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कांगो-युगांडा में ईबोला का प्रकोप, 88 लोगों की मौत; WHO ने की हेल्थ इमरजेंसी घोषित

Published: Sun, 17 May 2026 09:06 PM (GMT+05:30)

डब्ल्यूएचओ ने कांगो और युगांडा में 300 से अधिक संदिग्ध मामलों और 88 मौतों के बाद इबोला प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।

ईबोला से 88 मौतें

ईबोला से 88 मौतें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनोम घेब्रेयेसस ने रविवार को कांगो और उगांडा में ईबोला रोग के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया, जब 300 से अधिक संदिग्ध मामले और 88 मौतें सामने आईं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक पोस्ट में कहा कि यह प्रकोप कोविड-19 की वैश्विक महामारी की तरह महामारी आपातकाल के मानदंडों को पूरा नहीं करता है और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को बंद करने के खिलाफ सलाह दी।

ईबोला से 8 मौतें

ईबोला अत्यधिक संक्रामक है और इसे शरीर के तरल पदार्थों जैसे कि उल्टी, रक्त या वीर्य के माध्यम से फैलाया जा सकता है। यह जो बीमारी उत्पन्न करता है, वह दुर्लभ है, लेकिन गंभीर और अक्सर घातक होती है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वर्तमान प्रकोप बंडिबुग्यो वायरस के कारण है, जो ईबोला रोग का एक दुर्लभ रूप है, जिसके लिए कोई स्वीकृत उपचार या वैक्सीन नहीं है। हालांकि कांगो और युगांडा में 20 से अधिक ईबोला प्रकोप हो चुके हैं, लेकिन यह केवल तीसरी बार है जब बंडिबुग्यो वायरस की सूचना दी गई है।

डब्ल्यूएचओ ने कहा कि कांगो में सभी मामलों में से केवल दो ही ऐसे हैं जो पड़ोसी युगांडा में रिपोर्ट किए गए हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को कांगो के पूर्वी प्रांत इटुरी में, जो युगांडा और दक्षिण सूडान के करीब है, बीमारी के फैलने की सूचना दी। अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने 336 संदिग्ध मामलों और 88 मौतों की सूचना दी।

(समाचार एजेंसी एपी के इनपुट के साथ)

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