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    Lok Sabha Election 2024: चतरा सीट पर अब तक किसका रहा दबदबा, कब अस्तित्व में आई; यहां पढ़ें पूरी जानकारी

    Updated: Sun, 17 Mar 2024 05:46 PM (IST)

    Lok Sabha Election 2024 देशभर में लोकसभा चुनाव का बिगुल बज गया है। झारखंड का चतरा लोकसभा क्षेत्र में चुनाव पांचवें चरण में 20 मई को होगा परंतु प्रत्याशी को लेकर यहां अभी भी सस्पेंस बरकरार है। राजनीतिक पार्टियों के द्वारा अभी तक यहां प्रत्याशी का चयन नहीं होने के पीछे स्थानीयता का मुद्दा तेज होना भी एक कारण माना जा रहा है।

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    Lok Sabha Election 2024: चतरा सीट पर अब तक किसका रहा दबदबा, कब अस्तित्व में आई

    राजीव, नीलांबर-पीतांबरपुर (पलामू)। Lok Sabha Election 2024 लोकसभा चुनाव का बिगुल बज गया है। चतरा लोकसभा क्षेत्र का चुनाव पांचवें चरण में 20 मई को होगा, परंतु प्रत्याशी को लेकर यहां अभी भी सस्पेंस बरकरार है। राजनीतिक पार्टियों के द्वारा अभी तक यहां प्रत्याशी का चयन नहीं होने के पीछे स्थानीयता का मुद्दा तेज होना भी एक कारण माना जा रहा है। 

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    चुनावी सुगबुगाहट के पहले से ही स्थानीय एवं बाहरी पर काफी तेज चर्चाएं हो रही थी। इस बार लोकसभा चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार की मांग लगातार होते आई है। हाल ही के दिनों में भाजपा नेता लाल सूरज ने स्थानीयता को मुद्दा बनाते हुए पांकी प्रखंड में सम्मेलन भी किया था। आंकड़े पर नजर डालें तो यहां अब तक कोई भी स्थानीय सांसद नहीं बन पाया है।

    1957 से शुरू हुआ चतरा लोकसभा क्षेत्र का चुनाव

    चतरा 1957 में पहली बार लोकसभा क्षेत्र बना तब छोटा नागपुर संताल परगना जनता पार्टी की उम्मीदवार विजया राजे विजयी हुई थीं। 1962 से 1971 तक चतरा जिला में दो लोकसभा क्षेत्र चतरा लोकसभा एवं छतरपुर लोकसभा हुआ करता था।

    1962 एवं 1967 के चुनाव में भी विजया राजे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विजय हुई थीं। 1971 से विजया राजे की राज खत्म हुई। उस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शंकर दयाल सिंह ने 67786 मत लाकर जनता पार्टी के विजया राजे को 10081 वोट से हराया था।

    1977 में चतरा लोकसभा बनी अकेली सीट

    1977 के लोकसभा चुनाव से चतरा लोकसभा अकेली सीट बन गई। उस चुनाव में भारतीय लोक दल के सुखदेव प्रसाद वर्मा ने 203878 वोट ला कर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शंकर दयाल सिंह को 143534 वोट से हराया। 1980 में कांग्रेस के रणजीत सिंह 106751 वोट ला कर सांसद बने। इन्होंने जनता पार्टी के सुखदेव प्रसाद वर्मा को 45586 वोट से हराया था।

    1989 एवं 1991 में क्रमशः 224839 एवं 152477 वोट ला कर लगातार जनता दल के उपेंद्रनाथ वर्मा सांसद चुने गए। तो 1996 एवं 1998 में भाजपा से धीरेंद्र अग्रवाल लगातार दो बार सांसद बने। 1996 में धीरेन्द्र अग्रवाल को 216715 वोट मिला तो उनके प्रतिद्वंद्वी जनता दल के कृष्णानंद प्रसाद को 162345 वोट मिले, जबकि 1998 के चुनाव में धीरेंद्र अग्रवाल ने 225086 वोट लाकर रजद के नागमणि को 33375 वोट से हराया।

    1999 के चुनाव में राजद के नगमणि ने जित हासिल की। उन्हें 219783 वोट मिला तो उनके प्रतिद्वंद्वी रहे बीजेपी के धीरेंद्र अग्रवाल को 164684 वोट हासिल हुए।

    झारखंड बंटवारे के बाद 2004 में हुआ पहला चुनाव

    झारखंड को अलग राज्य बनने के बाद वर्ष 2004 में चतरा लोकसभा का पहला चुनाव हुआ। इस चुनाव में बड़ी राजनीतिक उलटफेर हुई थी, जहां धीरेंद्र अग्रवाल भाजपा को छोड़ राजद का दामन थाम लिया। राजद के टिकट पर धीरेंद्र अग्रवाल ने 1,21,464 वोट लाकर जनता दल यूनाइटेड के इंदर सिंह नामधारी को 18,855 वोट से हराया। 2009 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में इंदर सिंह नामधारी को 1,08,336 वोटरों का आशीर्वाद मिला।

    उन्होंने कांग्रेस के धीरज प्रसाद साहू को 16178 वोट से हराकर लोकसभा पहुंचे। 2014 एवं 2019 के चुनाव में लगातार बीजेपी के सुनील कुमार सिंह सांसद चुने गए। 2019 में इन्हें अब तक का सबसे अधिक रिकार्ड मत 528077 वोट मिला है।

    इनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस पार्टी के मनोज कुमार यादव को 150206 वोट पर ही संतोष करना पड़ा। अब 2024 के लोकसभा चुनाव का बिगुल बज गई है। 20 मई को चतरा लोकसभा के मतदाता अपना मत का प्रयोग करेंगे।

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