीमारी के लक्षण न दिखें, तब तक वह वायरस नहीं फैला सकता।

is Ebola a pandemic threat

(Image Source: AI-Generated)

कैसे शरीर को खोखला करता है इबोला?

इबोला का वायरस शरीर में घुसने के बाद अपना असर दिखाने में 2 से 21 दिन का समय ले सकता है। शुरुआत में तेज बुखार, थकान, सिरदर्द और गले में दर्द होता है। ये लक्षण बिल्कुल मलेरिया या टाइफाइड जैसे लगते हैं, इसलिए डॉक्टर भी शुरुआत में धोखा खा जाते हैं और बीमारी पकड़ में नहीं आती।

धीरे-धीरे यह वायरस अपना असली रंग दिखाता है। मरीज को उल्टियां, डायरिया, पेट दर्द और शरीर पर रैशेज होने लगते हैं। कई बार लिवर और किडनी भी काम करना बंद कर देते हैं। लोग अक्सर मानते हैं कि इबोला में शरीर से खून बहने लगता है, लेकिन ऐसा हर मरीज में नहीं होता और यह बहुत बाद के चरणों में दिखाई देता है। इसका असर मरीज के दिमाग पर भी पड़ता है, जिससे वह भ्रम में रहने लगता है या आक्रामक हो जाता है।

'बचाव' ही है एकमात्र हथियार

इबोला का इतिहास बेहद डरावना रहा है। 2013 से 2016 के बीच पश्चिमी अफ्रीका में आए इसके प्रकोप ने 11,000 से ज्यादा लोगों की जान ली थी। आज जब इस नए 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन की कोई दवा नहीं है, तो बचाव ही सबसे बड़ा हथियार है।

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कांगो के जिन इलाकों में यह बीमारी है, वहां लोगों का आना-जाना बहुत ज्यादा है और संघर्ष वाले इलाकों में मेडिकल टीमों का पहुंचना मुश्किल होता है। ऐसे में समुदायों को जागरूक करना, संक्रमित लोगों को तुरंत अलग करना और शवों का सुरक्षित तरीके से अंतिम संस्कार करना ही वह अकेला रास्ता है, जिससे इस जानलेवा वायरस को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।

Reference:

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