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    खरसावां के शहीदों को मिलेगा सरकारी सम्मान, आश्रितों की पहचान करेगी सरकार : हेमंत सोरेन

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 03:55 PM (IST)

    खरसावां गोलीकांड के शहीदों की बरसी पर खरसावां शहीद स्थल पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। अनुमानतः 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की, ...और पढ़ें

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    खरसावां शहीद स्‍थल पर मंच पर मौजूद मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन व अन्‍य।

    जागरण संवाददाता, सरायकेला। खरसावां गोलीकांड के अमर शहीदों की बरसी पर गुरुवार को खरसावां शहीद स्थल जनसैलाब से पट गया। शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए सुबह से ही लोगों का तांता लगा रहा और दिन भर मेला जैसा दृश्य बना रहा। 
     
    अनुमान के मुताबिक लगभग 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शहीद बेदी पर पहुंचकर खरसावां गोलीकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।शहीद स्थल के आसपास दो किलोमीटर के दायरे में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। 
     
    पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। श्रद्धालुओं को नंगे पांव ही शहीद स्थल में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। पुरुष और महिला श्रद्धालु कतारबद्ध होकर शहीद बेदी तक पहुंचे और अगरबत्ती, तेल तथा फूल-मालाएं अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।  
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    खरसावां शहीद स्‍थल पर उमड़ी लोगों की भीड़।

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    पुष्प अर्पित कर अमर शहीदों को नमन किया 

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी खरसावां पहुंचे। मुख्यमंत्री ने पहले खरसावां शहीद केरसे मुंडा शिलापट्ट पर पारंपरिक रूप से तेल अर्पित किया, इसके बाद शहीद बेदी पर पुष्प अर्पित कर अमर शहीदों को नमन किया। 
     
    श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि खरसावां शहीद स्थल आदिवासी समुदाय के हक और अधिकार के लिए किए गए ऐतिहासिक संघर्ष और शहादत का प्रतीक है। 
     
    उन्होंने कहा कि आदिवासी और मूलवासी समाज का जीवन हमेशा संघर्षमय रहा है और इन्हीं संघर्षों व बलिदानों की बदौलत आज हमारी पहचान कायम है। खरसावां के शहीद स्थल हमें निरंतर मार्गदर्शन देते रहेंगे। 

     

    आश्रितों को सम्मान देगी झामुमो 

    मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य सरकार खरसावां गोलीकांड के शहीदों को चिन्हित कर उनके आश्रितों को सम्मान देने का कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास होगा कि अगले शहीद दिवस तक सभी शहीदों के आश्रितों को खोजकर सामने लाया जाए और उन्हें सम्मानित किया जाए। 
     
    इसके लिए एक मसौदा तैयार किया गया है। शहीदों के आश्रितों की पहचान के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की जाएगी।  
     
    मुख्यमंत्री ने ग्रामीण सशक्तिकरण पर भी जोर देते हुए कहा कि राज्य में पेसा कानून बनाया गया है, जिससे गांवों का शासन मजबूत होगा और ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार मिलेंगे। 
     
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    खरसावां में शहीद स्‍मारक के पास बनी बेदी पूजा करने जाते लाेग।

    ग्रामीण इलाकों में दलालों की भूमिका समाप्त होगी

     
    इससे ग्रामीण इलाकों में दलालों की भूमिका समाप्त होगी और विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने किसानों से खेतों में सोलर पैनल लगाने और उत्पादित बिजली सरकार को बेचने का भी आह्वान किया।  
     
    मुख्यमंत्री ने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी हम सभी खरसावां में एकत्र हुए हैं और आगे भी होते रहेंगे। यह दिन खरसावां गोलीकांड के अमर वीर शहीदों के प्रति सम्मान प्रकट करने और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का दिन है। 
     
    उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी समाज का प्रकृति से गहरा रिश्ता रहा है और जल, जंगल व जमीन की रक्षा के लिए वे सदैव संघर्ष करते रहे हैं।

    बुधवार रात से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी 

    गौरतलब है कि खरसावां के शहीदों की बरसी पर बुधवार रात से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। शहीद पार्क के भीतर जूता-चप्पल पहनकर या किसी राजनीतिक दल का झंडा-बैनर लेकर प्रवेश पर रोक लगाई गई थी। 
     
    मुख्य गेट के पास कंट्रोल रूम बनाया गया था। शहीद पार्क और चांदनी चौक क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, वहीं ड्रोन कैमरों से भी निगरानी की जा रही थी। 

    प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग गेट बनाए 

    श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वाहन पार्किंग की व्यवस्था ईदगाह मैदान और तसर कार्यालय के समीप मैदान में की गई थी। प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग गेट बनाए गए थे और पूरे परिसर में बैरिकेडिंग की गई थी।

    इस मौके पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए राज्य सरकार के मंत्री दीपक बिरुवा, सांसद जोबा माझी, विधायक दशरथ गागराई, निरल पुरती, सुखराम उरांव, सविता महतो, समीर मोहंती, संजीव सरदार, सोमेश सोरेन, मंगल कालिंदी, जगत माझी, पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन सहित कई वरिष्ठ नेता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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    खरसावां का शहीद स्‍मारक।