Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    झारखंड में 2 विश्वविद्यालयों ने छात्रों से वसूले 11 करोड़ रुपये, फिर भी नहीं कराया छात्रसंघ चुनाव 

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 11:02 AM (IST)

    रांची विश्वविद्यालय और डीएसपीएमयू ने पिछले सात वर्षों में छात्र संघ चुनाव और यूनियन फीस के नाम पर छात्रों से लगभग 11 करोड़ रुपये वसूले हैं, लेकिन चुना ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    स्टूडेंट यूनियन के नेता। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, रांची। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पिछले सात वर्षों के दौरान रांची यूनिवर्सिटी (आरयू) और डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी (डीएसपीएमयू) में स्टूडेंट इलेक्शन व स्टूडेंट यूनियन फीस के नाम पर वसूली हो रही है।

    एक छात्र ने नाम नहीं छापने की शर्त पर एडमिशन पर्ची दिखाते हुए कहा कि स्टूडेंट इलेक्शन फीस के नाम पर प्रति छात्र 70 रुपये, जबकि स्टूडेंट यूनियन फीस के नाम पर प्रति छात्र 30 रुपये लिए तो जा रहे हैं, लेकिन चुनाव की कोई सुगबुगाहट नहीं है।

    यदि इन रुपये का हिसाब लगाए तो पता चलता है कि अकेले डीएसपीएमयू में करीब 14,000 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं और इनसे पिछले सात साल में करीब 98 लाख रुपये वसूले गए हैं। जबकि, आरयू में डेढ़ लाख स्टूडेंट्स नामांकित हैं। इस तरह इनसे करीब साढ़े दस करोड़ की वसूली की जा चुकी है।

    ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि किस तरह छात्रों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। इस मुद्दे पर कई बार अलग-अलग छात्र संगठनों ने मोर्चा भी खोला, लेकिन नतीजा शून्य रहा। आज कॉलेजों और यूनिवर्सिटी की समस्याओं को पटल पर रखनेवाला कोई छात्र मंच तक नहीं है।

    प्रशासन तक छात्र तभी पहुंच पाते हैं, जब उनके पास मान्यता प्राप्त प्रतिनिधि हो। इस संबंध में छात्र संगठनों ने कहा कि राज्य सरकार को स्पष्ट नीति बनानी होगी कि हर दो वर्ष में छात्रसंघ चुनाव हों, क्योंकि यह लोकतंत्र की बुनियाद है।

    छात्रसंघ चुनाव न कराना कोई प्रशासनिक विवशता नहीं बल्कि घोटालों को छिपाने और तानाशाही बनाए रखने की सुनियोजित साजिश है। आइडी कार्ड, शुल्क, परीक्षा व्यवस्था, नियुक्ति और खरीद प्रक्रियाओं में लगातार हो रही अनियमितताओं का भंडाफोड़ न हो जाए, इसी डर से कुछ लोग छात्रसंघ चुनाव रोक रहे हैं। चुनाव होने से छात्रों को शैक्षणिक व प्रशासनिक समस्याओं पर सीधा हस्तक्षेप, फीस-परीक्षा-छात्रवृत्ति हास्टल जैसे मुद्दों पर समाधान तथा नेतृत्व और लोकतांत्रिक प्रशिक्षण मिलता है। चुना हुआ छात्रसंघ प्रतिनिधि सवाल पूछता है, जवाब मांगता है और यूनिवर्सिटी को जवाबदेह बनाता है। -अभिषेक झा, अबुआ अधिकार मंच।

    2019 के बाद से आज तक छात्रसंघ चुनाव न कराना छात्र समुदाय के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। जिस चुनाव को हर वर्ष होना चाहिए, उसे 6 वर्षों से टालते आना प्रशासन की असंवेदनशीलता और गैर-जवाबदेही को दर्शाता है। छात्रों के अधिकारों को बहाल करना अनिवार्य रूप से लागू होना चाहिए। - विवेक तिर्की, अध्यक्ष, आदिवासी छात्रसंघ, डीएसपीएमयू।

    आरयू में पिछले 7 वर्षों से छात्रसंघ चुनाव नहीं होना लोकतंत्र का उल्लंघन है। छात्रों की आवाज दबाकर मनमानी चल रही है। एनएसयूआइ स्पष्ट मांग करती है कि बिना देरी छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं, क्योंकि बिना लोकतंत्र यूनिवर्सिटी नहीं चलाया जा सकता। छात्रों को उनका संवैधानिक अधिकार तुरंत मिले। - आरुषि वंदना, राष्ट्रीय संयोजक, NSUI

    पिछले 7 वर्षों से छात्र संघ चुनाव न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। छात्रसंघ सिर्फ एक चुनावी प्रक्रिया नहीं बल्कि छात्रों की आवाज, उनके अधिकारों और समस्याओं को संस्थागत रूप से उठाने का माध्यम है, जब यह व्यवस्था ही समाप्त कर दी जाती है, तो छात्रों को अपनी ही समस्याओं के समाधान के लिए भटकना पड़ता है। प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद की खाई और गहरी हो जाती है, जिसका नुकसान आम विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है। - संजना, संयुक्त सचिव, आइसा, रांची

    छात्रसंघ चुनाव का न होना पूरी तरह से सरकारी नीतियों और प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। छात्र प्रतिनिधि मुखर होकर अपनी मांगों को शैक्षणिक संस्थानों के पटल पर रखते हैं। जिससे छात्र छात्राओं की समस्याओं का निराकरण भी होता है। -रवि अग्रवाल, छात्रनेता, ABVP

    छात्रसंघ चुनाव से लाभ

    • छात्रों की आवाज सीधे यूनिवर्सिटी प्रशासन तक पहुंचती हैl 
    • मजबूत और संगठित छात्र नेतृत्व विकसित होता हैl 
    • यूनिवर्सिटी प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती हैl 
    • छात्रहित की नीतियां अधिक सटीक और आवश्यक रूप से लागू होती हैंl 
    • कालेज और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव होने से छात्रों में लोकतांत्रिक मूल्य और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है।

    चुनाव नहीं होने से परेशानी

    • छात्रों की समस्याएं अनसुनी और अनदेखी रह जाती हैंl
    •  फीस वृद्धि, सेशन डिले व रिजल्ट की देरी पर कोई नियंत्रण नहीं रहता हैl 
    • पीड़ित छात्र छात्राओं के लिए कोई प्रतिनिधि उपलब्ध नहींl 
    • यूनिवर्सिटी में मनमानी, भ्रष्टाचार और गैर-जवाबदेही निरंतर बढ़ती जा रही हैl 
    • हॉस्टल, लाइब्रेरी, लैब, सुरक्षा व छात्रवृत्ति आदि की समस्याएं बनी रहती हैं।

    प्रभारी वीसी बोले- मुझे छात्र संघ चुनाव के संबंध में नहीं है कोई जानकारी

    वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय दोनों प्रभार में चल रहा है। दोनों विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति नहीं हैं। डॉ. डीके सिंह दोनों विश्वविद्यालयों के प्रभारी कुलपति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस संबंध में जब दैनिक जागरण ने डॉ. सिंह पूछा तो उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव की तिथि के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

    साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि जो भी दिशा-निर्देश प्राप्त होगा, वह उसका अनुपालन करेंगे। दैनिक जागरण ने जब उन्हें बताया कि दोनों विश्वविद्यालयों ने छात्रों से स्टूडेंट इलेक्शन फीस और स्टूडेंट यूनियन फीस के नाम पर करोड़ों रुपये वसूल चुके हैं, और अभी भी वसूली की जा रही है। इस पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वे इसका पता लगाकर ही कुछ बता पाएंगे।