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रोज कैल्शियम लेकर भी हड्डियां रह सकती हैं कमजोर, पढ़ें Vitamin-D और एक्सरसाइज के बिना क्यों बेकार है मेहनत

By Dr. Rakesh KomuravelliEdited By: Nikhil Pawar
Published: Thu, 29 Oct 2026 11:49 AM (IST)

हम अक्सर यह मान लेते हैं कि कैल्शियम की एक गोली हड्डियों को फौलाद बना देगी, लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है।

बिना विटामिन-डी के कैल्शियम खाना है बेकार! (Image Source: AI-Generated)

बिना विटामिन-डी के कैल्शियम खाना है बेकार! (Image Source: AI-Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर लोग डॉक्टर से एक ही सवाल पूछते हैं, "डॉक्टर साहब, मैं रोज कैल्शियम की गोली खा रहा हूं, तो मेरी हड्डियां तो बिल्कुल ठीक होंगी ना?"

सच्चाई यह है कि केवल कैल्शियम खा लेने से हड्डियां मजबूत नहीं हो जातीं। आपके शरीर को इसे सोखने और हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए सही सिग्नल की जरूरत होती है। यहीं पर विटामिन डी, एक्सरसाइज और आपकी डाइट का असली रोल शुरू होता है।

बिना विटामिन-डी के कैल्शियम है बेकार

कैल्शियम को ईंटों की तरह समझें और विटामिन डी को उस मजदूर की तरह जो इन ईंटों को सही जगह पर लगाता है। आप चाहे जितना कैल्शियम खा लें, लेकिन अगर शरीर में विटामिन डी की कमी है, तो कैल्शियम पचेगा ही नहीं।

भारत में विटामिन डी की कमी बहुत आम है। दिनभर ऑफिस में काम करने वाले आईटी प्रोफेशनल्स, घर में रहने वाली महिलाएं और कम बाहर निकलने वाले बुजुर्ग अक्सर इसके शिकार होते हैं। बदन दर्द, थकान, पैरों में दर्द और कमजोरी, ये इसके बहुत सामान्य से लक्षण हैं।

धूप और खानपान से कैसे करें कमी पूरी?

धूप आपके शरीर में विटामिन डी बनाने में मदद करती है, लेकिन आपको कितनी धूप चाहिए यह आपकी त्वचा, उम्र और आप बाहर कितना समय बिताते हैं, उस पर निर्भर करता है। सुबह 15-20 मिनट की धूप लेना फायदेमंद है, लेकिन सिर्फ इतना ही काफी नहीं है।

आप अपनी डाइट में फैटी फिश, अंडे की जर्दी, और फोर्टिफाइड दूध और अनाज शामिल कर सकते हैं। हालांकि, अगर कमी ज्यादा है, तो केवल धूप और खाने से काम नहीं चलेगा। डॉक्टर से अपना लेवल चेक कराएं और तभी सप्लीमेंट लें, क्योंकि बिना जांच के हाई डोज लेना नुकसानदेह भी हो सकता है।

एक्सरसाइज है हड्डियों की असली दवा

जब आप चलते हैं, सीढ़ियां चढ़ते हैं, डांस करते हैं या वजन उठाते हैं, तो आप अपनी हड्डियों को यह संकेत देते हैं कि उन्हें मजबूत रहने की जरूरत है। वहीं, दिनभर कुर्सी पर बैठे रहने से इसका बिल्कुल उल्टा असर होता है।

पैदल चलना और सीढ़ियां चढ़ना बेहतरीन एक्सरसाइज हैं। हल्का वजन या रेजिस्टेंस बैंड उठाना भी फायदेमंद है क्योंकि इससे वे मांसपेशियां बनती हैं जो आपके जोड़ों और हड्डियों को सुरक्षित रखती हैं। बुजुर्गों के लिए इसका एक और बड़ा फायदा है- बेहतर बैलेंस। ज्यादातर फ्रैक्चर सिर्फ कमजोर हड्डियों की वजह से नहीं, बल्कि गिरने की वजह से होते हैं। बैलेंस सही रहेगा, तो आप कम गिरेंगे और फ्रैक्चर भी कम होंगे। इसके लिए भारी वर्कआउट की नहीं, बल्कि उम्र और सेहत के हिसाब से नियमित मूवमेंट की जरूरत है।

डाइट का मतलब सिर्फ कैल्शियम नहीं है

दूध, दही, पनीर, रागी, तिल और हरी पत्तेदार सब्जियां कैल्शियम के बेहतरीन स्रोत हैं, लेकिन हड्डियों के ढांचे को बनाने के लिए प्रोटीन भी उतना ही जरूरी है। प्रोटीन के बिना हड्डियां बेहद नाजुक हो जाती हैं।

इसके अलावा, फलों, सब्जियों, दाल और साबुत अनाज वाली बैलेंस डाइट से आपको मैग्नीशियम, विटामिन के और जिंक जैसे जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। ध्यान रहे कि स्मोकिंग, बहुत ज्यादा शराब पीना और लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना आपकी हड्डियों को चुपचाप बर्बाद कर देते हैं। अगर आप इन बुरी आदतों को छोड़ देते हैं, तो हड्डियां तेजी से रिकवर होती हैं।

बिना डॉक्टर की सलाह के न लें सप्लीमेंट्स

सिर्फ इसलिए कैल्शियम और विटामिन डी की गोलियां न खाएं क्योंकि आपका पड़ोसी ऐसा कर रहा है। जरूरत से ज्यादा कैल्शियम से किडनी में पथरी और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

अगर आप मेनोपॉज के दौर से गुजर रही हैं, थोड़ा-सा गिरने पर भी आपको फ्रैक्चर हो चुका है, आप लंबे समय से स्टेरॉयड ले रहे हैं या हमेशा बदन दर्द रहता है, तो अपने डॉक्टर से बात करें। एक साधारण ब्लड टेस्ट और बोन डेंसिटी स्कैन से यह साफ हो जाएगा कि आपको असल में किस चीज की जरूरत है।

मजबूत हड्डियां केवल कैल्शियम से या रातों-रात नहीं बनतीं, बल्कि यह जीवन भर की प्रक्रिया है। कैल्शियम से भरपूर खाना, सही मात्रा में विटामिन डी, नियमित एक्सरसाइज और एक हेल्दी लाइफस्टाइल मिलकर असली फर्क पैदा करते हैं। इसकी शुरुआत जल्दी करें और लगातार इसका पालन करें। बुढ़ापे में जब आप आजाद, एक्टिव और दर्द-मुक्त रहना चाहेंगे, तब आपकी यही मजबूत हड्डियां आपका सबसे बड़ा सहारा बनेंगी।

(डॉ. राकेश कोमुरवेल्ली, ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल्स (हैदराबाद) के रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट और ट्रॉमा सर्जन हैं)

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