Chaibasa News: बाल सुधार गृह से फरार 21 में से सात बाल बंदी लौटे, अब बोन डेंसिटी टेस्ट कराने की चल रही तैयारी
चाईबासा के सम्प्रेषण गृह से 21 बाल बंदी मंगलवार शाम को फरार हो गए थे। उनमें से चार बाल बंदी गुरुवार की रात को वापस लौट आए हैं। बुधवार को तीन और बाल बंदियों को वापस लाया गया है। अभी भी 14 बाल बंदी फरार हैं। फरार बाल बंदियों में से लगभग आठ दुष्कर्म जैसे कांड में आरोपित हैं और कुछ पर रेलवे एक्ट का केस चल रहा है।

जागरण संवाददाता, चाईबासा। पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा में स्थित सम्प्रेषण गृह (बाल सुधार गृह) का गेट तोड़कर मंगलवार शाम 21 बाल बंदी फरार हो गये थे।
उनमें से चार बाल बंदी गुरुवार की रात 10 बजे वापस लौट आए। वहीं, बुधवार को तीन और बाल बंदियों को सम्प्रेषण गृह ले आया गया। 14 बाल बंदी अभी भी फरार हैं।
पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। बताया जा रहा है फरार बाल बंदियों में से लगभग आठ दुष्कर्म जैसे कांड में आरोपित हैं एवं कुछ पर रेलवे एक्ट का केस चल रहा है।
इधर, घटना की गंभीरता को देखते हुए रांची से महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की निदेशक समीरा एस और जिला समाज कल्याण कार्यालय के अपर सचिव अभयनंदन अम्बष्ठ बुधवार की सुबह चाईबासा के सम्प्रेषण गृह पहुंचे।
उन्होंने जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मामले की जांच की। मौके पर उप विकास आयुक्त संदीप कुमार मीणा, एसडीएम संदीप अनुराग टोप्पो और एसडीपीओ बहामन टुटी मौजूद रहे।
बाल संरक्षण आयोग के प्रतिनिधि और जिला पदाधिकारी भी वहां उपस्थित थे। निदेशक व अपर सचिव ने करीब तीन घंटे तक सम्प्रेषण गृह में जाकर जांच पड़ताल की। वहां निरुद्ध बच्चों से व्यवस्थाओं के बारे में पूछा।
पूरे घटनाक्रम की भी जानकारी ली। इसके बाद उपायुक्त कुलदीप चौधरी से मिलकर आगे की कार्रवाई के संबंध में दिशा-निर्देश दिये।
एसपी ने मौके पर पहुंचकर मामले का जायजा लिया
- उपायुक्त कुलदीप चौधरी ने कहा कि मंगलवार शाम जब यह घटना घटी थी, उस वक्त 21 बच्चे बाहर निकले थे। जैसे ही इस घटना की जानकारी मिली, हमने और एसपी ने मौके पर पहुंच कर मामले का जायजा लिया।
- बुधवार की शाम तक उनमें से 7 बच्चों को वापस ले आएगा गया है। बाकी बच्चों को भी पकड़ने की कार्रवाई की जा रही है। राज्य से और जिले से आई टीम ने निरीक्षण किया है।
- सभी बिंदुओं पर बारीकी से जांच की जा रही है। जांच में जो भी फैक्ट निकल कर आए हैं, उस पर कार्रवाई जरूर की जाएगी।
सही उम्र का पता लगाने को सम्प्रेषण गृह के बंदियों का होगा बोन डेंसिटी टेस्ट
चाईबासा स्थित सम्प्रेषण गृह के गेट का ताला तोड़कर बाल बंदियों के फरार होने की घटना ने इस बाल सुधार गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं। यहां बंद कुछ बच्चे इतने बड़े दिखते हैं कि उनकी सही उम्र का पता लगाना मुश्किल हो रहा है। ये ताकतवर भी हैं।
होमगार्ड अथवा सामान्य पुलिसकर्मियों के लिए इन्हें संभालना मुश्किल हो रहा है। एक माह पूर्व भी इन लोगों ने एक कर्मचारी का सिर फोड़ दिया था। लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन यहां बंद सभी बच्चों का बोन डेंसिटी टेस्ट कराने पर विचार कर रहा है ताकि उनकी सही उम्र का पता लगाया जा सके।
जिला प्रशासन का कहना है कि सटिफिकेट अथवा शारीरिक संरचना के आधार पर इनकी सही उम्र का पता लगाना मुश्किल है। इसलिए हम लोग इनका बोन डेंसिटी टेस्क कराने पर विचार कर रहे हैं। स्वीकृति मिलने पर यह किया जायेगा। सम्प्रेक्षण गृह में कुल बंदियों की संख्या 85 है।
इनमें चाईबासा के 61 और सरायकेला के 23 बच्चे हैं। इनके लिए तीन वार्ड बने हैं। एक वार्ड में 33, दूसरे में 25 व तीसरे में 26 बच्चे रहते हैं। वर्तमान में इन्हीं में से 14 बच्चे फरार हैं। एक बच्चा एमजीएम में भर्ती है।
सम्प्रेषण गृह में दो-दो घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी देते हैं पांच पुलिसकर्मी
शहर से सटकर बने इस सम्प्रेषण गृह के पीछे कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय है। बगल में जिला स्कूल है। कुछ ही दूरी पर सीआरपीएफ का कैंप भी है। ऊंची-ऊंची दीवारों पर कंटीले तार लगे हैं।
बाहरी सुरक्षा में दो-दो घंटे की शिफ्ट में पांच पुलिसकर्मी ड्यूटी देते हैं। भीतर में होमगार्ड के जवान तैनात रहते हैं। इन सबके बावजूद मंगलवार की शाम छह बजे सबके सामने हंगामा, तोड़फोड़ व मारपीट करते हुए सारे 85 बाल बंदी गेट तोड़कर बाहर सड़क पर आ गये।
इनमें से 21 मौका पाकर सामने से फरार भी हो गये। पुलिस ने सात बंदियों को तो किसी तरह ढूंढ निकाला है मगर 14 अभी भी आजाद घूम रहे हैं। इनमें रेप केस के आरोपित भी शामिल हैं।
लम्बे समय से रिहाई की प्रक्रिया बंद रहने से कुंठा में बाल बंदी
बुधवार को सम्प्रेषण गृह का निरीक्षण करने पहुंचे पदाधिकारियों ने यहां के हालात जानने की कोशिश की तो बच्चों ने भी खुलकर अपनी समस्या रखी।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, बच्चों ने कहा कि हम लोग लंबे समय से यहां पर रह रहे हैं। कोई ढाई साल तो कोई चार साल से यहां बंद हैं। हमारी रिहाई का मामला लंबे समय से लंबित चल रहा है।
यहां रहते-रहते हम हताश व कुंठित हैं। नतीजतन सम्प्रेषण गृह के भीतर आये दिन मारपीट की घटनाएं हो रही हैं। हमारा एक साथी मानसिक रूप से बीमार हो गया है। एक साथी का इलाज एमजीएम में चल रहा है।
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