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    ट्राइबल सेल्फ रुल सिस्टम पर बोले सालखन- आदिवासी समाज को बर्बादी और गुलामी में जकड़ने के लिए दोषी है संस्था

    By Jagran NewsEdited By: Mohit Tripathi
    Updated: Sun, 02 Apr 2023 04:00 PM (IST)

    आदिवासी सेंगेल अभियान जिला समिति की बैठक को संबोधित करते हुए रविवार को सालखन मुर्मू ने कहा कि आदिवासी गांव समाज को बर्बादी और गुलामी की जंजीरों में जक ...और पढ़ें

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    ट्राइबल सेल्फ रुल सिस्टम के विरुद्ध सेंगेल अभियान सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेगा जनहित याचिका।

    जागरण संवाददाता, चाईबासा: आदिवासी सेंगेल अभियान जिला समिति की बैठक जिला परिषद सभागार में पूर्व सांसद और आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखान मुर्मू की अध्यक्षता में हुई।

    बैठक को संबोधित करते हुए मुर्मू ने कहा कि आदिवासी गांव समाज को बर्बादी और गुलामी की जंजीरों में जकड़ने के लिए सर्वाधिक दोषी आदिवासी स्वशासन व्यवस्था या ट्राइबल सेल्फ रुल सिस्टम के नाम पर वंशानुगत नियुक्त मानकी-मुंडा है।

    मानकी मुंडा पर लगाया आरोप

    उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था जनतंत्र, संविधान, कानून और मानव अधिकारों को नहीं मानता है। लगभग सभी आदिवासी गांव समाज में नशापान, अंधविश्वास राजनीतिक कुपोषण आदि जारी है। यह व्यवस्था इसको बढ़ाने का काम करता है।

    मानकी मुंडा के योगदान को बताया नगण्य

    सालखन ने कहा कि परंपरा के नाम पर वंशानुगत नियुक्त अधिकांश माझी परगना, मानकी-मुंडा-डाकुवा अनपढ़, पियक्कड़, संविधान कानून से अनभिज्ञ होने के कारण इनको नाचने-गाने, खाने-पीने, मौज मस्ती करने से ज्यादा कुछ नहीं समझ में आता है। नतीजनन आदिवासी अस्तित्व, पहचान और हिस्सेदारी आदि की सुरक्षा और संवर्धन में इनका योगदान नगण्य है।

    मानकी मुंडा पर मुद्दों पर चर्चा नहीं करने का लगाया आरोप

    मुर्मू ने आगे कहा कि मानकी-मुंडा व्यवस्था के अगुआ गांव समाज में मरांग बुरु बचाने, सरना धर्म कोड लागू करने, संताली को झारखंड की राजभाषा बनाने सीएनटी एसपीटी कानून लागू करने, गांव के लोगों को एकजुट करने आदि की चर्चा नहीं करते हैं। आदिवासी समाज में उपलब्ध शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार मिले।

    आदिवासियों के मुद्दों को लेकर समझ पर उठाया सवाल

    पूर्व सांसद ने आगे कहा कि स्थानीयता, आरक्षण, रोजगार नीति आदि लागु करने जैसी बातें इनकी समझ से बहुत दूर है। अंततः रुमुग, बुलुग, इंडोम, वारान, डान- पनते, महिला विरोधी मानसिकता, ईर्ष्या द्वेष, वोट को हड़िया दारु में खरीद बिक्री आदि क्रियाकलाप आदिवासी गांव समाज का जीवन शैली बन चुका है। सती प्रथा की तरह आदिवासी स्वशासन अब स्वशोषण बन चुका है।

    JMM पर इस व्यवस्था को बढ़ावा देने का लगाया आरोप

    सालखान मुर्मू ने कहा कि दूसरी तरफ आग में घी की तरह झारखंड मुक्ति मोर्चा इसकी कुव्यवस्था को अपनी वोट बैंक के लोभ लालच में बढ़ावा देते हुए समर्थन करता है। घोषणा करता है कि सभी माझी-परगना, मानकी-मुंडा आदि को मासिक मानदेय मिलेगा। मोटर साइकिल दिया जायेगा। माझी हाउस भी प्रदान किया जायेगा। यह आदिवासी गांव समाज को और बर्बाद करने की कवायद है।

    ट्राइबल सेल्फ रुल सिस्टम में सुधार के लिए राष्ट्रपति को दिया गया ज्ञापन

    सालखन ने कहा कि आदिवासी सेंगेल अभियान इसका विरोध करता है लेकिन जनतांत्रिक और संविधान की मर्यादा करने वाले मानकी-मुंडा को सरकार सहयोग करे तो सेंगेल अभियान उसका समर्थन कर सकती है। ट्राइबल सेल्फ रुल सिस्टम में जनतांत्रिक और संवैधानिक सुधार के लिए दो राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया गया है। अगर जरुरत पड़ी तो इस कुव्यवस्था को सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर भी किया जायेगा।