शाहजहां की शाही रसोई की वो कहानी, जिसने दिया आगरा को आइकॉनिक 'पेठा'
क्या आप जानते हैं कि आगरा का वो मीठा और मुंह में घुल जाने वाला पेठा जिसे खाते ही जुबां पर मिठास छा जाती है उसका जन्म (Origin Of Petha) सदियों पहले मुगल बादशाह शाहजहां की शाही रसोई में हुआ था? जी हां यह सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि इतिहास के पन्नों से निकली एक स्वादिष्ट विरासत है। आइए विस्तार से जानते हैं इसके शाही सफर के बारे में।

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आगरा का नाम सुनते ही सबसे पहले जहन में ताजमहल का खूबसूरत नजारा उभरता है, लेकिन इस शहर की एक और मीठी पहचान है- यहां के रसीले पेठे। जी हां, यह सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि आगरा की शाही विरासत से जुड़ा एक ऐसा व्यंजन है, जिसकी हर बाइट में लाजवाब स्वाद घुला हुआ है। ऐसे में, क्या आपने कभी सोचा है कि यह स्वादिष्ट पेठा, जो आज दुनियाभर में पसंद किया जाता है, आखिर आया कहां से (Agra Petha History)? अगर नहीं, तो आइए इस आर्टिकल में जान लीजिए इसके बारे में।
कहां से आया आगरा का शाही पेठा?
कहानी मुगल बादशाह शाहजहां के दौर की है। बताया जाता है कि एक बार शाहजहां अपने रोज के भोजन से ऊब गए थे और उन्हें कुछ हल्का, स्वादिष्ट और पौष्टिक खाने की इच्छा थी। उन्होंने अपने शाही हकीमों और रसोइयों को आदेश दिया कि वे ऐसा कुछ बनाएं जो उनके मन को भा जाए। कई दिनों तक शाही रसोइए इस चुनौती पर काम करते रहे। वे ऐसी सब्जी की तलाश में थे जो आसानी से उपलब्ध हो, हल्की हो और उसे मीठा रूप दिया जा सके।
इसके अलावा, ताजमहल के निर्माण के वक्त जब मजदूरों को दिन-रात काम करना पड़ता था, तो उन्हें एनर्जेटिक बनाए रखने और कुछ पौष्टिक खिलाने के लिए शाही हकीमों और बावर्चियों पर बहुत दबाव था। बादशाह खुद चाहते थे कि ऐसी कोई चीज बने जो न सिर्फ स्वादिष्ट हो, बल्कि शरीर को ठंडक और ऊर्जा भी दे।
इसी खोज में शाही रसोई के बावर्चियों ने कद्दू और चीनी का इस्तेमाल करके एक नई मिठाई बनाने का प्रयोग किया। कई प्रयोगों के बाद, उन्होंने एक ऐसी विधि विकसित की जिससे कद्दू को उबालकर, उसमें चीनी की चाशनी और कई तरह के मसालों को मिलाकर एक अनोखी मिठाई बनाई गई। यह मिठाई मीठी, ताजगी देने वाली और आसानी से पचने वाली थी।
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शाही दावतों से आपकी थाली तक
शुरुआत में यह मिठाई शाही परिवार और ताजमहल के निर्माण में लगे खास लोगों के लिए बनाई जाती थी। इसकी पौष्टिकता और स्वाद ने इसे जल्द ही शाही दस्तरखान पर जगह दिला दी। धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ी और यह शाही रसोई से निकलकर आम जनता तक पहुंची। आगरा के कारीगरों ने इस हुनर को सीखा और अपनी कला से इसे और निखारा।
आज आगरा में आपको अलग-अलग किस्म के पेठे मिलेंगे- सादा पेठा, अंगूरी पेठा, चॉकलेट पेठा, केसर पेठा और न जाने कितने ही फ्लेवर! मगर इन सब की जड़ में वो सदियों पुरानी शाही रसोई की कहानी ही है।
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