बॉडी बनाने वाला क्रिएटिन क्या दिमाग भी तेज कर सकता है? जानिए बिना डॉक्टरी सलाह इसे लेना सही है या नहीं
मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने वाला क्रिएटिन सप्लीमेंट अब मानसिक सेहत के लिए भी चर्चा में है।

जिम का मशहूर सप्लीमेंट 'क्रिएटिन' अब मेंटल हेल्थ के लिए भी चर्चा में (Image Source: AI-Generated)
HighLights
क्रिएटिन का मांसपेशियों के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव
डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने और याददाश्त सुधारने में मदद
मानसिक लाभों को साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण अभी नहीं
द कन्वर्सेशन, लंदन। आमतौर पर मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने और खेल प्रदर्शन बेहतर करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला क्रिएटिन सप्लीमेंट अब मानसिक सेहत के लिहाज से भी चर्चा में है। हालिया शोधों में संकेत मिले हैं कि यह डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने और याददाश्त बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी इसके मानसिक स्वास्थ्य संबंधी फायदों को साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के इंटेंसिव केयर मेडिसिन के प्रोफेसर जुडिन पुथुचेरी के अनुसार, क्रिएटिन एक ऐसा पदार्थ है, जो शरीर में प्राकृतिक रूप से बनता है। यह मांस और कुछ मछलियों जैसे सैल्मन, टूना और काड में भी पाया जाता है। शरीर में इसका मुख्य काम ऊर्जा उपलब्ध कराना है। इसका अधिकांश हिस्सा मांसपेशियों में जमा रहता है, जबकि थोड़ी मात्रा मस्तिष्क में भी होती है।
दिमाग को ऊर्जा देने में मददगार
मस्तिष्क शरीर के कुल वजन का करीब दो प्रतिशत होता है, लेकिन यह शरीर की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा इस्तेमाल करता है। खासकर जटिल सोच और मानसिक गतिविधियों के दौरान इसे अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, मस्तिष्क में ऊर्जा की कमी से मूड नियंत्रित करने वाले रसायनों पर असर पड़ सकता है। इसका संबंध डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर और सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक समस्याओं से भी माना जाता है। डिप्रेशन से पीड़ित लोगों के मस्तिष्क के अगले हिस्से में क्रिएटिन का स्तर कम पाया गया है।
डिप्रेशन में मिले मिले-जुले नतीजे
करीब 40 साल पहले वैज्ञानिकों ने आत्महत्या के विचारों और शरीर में क्रिएटिन के कम स्तर के बीच संबंध पाया था। बाद के अध्ययनों में अधिक क्रिएटिन लेने वाले लोगों में डिप्रेशन की दर कम देखी गई। कुछ शोधों में डिप्रेशन से पीड़ित किशोरों और बाइपोलर डिसआर्डर के मरीजों को सामान्य दवाओं के साथ क्रिएटिन देने पर लक्षणों में सुधार पाया गया। हालांकि, पांच परीक्षणों और 238 मरीजों पर आधारित हालिया समीक्षा में केवल दो अध्ययनों में फायदा मिला, जबकि तीन में ऐसा कोई लाभ नहीं दिखा। सभी परीक्षण छोटे थे और उनमें क्रिएटिन की मात्रा तथा इस्तेमाल की अवधि भी अलग-अलग थी।
सप्लीमेंट लेने की सलाह नहीं
इन अध्ययनों में प्रतिभागियों की संख्या कम होने के कारण क्रिएटिन को मानसिक बीमारियों का इलाज मानना जल्दबाजी होगी। यह भी स्पष्ट नहीं है कि मस्तिष्क के लिए इसकी सही खुराक कितनी होनी चाहिए और कितने समय तक इसका सेवन सुरक्षित है। फिलहाल संतुलित आहार के जरिए पर्याप्त क्रिएटिन लेना बेहतर है। मानसिक सेहत सुधारने के लिए बिना चिकित्सकीय सलाह के इसे सप्लीमेंट के रूप में शुरू नहीं करना चाहिए।
नींद और याददाश्त पर भी असर
15 स्वस्थ लोगों पर हुए एक छोटे अध्ययन में करीब 25 ग्राम क्रिएटिन की एक खुराक का परीक्षण किया गया। इसमें नींद की कमी के बाद क्रिएटिन लेने वाले लोगों की अल्पकालिक याददाश्त, प्रतिक्रिया की गति और जानकारी समझने की क्षमता में सुधार देखा गया।
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