किसी दवा से कम नहीं है जामुन, आयुर्वेद में डायबिटीज के अलावा और भी बीमारियों में माना जाता है फायदेमंद
जामुन एक ऐसा फल है जिसमें औषधीय गुणों का भंडार छिपा है (Jamun Ayurvedic Benefits)। इसके डायबिटीज कंट्रोल करने के गुणों के बारे में तो आप जानते ही होंगे। लेकिन क्या आपको पता है आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल और भी कई परेशानियों के इलाज के लिए किया जाता है? आइए जानें इस बारे में।

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। प्रसिद्ध आयुर्वेदिक ग्रंथ प्रकाश निघंटु में जामुन को फलेंद्र, नदी और सुरभिपत्र के नाम से वर्णित किया गया है। डॉ. आर. वात्स्यायन (संजीवनी आयुर्वेदशाला, लुधियाना) बताते हैं कि संस्कृत में इसे जंबूफल कहा गया है। प्राचीन मनीषियों ने जामुन को स्वादिष्ट, भूख को बढ़ाने कला, रक्त शोधक, तृषा कम करने वाला कहा है।
क्यों फायदेमंद है जामुन?
इसकी छाल कटु रस युक्त और स्तंभक गुण वाली होती है। इसके नियमित प्रयोग से कमजोर मसूड़ों को बल मिलता है। मुंह की दुर्गंध से छुटकारा देने वाले जामुन के फल में आग्जैलिक तथा टैनिक एसिड पाए जाते हैं। इसमें प्रचुर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स, मिनरल और विटामिन भी पाए जाते हैं। इसका पका हुआ फल पाचन और दिल के लिए फायदेमंद होता है। जामुन के सिरके में भी वही गुण होते हैं।
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ग्रामीण भारत में उल्टी आने पर जामुन के फल का दो चम्मच रस रोगी को देने की प्रथा है। नकसीर फूटने पर भी कहीं युक्ति प्रयोग में लाई जाती है। जामुन की छाल को सुखाकर और पीसकर कुटज की छाल के साथ एक-एक ग्राम की दो मात्राएं सुबह-शाम मधु के साथ देने से अल्सरेटिव कोलाइटिस अथवा रक्तातिसार में अच्छा लाभ होता है।
इससे बार-बार मल त्याग की प्रवृत्ति पर अंकुश लगता है। जामुन के पते और बादाम फल के छिलके को सम भाग में लेकर जलाकर प्राप्त की गई राख दंतों और मसूड़ों को कमजोरी और पायरिया के उपचार में लाभकारी है। मुख की दुर्गंध को दूर करने के लिए इसमें थोड़ा पिपरमिंट मिला सकते हैं।
भारतीय परंपरा में जामुन की गुठली को मधुमेह में प्रयोग किया जाता है। इसके लिए एक से दो ग्राम जामुन गुठली का चूर्ण अकेले ही अथवा किसी अन्य मधुमेह निरोधी दवाई के साथ सेवन करने से निश्चित ही रक्त में ग्लूकोज की मात्रा कम होती है और बहुमूत्र जैसे उपद्रवों से भी राहत मिलती है।
जामुन के कच्चे अथवा पके हुए फलों का भी अधिक मात्रा में सेवन करने से कई बार पेट में क्षोभ और गैस जैसे विकार होते देखे गए हैं। ऐसी स्थिति में भुने जीरे का चूर्ण एक ग्राम और सैंधा नमक आधा ग्राम मिलाकर सेवन करने से आराम मिल जाता है।
जामुन के औषधीय गुण
- जीर्ण मधुमेह में 500 मिग्रा. जामुन गुठली चूर्ण के साथ 65 मिग्रा. बसंत कुसुमाकर मिलाकर सेवन करने से अच्छा लाभ होता है।
- कई वरिष्ठ वैद्य जामुन गुठली सूखे करेले, गुड़मार मेथीदाना और बिल्व पत्र को समभाग मिलाकर चूर्ण को एक एक ग्राम की मात्रा में सुबह- शाम प्रयोग करवाते हैं।
- जामुन गुठली का चूर्ण स्त्रियों में श्थत प्रदर जैसे रोगी में लाभ देता है।
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