नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। डायबिटीज एक लाइलाज बीमारी है। इस बीमारी में रक्त में शर्करा स्तर बढ़ जाता है। वहीं, अग्नाशय से इंसुलिन हार्मोन निकलना बंद हो जाता है। ऐसी स्थिति टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के साथ होती है। जबकि, टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों के अग्नाशय से इंसुलिन हार्मोन (कम) निकलता है। टाइप 1 की तुलना में टाइप 2 अधिक खतरनाक है। इसके लिए डायबिटीज के मरीजों को मीठा खाने की मनाही होती है। इसके अलावा, खानपान और वर्कआउट पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अगर आप भी डायबिटीज के मरीज हैं और ब्लड शुगर कंट्रोल करना चाहते हैं, तो कैनोला तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। कई शोध में खुलासा हो चुका है कि कैनोला तेल शुगर कंट्रोल करने में कारगर साबित होता है। आइए जानते हैं-

रिसर्च गेट पर छपी एक शोध में कैनोला तेल पर गहन शोध किया गया है। इस शोध में 50 लोगों को शामिल किया गया था। इन लोगों को 8 हफ्ते तक कैनोला तेल युक्त दवा खाने की सलाह दी गई है। आसान शब्दों में कहें तो रोजाना 15 mL कैनोला तेल सेवन करने की सलाह दी गई। इस दौरान व्यक्ति का शुगर, रक्तचाप को मापा गया। 8 हफ्ते बाद जब शुगर की जांच की गई, तो शुगर स्तर में सुधार पाया गया। इस शोध से खुलासा हुआ है कि कैनोला तेल शुगर कंट्रोल करने में सक्षम है।

इसके अलावा,  2014 की एक शोध में बताया गया है कि कैनोला तेल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी फायदेमंद साबित हो सकता है। इस शोध में टाइप 2 डायबिटीज के 141 मरीजों को शामिल किया गया था। इस शोध में यह पाया गया है कि कैनोला तेल युक्त रोटी खाने से "खराब" कोलेस्ट्रॉल की मात्रा 20mg कम हो जाती है। साथ ही हृदय संबंधी रोग अथवा स्ट्रोक से पीड़ित मरीजों को खतरा 7% कम हो जाता है।

डिस्क्लेमर: स्टोरी के टिप्स और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन्हें किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर नहीं लें। बीमारी या संक्रमण के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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